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हिंद महासागर में भारत की ताकत से डरा पाकिस्तान

नई दिल्ली 17 फरवरी 2021 । पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने आज कहा कि दक्षिण एशिया में किसी भी तरह का सैन्य गतिरोध क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल सकता है तथा यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार प्रवाह एवं सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है.

कुरैशी ने कराची में 9वें अंतरराष्ट्रीय नौवहन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हिंद महासागर आपसी सहयोग एवं समन्वय के लिए आशाजनक संभावनाएं प्रदान करता है. उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस तथ्य का संज्ञान लेने की आवश्यकता है कि दक्षिण एशिया में किसी भी तरह का सैन्य गतिरोध क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल सकता है जो वैश्विक व्यापार प्रवाह एवं सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है.

विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि भारत ने हिंद महासागर को परमाणु हथियारों की जद में ला दिया है और वह उन्नत शस्त्र प्रणाली एवं नौसेना साजो सामान जुटाने में लगा हुआ है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हिंद महासागर सुरक्षा क्षेत्र का अहम पक्षकार है, जिसमें समुद्री डाकुओं के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ मानव तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दे शामिल हैं.

पलक झपकते ही दुश्मनों को खाक में मिलाने वाली मिसाइल अस्त्र का परीक्षण करेगा भारत

पड़ोसी मुल्‍क पाकिस्‍तान और चीन को देखते हुए भारत की तीनों सेनाएं अपने आप को मजबूत कर रही हैं.

जिससे समय आने पर दुश्‍मन को करारा जवाब दिया जा सके. इस बीच भारत एक ऐसी मिसाइल विकसित कर रहा है, जिससे भारतीय वायुसेना दुश्‍मन को हवा में 160 किलोमीटर की दूरी पर ही मार गिराएंगी और उसे संभलने का मौका भी नहीं मिलेगा.

बेयॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल अस्त्र की गति इतनी तेज है कि संभलने से पहले ही दुश्‍मन खत्‍म हो जाएगा.

भारत इस साल अस्‍त्र मार्क-2 मिसाइल का परीक्षण करेगा. हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्‍त्र की रफ्तार ध्‍वनि की गति से भी चार गुना तेज है.

इस मिसाइल की रेंज 160 किलोमीटर है. जबकि ये मिसाइल बिजिबल रेंज से बाहर भी दुश्‍मन को आसानी से निशाना बन सकती है. न्‍यूज एजेंसी एएनआई को वायुसेना के अधिकारियों ने बताया कि अस्‍त्र मिसाइल का परीक्षण इस समय के मध्‍य तक शुरू हो सकता है.

परीक्षण सफल होने के बाद यह मिसाइल पूरी तरह से वर्ष 2022 के अंत तक भारतीय वायुसेना में ऑपरेशनल हो सकती है.

सिक्किम में भी नरम पड़े चीन के तेवर, अब नाकु ला में कम की पेट्रोलिंग

पूर्वी लद्दाख में पिछले कई महीनों से चल रहा तनाव अब कम होता दिखाई दे रहा है. पैंगोंग त्‍सो पर भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच संयुक्‍त प्रयास के बाद चीन के तेवर अब नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं.

यही कारण है कि चीन ने सिक्किम के नाकु ला पर भी अपनी पेट्रोलिंग कम कर दी है. बता दें कि मई 2020 के बाद से बॉर्डर पर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है.

बता दें कि मोदी सरकार ने नाकु ला को लेकर फिलहाल किसी भी तरह की बात करने से इनकार कर दिया है. सेना के शीर्ष सैन्य कमांडरों के मुताबिक पैंगोंग त्सो में दोनों सेनाओं के बीच हुए समझौते के बाद बीजिंग की ओर से नाकु ला पर तनाव कम करने की कोशिश की जा रही है.

यही कारण है कि अब नाकु ला में पेट्रोलिंग कम कर दी गई है. बता दें कि चीन की सेना से जुड़ा हर एक फैसला लेने का अधिकार राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाले केंद्रीय सैन्य आयोग के पास है, जो कि चीन के रक्षा बलों के कमांडर-इन-चीफ भी हैं.

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