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भारत की चावल बजार में धाक, बौखलाए पाकिस्तानी व्यापारी

नई दिल्ली 26 जून 2021 ।  पाकिस्तान को चावल निर्यात के मामले में भारत से लगातार मात खानी पड़ रही है. पाकिस्तान के व्यापारी इस मसले को लेकर इमरान खान की सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि वो कुछ करे ताकि उनका कारोबार प्रभावित न हो. डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय चावल व्यापारियों के एक प्रतिनिधि ने गुरुवार को कहा कि सब्सिडी वाला भारतीय चावल पाकिस्तान के निर्यात को नुकसान पहुंचा रहा है. पाकिस्तानी व्यापारी इसे अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन बता रहे हैं. इन कारोबारियों का कहना कि पाकिस्तान की सरकार को नई दिल्ली के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के साथ इस मुद्दे को उठाना चाहिए.

जुलाई 2020 से मई 2021 के दौरान बासमती और मोटे दोनों किस्मों के पाकिस्तानी चावल का निर्यात पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14 प्रतिशत कम रहा है. पिछले साल की इसी अवधि के दौरान 3.87 मिलियन टन की तुलना में पाकिस्तान अब तक 3.3 मिलियन टन चावल का ही निर्यात कर पाया है.

पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन पाकिस्तान के अध्यक्ष अब्दुल कय्यूम पराचा ने कहा, ‘भारत अपना चावल औसतन 360 प्रति टन डॉलर की दर से बेच रहा है, जबकि हम 450 डॉलर प्रति टन की कीमत पर बिक्री कर रहे हैं. लगभग 100 डॉलर प्रति टन के इस अंतर ने हमारे चावल निर्यात को बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया है.’

अब्दुल कय्यूम पराचा ने कहा, ‘विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सब्सिडी वाले अनाज विशेष रूप से चावल बेचना एक अपराध है. कंबोडिया, म्यांमार, नेपाल, थाईलैंड, वियतनाम सभी चावल निर्यात मूल्य 420 डॉलर से 430 डॉलर प्रति टन की पेशकश कर रहे हैं, फिर भारत 360 डॉलर प्रति टन के हिसाब से चावल कैसे बेच सकता है? भारत ने रिकॉर्ड मात्रा में बासमती का निर्यात किया है. भारत अब तक 4.3 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात कर चुका है.’

अब्दुल कय्यूम पराचा ने कहा कि पाकिस्तान अकेला देश नहीं है जो भारत के सस्ते चावल निर्यात से प्रभावित हुआ है. थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, म्यांमार और नेपाल सभी इससे प्रभावित हुए हैं.

पराचा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पाकिस्तान के चावल निर्यात को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों में माल ढुलाई दरों में अत्यधिक वृद्धि और गंतव्य देशों के पास उपलब्ध पर्याप्त स्टॉक शामिल हैं. इन देशों ने कोरोना महामारी की एक बाद एक लहर के चलते घबराहट में ज्यादा चावल खरीद लिया है. लिहाजा इनके पास चावल का काफी स्टॉक हो गया है.

पाकिस्तानी व्यापारी ने कहा कि दो साल पहले वो प्रति कंटेनर भाड़ा 1,500 डॉलर का भुगतान कर रहे थे. उन्होंने इटली का उदाहरण देते हुए बताया कि अब वहां चावल भेजने का किराया बढ़कर 8,000 डॉलर प्रति कंटेनर हो गया है. यानी भाड़ा 250 डॉलर प्रति टन महंगा हो गया है.

अब्दुल कय्यूम पराचा ने मांग की कि पाकिस्तान की सरकार को सब्सिडी वाले निर्यात के साथ विदेशी बाजारों में भारत की बढ़ती धाक का मुद्दा उठाना चाहिए. पाकिस्तानी व्यापारियों ने आशंका जताई है कि भारत की इस रणनीति के चलते डब्ल्यूटीओ के अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हो रहा है, पाकिस्तान सरकार को इस मसले को उठाना चाहिए.

इससे पहले पाकिस्तान ने यूरोपीय कमीशन में बासमती चावल के टैग के लिए भारत के अप्लाई करने को लेकर नाराजगी जाहिर की थी. भारत ने यूरोपीय यूनियन में बासमती चावल के विशेष ट्रेडमार्क के लिए आवेदन दिया है. इससे भारत को बासमती चावल के टाइटल का मालिकाना हक मिल जाएगा. लेकिन पाकिस्तान ने भारत के इस कदम पर विरोध जताया था. पाकिस्तान का कहना था कि इससे उसका चावल कारोबार प्रभावित होगा.

पाकिस्तान दुनिया में चावल के शीर्ष पांच निर्यातक देशों में से एक है. पाकिस्तान सालाना लगभग 7.4 मिलियन टन चावल का उत्पादन करता है, जिसमें से लगभग 4 मिलियन टन का निर्यात किया जाता है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है और पाकिस्तान 2.2 अरब डॉलर के कारोबार के साथ चौथे स्थान पर है.

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