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पीएम मोदी ने दे दी मध्य प्रदेश के इन नेताओं को बड़ी टेंशन, अपनी नई पीढ़ी पर ‘ग्रहण’ का डर

नयी दिल्ली 21 मार्च 2022 । पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने भाजपा नेताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर किसी के बेटे के टिकट कटा है तो उसके लिए पीएम मोदी ही जिम्मेदार हैं।

पीएम मोदी ने यह बयान भले ही पांच राज्यों के चुनाव के संदर्भ में दिया हो। लेकिन उनके इस बयान का संदेश बहुत दूर तक गया है। असल में 2023 में मध्य प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने वाला है। अब अगर पीएम मोदी का परिवार के सदस्यों को टिकट न देने का फॉर्मूला यहां भी लागू होता है तो मध्य प्रदेश के कई नेताओं के सामने संकट खड़ा हो जाएगा। इनकी विरासत का सियासत का क्या होगा
मध्य प्रदेश में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में यहां के कई बड़े नेताओं के बेटे प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं। देर सबेर यह सभी अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए बड़ा सियासी ओहदा पाने की मंशा भी पाले हुए हैं। आइए एक नजर डालते हैं उन बड़े नेताओं पर जिनके लिए प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

नरोत्तम मिश्रा-सुकर्ण मिश्रा
मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा फिलहाल प्रदेश ही नहीं देशभर की राजनीति की चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। आए दिन विभिन्न मु्द्दों पर बयान देने के चलते वह सुर्खियों में बने रहते हैं। वहीं उनके बेटे सुकर्ण मिश्रा भी प्रदेश की राजनीति में पांव जमाने की कवायद में लगे हुए हैं। वह बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की सदस्यता ले चुके हैं। वहीं ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में लोगों के बीच पहुंच बना रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया-महाआर्यमान सिंधिया
कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति में आए हैं। अब उनके बेटे महाआर्यमान सिंधिया भी ऐसा ही कुछ करने की चाहत रखते हैं। फिलहाल वह विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। हालांकि भाजपा में उनके परिवारवाद की दाल गलेगी या नहीं यह देखना दिलचस्प होगा।

कैलाश विजयवर्गीय-आकाश विजयवर्गीय
आकाश विजयवर्गीय मध्य प्रदेश की राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय हैं। वह इंदौर से विधायक भी हैं। हालांकि उनके साथ एक प्लस प्वॉइंट यह है कि उनके पिता कैलाश विजयवर्गीय प्रदेश की राजनीति छोड़ संगठन के कामकाज में जुट गए हैं। ऐसे में आने वाले समय में आकाश की राह आसान हो सकती है। शिवराज सिंह चौहान-कार्तिकेय
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान भी सियासत में चमकने की मंशा पाले हुए हैं। दो बार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कैंपेनिंग की जिम्मेदारी संभाली थी। ऐसे में भाजपा में परिवार के सदस्यों को टिकट न देने का फैसला कड़ाई से लागू होता है तो फिर कार्तिकेय की राह मुश्किल हो सकती है।

नरेंद्र सिंह तोमर-देवेंद्र प्रताप सिंह
नरेंद्र सिंह तोमर लंबे समय तक मध्य प्रदेश भाजपा में सक्रिय रहने के बाद फिलहाल केंद्रीय कृषि मंत्री की भूमिका निभा रहे हैं। अब उनके बेटे प्रदेश की राजनीति में अपना मुकाम बनाने की तमन्ना भी पाले हुए हैं। बताया जाता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह टिकट की दावेदारी भी पेश कर सकते हैं।

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