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मोदी के ‘पकोड़े तलने’ के बयान पर सिंधिया ने तले समोसे

नई दिल्ली 1 फरवरी 2019 । ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने तीन दिन के दौरे पर अशोकनगर में हैं जहां उन्होंने सुबह ‘विकास की दौड़’ यात्रा भी निकाते हुए अधिकारियों के साथ करीब एक किलोमीटर तक दौड़ लगाई। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद सिंधिया का यह पहला दौरा था। सिंधिया ने पहले दिन जहां अधिकारियों की बैठक ली एवं अंडरब्रिज सहित कई विकास कार्यो का शुभारंभ किया तो वहीं आज दूसरे दिन जनता से जुड़ने के लिए उनके कई कार्यक्रम देखने को मिले।

सुबह लगाई विकास की दौड़
अपने अशोकनगर के दौरे पर सुबह के समय सिंधिया ने विकास की दौड़ लगाई। अशोक नगर की जनता ने ज्योतिरादित्य सिंधिया का यह मिल्खा सिंह वाला रूप पहली बार देखा। प्रशासन द्वारा आयोजित की गई इस दौड़ का नाम ‘विकास की दौड़’ रखा गया था। इस कार्यक्रम की शुरुआत यहां की कलेक्टर मंजू शर्मा ने हरी झंडी दिखा कर की। वहीं कांग्रेस सांसद सिंधिया के साथ इस दौड़ में कलेक्टर और अधिकारी भी दौड़े। नगर पालिका से शुरू हुई यह दौड़ करीब 1 किलोमीटर के बाद तुलसी पार्क में जाकर खत्म हुई। इस दौरान सभी लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा गया।

विकास की दौड़ के बाद सिंधिया ने बनाए समोसे
कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अचानक गांधी पार्क में अपनी कार रुकवाई और समोसे की दुकान पर पहुच गए, वहां पर मौजूद लोगों को शायद पहले यह लगा कि सिंधिया नाश्ता करने के मूड़ में हैं। लेकिन वहां पहुंचने के बाद सिंधिया ने हलवाई के यहां समोसा बनाना शुरू कर दिया। सिंधिया जैसे बड़े नेता को समोसा बनाते देखने के लिए लोग भारी संख्या में वहां जुट गए। इस बीच वहां पर खड़े सिंधिया के समर्थकों ने ‘महाराज सिंधिया जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए।

सिंधिया ने कहा ‘मैं UP में रहूंगा यहां कार्यकर्ता देखें’
राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र पहुंचे। यहां उन्होंने अंडरब्रिज के भूमि पूजन के अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी उन्हें दी है, इसलिए वो उत्तर प्रदेश में ज्यादा व्यस्त रहेंगे। इसलिए हो सकता है लोकसभा चुनाव में वह कम समय दे पायें। इसके बाद सिंधिया ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि यहां पर लोकसभा चुनाव की लड़ाई आप लोगों के भरोसे ही लड़ी जाएगी।

मप्र की कांग्रेस सरकार में अब भी भाजपा के चार मंत्री और सीएम है शिवराज !

प्रदेश में सरकार चाहे कांग्रेस की आ गई है, लेकिन भाजपा के चार नेता अब भी मध्यप्रदेश शासन में मंत्री बने हुए हैं। भाजपा ने लोकसभा चुनाव प्रबंधन समिति की जो लिस्ट कल जारी की, उससे तो यही खुलासा हो रहा है। इसको लेकर कांग्रेसियों ने चुटकी लेना शुरू कर दी है।

भाजपा को सत्ता के सिंहासन से जनता ने तो उतार दिया, लेकिन लगता है कि इनका सत्ता मोह कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। सत्ता में बने रहने की अभिलाषा अब भी बरकरार है और इसे भूल कहें या 15 साल की आदत, अपने नाम के आगे मंत्री जोडऩा भूले नहीं हैं। ताजा मामला लोकसभा चुनाव प्रबंधन समिति की घोषणा का है। भाजपा की मध्यप्रदेश इकाई ने कल इसकी घोषणा की और लिस्ट जारी की। लिस्ट में कुल मिलाकर 16 नेताओं के नाम हैं, हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से चार नेताओं नरोत्तम मिश्र, भूपेंद्र सिंह, राजेंद्र शुक्ल और लालसिंह आर्य के नाम के आगे अब भी मंत्री, मध्यप्रदेश शासन लिखा है। इनमें से तीन विधायक हैं, लेकिन आर्य तो अब विधायक भी नहीं हैं।

राष्ट्रीय से लेकर प्रदेश भाजपा तक यही हाल

केवल प्रदेश भाजपा ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी अब तक यह नहीं मान पा रही है कि मध्यप्रदेश की सत्ता उनसे छिन गई है। तभी तो मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय भाजपा के पोर्टल पर भी दी गई जानकारियों के अनुसार शिवराजसिंह चौहान अब भी प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और सीएम हाउस में ही रहते हैं।

