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बैंक से 10 लाख रुपये से अधिक निकालने वाले आयकर विभाग के रडार पर

नई दिल्ली 30 अक्टूबर 2018 । विधानसभा चुनाव में ब्लैक मनी का उपयोग रोकने के लिए निर्वाचन आयोग काफी सख्त है। नई गाइड लाइन के तहत बैंकों से 10 लाख से अधिक ट्रांजेक्शन पर आयकर विभाग की नजर रहेगी।

इस संबंध में निर्वाचन आयोग से निर्देश मिलने पर कलेक्टर ने बैंक अधिकारियों को भी आदेश जारी कर दिए हैं। जिसमें हर प्रकार के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी तत्काल जिला निर्वाचन कार्यालय और आयकर विभाग को देने के लिए कहा गया है।

आचार संहिता में बैंक से एक लाख से अधिक का लेन-देन होते ही प्रशासन अलर्ट मोड पर आ जाता है। बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि एक लाख से अधिक या संदिग्ध लेन-देन की स्थिति दिखाई देती है तो तत्काल जानकारी निर्वाचन कार्यालय को दी जाए। साथ ही खाताधारक की पूरी जानकारी लीड बैंक अधिकारी के माध्यम से देना होगी।एक दिन में यदि कोई एक बार में दस लाख से अधिक की राशि निकालता है तो सूचना प्रशासन के साथ ही आयकर विभाग को भी दी जाएगी। इनकम टैक्स का विजिलेंस डिपार्टमेंट फिर अपने स्तर पर इसकी जांच करेगा। जिसमें ये देखा जाएगा कि राशि कहां से आई, क्यों निकाली गई और कहां उपयोग की गई है। गौरतलब है कि 2013 के चुनाव में भी आचार संहिता के दौरान बड़ा लेनदेन करने वालों को थोक में नोटिस जारी हुए थे। आचार संहिता के दौरान जिला निर्वाचन कार्यालय सामाजिक संस्थाओं के बैंक खातों की भी निगरानी करेगा। यदि किसी संस्था का बैंक में अचानक लेन-देन बढ़ता है तो वह भी जिला निर्वाचन कार्यालय के जांच के दायरे में आ सकता है।विधानसभा चुनाव में निर्वाचन आयोग ने एक प्रत्याशी के लिए खर्च की सीमा 28 लाख तय की है। जिसमें से मात्र 20 हजार रुपए ही नगद खर्च किए जा सकते हैं। बैंकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्याशी का अलग से खाता खोला जाए और तत्काल चेक बुक उपलब्ध कराई जाए। ग्वालियर में हुई कैश जब्ती की कार्रवाई की जानकारी अब तक आयकर को नहीं दी गई है। इसलिए आयकर विभाग ने फिलहाल इसमें हस्तक्षेप नहीं किया है। वहीं छतरपुर में करीब 14 लाख की राशि को सीज किया गया है। इस मामले की आयकर विभाग ने जांच शुरु कर दी है। जिसमें पता किया जा रहा है कि कैश कहां से आया, कहां जा रहा था और किस कारण से ले जाया जा रहा था।

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