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मंत्रोच्चार और शंख ध्वनि के साथ दिया सूर्य भगवान को अर्घ्य,रामघाट और विक्रम टेकरी पर हुआ नववर्ष प्रतिपदा का आयोजन

उज्जैन  7 अप्रैल 2019 । देशभर में आज हिन्दू नववर्ष वर्ष प्रतिपदा गुड़ी पड़वा विक्रम संवत 2074 मनाया जा रहा है लेकिन काल के अधिष्ठाता भगवान महाकाल सहित कालगणना और विक्रम संवत के प्रवर्तक सम्राट विक्रमादित्य की नगरी होने के कारण उज्जैन में इसका अलग ही महत्व है।नववर्ष प्रतिपदा के मौके पर उज्जैन में जश्न जैसा माहौल दिखा।

मान्यता है कि सम्राट विक्रमादित्य ने विक्रम संवत के नाम से मनाए जाने वाले इस नववर्ष की शुरुआत उज्जैन से ही की थी। इसलिए इसका यहाँ विशेष महत्त्व है। हिन्दू धर्म के नववर्ष की शुरुआत माँ शिप्रा के तट से मंत्रोचारण के साथ की गई। पण्डे पुजारियों सहित लोगों ने शंख ध्वनि के बीच उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर नव वर्ष का स्वागत किया। महिलाओ ने राम घाट पर शंख नाद के साथ सूर्य देव का वंदन किया

उल्लेखनीय है कि विक्रम संवत के रूप में मनाये जाने वाले हिन्दू धर्म के नववर्ष का उज्जैन में विशेष महत्त्व हैे। विक्रम संवत की शुरुआत राजा विक्रमादित्य के नाम से की गई। उज्जैन काल गणना का केंद्र होने तथा कर्क रेखा के यहाँ से गुजरने के कारण राजा विक्रमादित्य ने हिन्दू धर्म का कैलेंडर का निर्माण यहीं पर किया। उज्जैन विक्रमादित्य की नगरी होने के कारण यहाँ विक्रम संवत की शुरुआत विक्रमोत्सव के रूप में की जाती है।
इसी तरह विक्रम टेकरी पर भी नव वर्ष प्रतिपदा मनाई गई और भगवान सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया गया और सभी को नए साल की शुभकामनाएं दी गई।
नव वर्ष प्रतिपदा पर गुड़ और नीम का शर्बत पिलाने की भी परम्परा है।लिहाजा सोमवार को नए साल के मौके पर पटनी बाजार में लोगों गुड़ और नीम का शरबत वितरित किया गया है। मान्यता है कि नव वर्ष प्रतिपदा पर गुड़ और नीम का शर्बत पिलाने से बीमारियों से बचाव होता है।

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