कांग्रेस ने किया ट्रोल

इसको लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ट्विटर पर ट्रोल करते हुए लिखा है कि बड़े ही आश्चर्य की बात है कि म.प्र. चुनाव प्रबंधन समिति में 13 नंबर पर सुशोभित सिर्फ शिवराज सिंह चौहान के आगे पूर्व सीएम लिखा है। बाकी कांग्रेस सरकार जाने के बाद भी नरोत्तम मिश्र, भूपेंद्र सिंह और राजेंद्र शुल्क के आगे मंत्री लिखा है। वहीं लालसिंह आर्य के आगे भी मंत्री लिखा है, जबकि वे विधायक भी नहीं हैं।

CM कमलनाथ का नया फरमान, मीडिया से रूबरू नहीं होंगे ये 21 मंत्री

लगातार मीडिया में दिए जाने वाले विवादित बयानों के चलते कमलनाथ सरकार ने फैसला किया है कि अब केवल सात मंत्री ही मीडिया से रुबरु होंगें। इसके अलावा अन्य किसी मंत्री को मीडिया से बात करने की इजाजत नही होगी। बाकी 21 मंत्री मीडिया से कोई चर्चा नही करेंगें और ना ही सरकार की तरह से कोई पक्ष रखेंगें। वही सरकार के इस फैसले पर बीजेपी ने सवाल उठाए है। बीजेपी का कहना है कि ‘ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है , सभी मंत्रियों को अपनी राय रखने का अधिकार है।

ये मंत्री होंगे मीडिया से रूबरू
इस संबंध में मध्यप्रदेश के जनसम्पर्क मंत्री पी सी शर्मा ने बताया है कि’ मुख्यमंत्री द्वारा प्रेस से चर्चा के लिए छह अन्य मंत्री को अधिकृत किया गया है।आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री द्वारा प्रेस से चर्चा के लिए शर्मा के अतिरिक्त संस्कृति एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ, गृह मंत्री बाला बच्चन, उच्च शिक्षा, खेल एवं युवक कल्याण मंत्री जीतू पटवारी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह एवं वित्त मंत्री तरूण भनोट को अधिकृत किया गया हैं। इसके अलावा कोई मंत्री मीडिया से रुबरु नही होंगें। रोक में अधिकतर मंत्री सिंधिया खेमे के है।’

BJP ने किया कांग्रेस का घेराव
मिली जानकारी के अनुसार,मंत्रियों ने इस पर आपत्ति भी जताई है, हालांकि कोई खुलकर नहीं बोल रहा। वहीं बीजेपी ने मौका लपकते हुए सरकार का घेराव किया है। बीजेपी का कहना है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है, मंत्रियों को जनता के बीच अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है। बता दें कि बीते दिनों कृषि मंत्री सचिन यादव ने प्रेस में एक बयान जारी कर दिया था। उन्होंने कहा था कि ‘भावांतर योजना बंद की जा रही है। इसके बाद में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उन्हें फटकार लगाई थी और बाद में उन्होंने अपने बयान पर सफाई भी पेश की थी’। इस बयानबाजी के कारण जनता के बीच गलत मैसेज भी पहुंचा था। जिसको लेकर बीजेपी आक्रमण हो चली थी और आंदोलन की चेतावनी तक दे डाली थी।

वहीं हाल ही में पीडब्ल्यू मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने हेमा मालिनी पर टिप्पणी की थी और कहा था कि ‘वोट के लिए बीजेपी हेमा मालिनी से डांस करवाती है’। इसके लेकर भी खूब घमासान मचा था। मंत्रियों की ऐसी बयानबाजी से सरकार की बहुत किरकिरी हुई थी, वही विपक्ष ने सड़कों पर उतर आई थी। फिलहाल माहौल कांग्रेस के फेवर में है और दो महिने बाद लोकसभा चुनाव होने वाले है ऐसे में कमलनाथ सरकार कोई रिस्क नही लेना चाहती है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है।

इन मंत्रियों पर रोक
सज्जन सिंह वर्मा, हुकुम सिंह कराड़ा, डॉ. गोविंद सिंह, बाला बच्चन, आरिफ अकील, बृजेंद्र सिंह राठौर, प्रदीप जायसवाल, लाखन सिंह यादव, तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, इमरती देवी, ओंकार सिंह मरकाम, डॉ. प्रभुराम चौधरी, प्रियव्रत सिंह, उमंग सिंघार, हर्ष यादव, कमलेश्वर पटेल, लखन घनघोरिया, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युम्न सिंह तोमर, सचिन सुभाष यादव, सुरेंद्र सिंह बघेल।

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में कांग्रेस ने लगाया सुराख! कई नेताओं ने ज्वाइन की कांग्रेस

लोकसभा चुनाव ठीक पहले मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने भाजपा को एक बड़ा झटका दिया है। जिसके चलते भाजपा के अंदर हड़कंप मच गया है।

