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संपत्ति का ब्योरा छिपाने को लेकर मोदी के खिलाफ पीआईएल

नई दिल्ली 17 अप्रैल 2019 । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चुनावी हलफनामे में संपत्ति का ब्योरा छिपाये जाने को लेकर उच्चतम न्यायालय में सोमवार को एक जनहित याचिका दायर की गयी।
एक पूर्व पत्रकार साकेत गोखले ने एक जनहित याचिका दायर की है जिसमें उन्होंने गुजरात सरकार की भूमि आवंटन नीति के तहत उठाये गये लाभ का हवाला देते हुए कहा है कि श्री मोदी ने अपने हलफनामों में उस संपत्ति का जिक्र नहीं किया है।
याचिका में कहा गया है कि मोदी ने 2002 में इस नीति से लाभ उठाया। उन्हें 25 अक्टूबर 2002 को गांधीनगर सिटी में 13 लाख रुपये की मामूली रकम पर जमीन मिली थी। बाद में उस भूमि आवंटन को लेकर विवाद हुआ था।

दूसरा चरण है बीजेपी के लिए सबसे मुश्किल, 97 में 55 सीटों पर कभी जीत नहीं मिली

18 अप्रैल को 17वीं लोकसभा चुनने के लिए दूसरे चरण में 97 सीटों पर मतदान होना है. दूसरा चरण केंद्र में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के लिए सबसे मुश्किल है, क्योंकि 97 में से 57 फीसदी यानी 55 सीट ऐसी हैं, जिन पर पार्टी कभी चुनाव नहीं जीत पाई है. बीजेपी के लिए तमिलनाडु की 39 सीटें भी इस चरण में मुसिबत का सबब हैं. तमिलनाडु की 39 में 35 सीटों पर बीजेपी कभी चुनाव नहीं जीत पाई है.

चार सीटें हैं बीजेपी का गढ़

हालांकि दूसरे चरण में कर्नाटक और छत्तीसगढ़ की चार सीटें बीजेपी का गढ़ मानी जाती हैं. कर्नाटक की दक्षिण कन्नड़ सीट पर बीजेपी की उम्मीदवार 1991 के बाद से जीत दर्ज करते रहे हैं. कर्नाटक की बैंगलोर साउथ सीट भी बीजेपी ने 1991 से बाद से कभी नहीं हारी.

1991 के बाद से बीजेपी छत्तीसगढ़ की राजनांदगांव सीट पर हमेशा चुनाव जीतती रही है. इसके अलावा राज्य की कांकेर सीट पर भी बीजेपी के उम्मीदवार को 1998 के बाद से कभी हार का साना नहीं करना पड़ा.

70 फीसदी से अधिक मतदान वाली 11 सीटें जीती

बीजेपी को 2014 में इन 97 में से 27 सीटों पर जीत मिली थी. लेकिन पार्टी के लिए परेशानी की बात है कि 27 में से 11 सीटें 70 फीसदी से अधिक मतदान वाली थीं.

पाँच साल में अमित शाह की पत्नी की संपत्ति में 16 गुना इजाफा, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर चल रहे हैं चार आपराधिक मुकदमे

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लोकसभा चुनाव 2019 में गुजरात के गांधीनगर से पार्टी के उम्मीदवार हैं। अमित शाह द्वारा इस सीट से नामांकन के समय चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार बीजेपी अध्यक्ष के पास कुल 31 करोड़ रुपये की चल-अचल सम्पत्ति है।

अमित शाह को साल 2013 में अपनी माँ कुसुम शाह से 23 करोड़ रुपये से ज्यादा की जायदाद विरासत में मिली।

शाह के हलफनामे के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 में उनकी सालाना आय 53 लाख 90 हजार 970 रुपये थी। वित्त वर्ष 2013-14 में शाह की सालाना आय 41 लाख 93 हजार 218 रुपये थी।

अमित शाह द्वारा दिए गए हलफनामे के अनुसार उनकी पत्नी सोनल शाह के पास वित्त वर्ष में 2.3 करोड़ रुपये की कुल चल-अचल संपत्ति थी।

वित्त वर्ष 2013-14 में सोनल शाह की कुल चल-अचल संपत्ति 14 लाख 55 हजार 637 रुपये थी। यानी सोनल शाह की जायदाद में पाँच साल में करीब 16 गुना इजाफा हुआ है।

सोनल शाह ने किराया, खेती और शेयर में निवेश को अपनी आय का स्रोत बताया है।

अमित शाह पर हैं चार आपराधिक मुकदमे

अमित शाह द्वारा दायर किए गए हलफनामे के अनुसार उनपर कुल चार आपराधिक मामले चल रहे हैं।

इनमें से दो मामले पश्चिम बंगाल में दर्ज हैं। पहला मामला पश्चिम बंगाल में भड़काऊ भाषण देने का है। दूसरा मामला कोलकाता में राज्य की सीएम ममता बनर्जी की मानहानि करने वाला भाषण देने के आरोप से जुड़ा है।

शाह पर तीसरा मामला जूता पहनकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने का है। चौथा मामला साल 2015 में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को ‘चारा चोर’ कहने से जुड़ा है।

आडवाणी का टिकट काटकर मिला शाह को मौका

राज्यसभा सासंद अमित शाह साल 2019 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।

अमित शाह को वरिष्ठ बीजेपी नेता और गांधीनगर के मौजूदा सांसद लालकृष्ण आडवाणी का टिकट काटकर टिकट दिया गया है।

गांधीनगर सीट से आडवाणी पाँच बार सांसद रह चुके हैं। वहीं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के संस्थापक अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी भी इस सीट से सासंद का चुनाव जीत चुके हैं।

बीजेपी ने मौजूदा आम चुनाव में 75 साल से ज्यादा उम्र वाले किसी भी नेता को टिकट नहीं दिया है। पार्टी की इस नीति की वजह से आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार, बीसी खंडूरी, बीएस कोश्यारी जैसे नेताओं को लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं मिला।

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