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भ्रष्ट अफसरों पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पीएम मोदी ने मंत्रियों को दिया एक और कड़ा निर्देश

नई दिल्ली 27 जून 2019 । मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए अफसरों की छुट्टी करनी शुरू कर दी है। आयकर विभाग के 27 अधिकारियों को समय से पहले रिटायर्ड करने के बाद सरकार अभी और सख्ती बरतने के मूड में दिखाई दे रही है। केंद्र सरकार ने अब भ्रष्ट और लापरवाह कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए बैंकों और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के अलावा सभी विभागों से अपने कर्मियों के सर्विस रिकॉर्ड की समीक्षा करने को कहा है।

कार्मिक मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों को एक परिपत्र जारी करते हुए अधिकारियों के कामकाज की समय-समय पर समीक्षा करने को कहा है। कुछ दिनों पहले ही सरकार ने आयकर विभाग के 27 अधिकारियों को जबरन रिटायर्ड कर दिया था। ये सभी अधिकारी रिश्वत, भ्रष्टाचार और उत्पीड़न सहित कई गंभीर मामलों में आरोपी थे।

कार्मिक मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देश में कहा गया है कि सभी मंत्रालयों और विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एक सरकारी कर्मचारी को जनहित में समय से पहले सेवानिवृत्त करने जैसी निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन हो और ऐसा निर्णय मनमाना ना हो। सभी सरकारी संगठनों को प्रत्येक महीने की 15 तारीख को रिपोर्ट देने को कहा गया है। इस समीक्षा की शुरूआत 15 जुलाई 2019 से होगी।

सूत्रों के मुताबिक, मूल नियम 56 (जे), (आई) और केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1972 के नियम 48 के तहत जारी निर्देशों के मुताबिक, बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी। बता दें कि केंद्र सरकार ने हाल ही में सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद विभाग के 15 अधिकारियों को समय से पहले रिटायर्ड कर दिया था। इसी महीनें की शुरूआत में राजस्व सेवा के 12 अधिकारियों को भी समय से पहले रिटायर्ड कर दिया गया था।

19 सरकारी कंपनियों को बंद करने की मिल चुकी है मंजूरी

मोदी सरकार की ओर से एचएमटी, हिंदुस्‍तान केबल्‍स और इंडियन ड्रग्‍स जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की 15 से ज्‍यादा कंपनियों को बंद करने की मंजूरी दी जा चुकी है. ये सभी कंपनियां घाटे में चल रही हैं. सरकार की ओर से यह जानकारी कांग्रेस के लोकसभा सांसद एडवोकेट अदूर प्रकाश के सवाल के जवाब में दी गई है.

दरअसल, लोकसभा में कांग्रेस के सांसद एडवोकेट अदूर प्रकाश ने भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय से पब्‍लिक सेक्‍टर की कंपनियों का ब्‍यौरा मांगा है. इसमें उन्‍होंने कुछ सवाल पूछे. अदूर प्रकाश का पहला सवाल था कि क्‍या सरकार घाटे में चल रहे पीएसयू को बंद करने या उनके निजीकरण पर विचार कर रही है? इसके अलावा उन्‍होंने सवाल किया कि क्‍या नीति आयोग ने निजीकरण के लिए पीएसयू की एक नई सूची तैयार की है? यही नहीं, अदूर प्रकाश ने निजीकरण के लिए प्रस्‍तावित सभी पीएसयू के मुनाफा या नुकसान का भी ब्‍यौरा मांगा.

क्‍या मिला जवाब

इन सवालों का जवाब देते हुए मंत्रालय के मंत्री अरविंद गणपत सांवत ने अलग-अलग विभागों की घाटे में चल रही कंपनियों के बारे में जानकारी दी. इसके साथ ही उन्‍होंने उन 19 पीएसयू कंपनियों की सूची भी जारी की जिसे बंद करने की कवायद हो रही है. मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक भारी उद्योग विभाग-तुंगभद्रा स्‍टील प्रोडक्‍ट्स लिमिटेड, एचएमटी वॉचेज लिमिटेड, एचएमटी चिनार वॉचेज लिमिटेड, एचएमटी बियरिंग्‍स लिमिटेड, हिंदुस्‍तान केबल्‍स लिमिटेड, एचएमटी लिमिटेड की ट्रैक्‍टर यूनिट और इंस्‍ट्रूमेंटेशन लिमिटेड की कोटा यूनिट को बंद करने की मंजूरी सरकार की ओर से दे दी गई है.

इसी तरह जहाजरानी मंत्रालय के अधीन आने वाले केंद्रीय अंतर्देशीय जल परिवहन निगम लिमिटेड भी घाटे में चल रही है. जबकि फार्मास्‍युटिकल्‍स विभाग के इंडियन ड्रग्‍स और राजस्‍थान ड्रग्‍स एंड फार्मास्‍युटिकल्‍स लिमिटेड को भी सरकार द्वारा बंदी के लिए अनुमोदित की जा चुकी है. इसके अलावा जिन कंपनियों को सरकार बंद करने की मंजूरी दे चुकी है उनमें पेट्रोलियम, पर्यावरण, रेल मंत्रालय के अधीन आने वाली कंपनियां भी शामिल हैं.

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