दरअसल चुनावों से पहले पार्टियों में तोड़फोड़ की घटनाएं आम मानी जाती हैं। लेकिन विधानसभा चुनाव में हार के बाद से भाजपा लोकसभा चुनावों में अपनी पूरी ताकत समेट कर लड़ने के लिए तैयार है।

ऐसे में भाजपा के अंदर ही विधानसभा चुनावों के दौरान पैदा हुई नाराजगी शांत होने का नाम नहीं ले रही है। इसी के चलते कई भाजपाइयों ने भाजपा को छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया है।

सूत्रों के अनुसार भाजपा अपनी लोकसभा तैयारियों के तहत कांग्रेस के सिंधिया सहित बड़े नेताओं को घेरने का अभी प्लान ही बना रही थी कि इससे पहले ही कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा पर एक ऐसा तीखा प्रहार किया है कि भाजपा तिलमिला गई है।

दरअसल सिंधिया ने अशोकनगर, गुना और शिवपुरी क्षेत्र के भाजपा नेताओं को कांग्रेस में शामिल कराया। वे इनको लेकर मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे।

इसमें भाजपा के पूर्व विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी और राजकुमार यादव शामिल हैं। इनके अलावा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मलकीत सिंह संधु व पूर्व जिला पंचायत सदस्य अमरजीत कौर के साथ चार सरपंच व चार पूर्व सरपंच भी भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। दोनों पूर्व विधायक व संधु भाजपा से विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं मिलने से नाराज थे।

इधर,सीएम के चेंबर में सिंधिया और सीएस…
वहीं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया मंगलवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिलने मंत्रालय पहुंचे। उन्होंने लोकसभा चुनाव के पहले ग्वालियर-गुना संसदीय क्षेत्र के विकास को लेकर मॉडल प्रोजेक्ट पेश किया।

दोनों के बीच करीब एक घंटे तक वन-टू-वन चर्चा हुई। दोनों में राजनीतिक विमर्श भी हुआ। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आठ फरवरी से प्रस्तावित प्रदेश दौरे को लेकर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने सिंधिया के क्षेत्र की विकास की स्थिति समझी और मुख्य सचिव एसआर मोहंती को बुलाकर ग्वालियर-चंबल के अटके हुए सभी प्रोजेक्ट जल्द से जल्द पूरा करवाने के निर्देश दिए, इसके बाद रवाना हो गए। फिर सीएम चेंबर में सिंधिया और मोहंती के बीच करीब एक घंटे बात हुई।

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सिंधिया चाहते हैं कि उनके क्षेत्र में विकास कार्य तेजी से हो। वे ग्वालियर, गुना और शिवपुरी के अफसरों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने आए थे। कमलनाथ ने पूरी स्थिति समझी। इसके बाद मोहंती के साथ बैठकर रूपरेखा बनाने के लिए कहा था।

इन मुद्दों पर हुई चर्चा
चंबल एक्सप्रेस-वे, शिवपुरी जलापूर्ति योजना, ग्वालियर जलापूर्ति योजना, चंदेरी को मिनी स्मार्ट सिटी बनाने, ग्वालियर में डीआरडीओ के लिए जमीन, गुना स्टेडियम के लिए जमीन का उपयोग बदलने और सड़क निर्माण के लिए केंद्रीय सड़क निधि का उपयोग
करने सहित अन्य रुके हुए कामों पर चर्चा हुई।

ग्वालियर-चंबल: पुलिस-प्रशासन की सर्जरी जल्द, सिंधिया ने लिस्ट सौंपी
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अब ग्वालियर-चंबल पर अपना फोकस कर दिया है। 1 मार्च से पहले यहां पुलिस और प्रशासन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव नजर आएंगे। सिंधिया अपनी प्राथमिकताओं की लिस्ट सीधे सीएम कमलनाथ और सीएस एसआर मोहंती को सौंप आए हैं।

बीते रोज ज्योतिरादित्य सिंधिया भोपाल में थे। इस बार वो पार्टी अपने कुछ काम लेकर आए थे। भाजपा के 3 दिग्गज नेताओं को कांग्रेस में शामिल करवाया। इसके बाद मंगलवार शाम करीब साढ़े सात बजे मंत्रालय पहुंचे और रात करीब सवा दस बजे वहां से रवाना हुए। उन्होंने पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ से मुलाकात की। एक घंटे से ज्यादा दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। काफी देर तक दोनों नेताओं के बीच लॉबी में भी बातचीत हुई। सिंधिया इसके बाद मुख्य सचिव एसआर मोहंती से भी मिले। इस दौरान सिंधिया ने ग्वालियर और चंबल संभाग में प्रशासनिक व पुलिस महकमे सहित अन्य फेरबदल पर चर्चा की।

बताया जा रहा है कि दोनों में एकांत चर्चा के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय में पहले से मौजूद राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव सहित ग्वालियर व चंबल क्षेत्र के विधायकों के साथ मुख्यमंत्री की मुलाकात हुई। इसमें विधायकों ने अपने क्षेत्रों से संबंधित कुछ कामों की बात रखी तो मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि सभी पर काम होगा।

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