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पीएम मोदी ने फेरा चीन के मंसूबों पर पानी

नई दिल्ली 19 अप्रैल 2020 । चालबाज चीन के खतरनाक मंसूबों पर अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार ने एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) नीति में बड़ा परिवर्तन किया है।

सरकार के विभिन्न सूत्रों से खबर मिल रही थी कि कोरोना महामारी काल में आयी मंदी का नाजायज फायदा उठाने की मंशा से चीन भारतीय कंपनियों का स्वामित्व हासिल करने की कोशिश कर रहा है। क्योंकि इस समय भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति ऐसी ही कि कोई भी कानून चीन को भारतीय कंपनियों पर कब्जा करने से रोक नहीं सकता था।

मोदी सरकार ने चालबाज चीन के नापाक मंसूबों पर पानी फेरते हुए नियम-कानूनों की ऐसी दीबार कर दी जिसे लांघना संभव नहीं है।

भारत सरकार ने तत्काल सभी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए एफडीआई नीति में परिवर्तन किया है।

नये नियमों के मुताबिक अब चीन की किसी भी कंपनी को भारत में निवेश करने से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी। कहने का अभिप्राय यह है कि अब चीन का कोई भी निवेशक भारत में सीधे अपना पैसा निवेश नहीं कर सकेगा। अब भारत में निवेश के इच्छुक चीनी निवेशकों को भारत सरकार से एनओसी लेनी होगी।

दरअसल पिछले दिनों चाइनीज सेंट्रल बैंक ने एचडीएफसी के करोड़ों शेयर खरीदे थे जिससे उसकी हिस्सेदारी कंपनी में 1 फीसदी को पार कर गई। उस समय ऐसी रिपोर्ट आई थी कि चीन पूरी दुनिया में अपना निवेश तेजी से बढ़ा रहा है। कोरोना के कारण पूरी दुनिया का शेयर मार्केट क्रैश कर गया है और शेयर के भाव में भारी गिरावट आई है। चीन इसे अपने लिए अवसर के रूप में देख रहा है और तेजी से निवेश बढ़ा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, अगर किसी देश की सीमा भारतीय सीमा से लगती है तो वहां का कोई एंटिटी चाहे वह कंपनी हो या इंडिविजुअल, केवल सरकारी रास्ते से भारत में निवेश कर सकता है। यह भी कहा गया है कि बांग्लादेशी और पाकिस्तानी नागरिक और कंपनी केवल सरकारी रास्ते से भारत में निवेश कर सकता है। इन्हें डिफेंस, स्पेस, एटॉमिक एनर्जी जैसे सेक्टर्स में निवेश की अनुमति नहीं है।

क्या होता है एफडीआई

एफडीआई का मतलब होता है फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट. अगर आसान शब्दों में कहें तो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी विदेश की कोई कंपनी भारत की किसी कंपनी में सीधे पैसा लगा दे. जैसे वॉलमार्ट ने हाल ही में फ्लिपकार्ट में पैसा लगाया है तो ये एक सीधा विदेशी निवेश है. भारत में कई ऐसे सेक्टर हैं, जिनमें विदेशी कंपनियां भारत में पैसा नहीं लगा सकती हैं.

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