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पाकिस्‍तान की आर्मी है अरबपति और देश हो रहा कंगाल

नई दिल्ली 07 अक्टूबर 2019 । कहावत है, ‘जिसका काम उसी को साजे’। अगर कोई व्यक्ति या संस्था स्वभाव के प्रतिकूल काम करने लगती है तो चर्चा स्वाभाविक है। पाकिस्तान की सेना वैसे तो हर तरह के कारोबार और उत्पाद तैयार करती है, लेकिन पाकिस्तान की डांवाडोल अर्थव्यवस्था को संवारने का जिम्मा उठाने का फैसला सभी को चकित कर रहा है। देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को पार लगाने के लिए सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा बिजनेस लीडर्स के साथ मीटिंग कर रहे हैं। पाकिस्तान में तीन बार शासन करने वाली सेना का दखल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हर मामलों में रहता है। वहां की सरकार सेना की कठपुतली की तरह काम करती है।

चिंता की वजह

2019-20 के वित्त वर्ष में पाकिस्तान की जीडीपी 2.4 फीसद रहने का अनुमान है, जबकि वित्तीय घाटा जीडीपी का 7.2 फीसद हो जाएगा, जो कि पिछले 9 साल में सबसे ज्यादा है। साथ ही, रक्षा बजट की वजह से सेना को अपने सैनिकों का वेतन और रिटायर्ड सैनिकों को पेंशन देने के लिए भी पैसे की जरूरत है।

सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं है सेना

पाकिस्तानी सेना केवल सीमाओं तक ही सीमित नहीं है। यह फौजी फाउंडेशन, आर्मी वेलफेयर ट्रस्ट, शाहीन फाउंडेशन, बाहरिया फाउंडेशन और डिफेंस हाउसिंग फाउंडेशन के द्वारा 50 कंपनियां चलाती है। सेना के बड़े अधिकारी अनाज, कपड़े, सीमेंट, शुगर मिल, जूता निर्माण कार्य से लेकर एविएशन सर्विसेज, इंश्योरेंस और यहां तक की रिजॉर्ट चलाने और रियल एस्टेट का कारोबार करते हैं, जिसकी मार्केट वैल्यू 2016 में करीब 20 अरब डॉलर थी, जो कि निश्चित तौर पर अब कई गुना ज्यादा बढ़ चुकी है। अगर देश की अर्थव्यवस्था और चौपट होती है तो सेना के कारोबार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।

खनन और तेल की खोज में भी सेना

अब खनन और तेल की खोज में भी सेना ने अपने कदम बढ़ाए हैं और पाकिस्तान मेरोक फॉस्फोर जैसी कंपनियां स्थापित की हैं। अगर सिर्फ फौजी फाउंडेशन की बात करें तो पिछले 5 सालों में इसकी परिसंपत्तियां और टर्नओवर में करीब 62 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है।

कर्ज में डूबा

पाकिस्तान को पिछले तीन साल में आइएमएफ से तीन गुना ज्यादा कर्ज चीन से मिला है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले तीन सालों में पाकिस्तान को आइएमएफ को 2.8 अरब डॉलर तो चुकाना ही है। इसके साथ ही, उसी समय सीमा में उसे चीन को भी 6.7 अरब डॉलर लौटाने होंगे।

अरबपति सेना (अरब डॉलर में)

पाकिस्तान के अस्तित्व में आने से करीब आधे समय तक सेना ने ही पाक पर शासन किया है और यह पाकिस्तान का सबसे विश्वस्त संस्थान है। ऐसे में राजनीति के अलावा अर्थव्यवस्था में भी सेना का दखल हैरान करने वाला नहीं है।

इमरान के खिलाफ आजादी मार्च का ऐलान
संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे पर समर्थन जुटाने में नाकाम रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सुन्नी कट्टरपंथी दल जमियत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सरकार के खिलाफ 27 अक्टूबर से इस्लामाबाद में आजादी मार्च शुरू करने का ऐलान किया है। रहमान ने पाकिस्तान के आर्थिक संकट के लिए इमरान खान को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई सरकार को उखाड़ फेंकने तक जारी रहेगी।

रहमान ने पाक मीडिया से कहा, “मौजूदा सरकार फर्जी चुनाव का नतीजा है। सभी विपक्षी पार्टियों ने पिछले साल हुए चुनावों को नकार दिया है और नए सिरे से चुनाव की मांग की है। सरकार की नाकामी के कारण देश आर्थिक संकट में है। इसके खिलाफ हम डी-चौक पर जमा होंगे। हम आसानी से बिखरने वाले नहीं हैं। इमरान सरकार को उखाड़ फेंकने तक आंदोलन जारी रहेगा।”

पाकिस्तान में कारोबार चौपट, ऊंची टैक्स दरों से धंधे बंद

रहमान के मुताबिक, पाकिस्तान में कारोबार चौपट हो गया है। ऊंची टैक्स दरों के चलते व्यापारियों ने धंधे बंद कर दिए हैं। पाकिस्तान के धार्मिक हालात को लेकर भी मुसलमानों में गुस्सा है। जेयूआई-एफ के मार्च में विपक्षी दल पीएलएम-एन और पीपीपी भी शामिल होंगे। देशभर के नेता इस्लामाबाद के डी-चौक पर सरकार के खिलाफ जुटेंगे।

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