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कुंभ में डुबकी के साथ करेंगी सियासी पारी का आगाज

नई दिल्ली 27 जनवरी 2019 । प्रियंका गांधी कांग्रेस महासचिव का पद संभालने से पहले कुंभ में पवित्र स्नान कर करती हैं. समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक प्रियंका गांधी कांग्रेस अध्यक्ष और अपने भाई राहुल गांधी के साथ 4 फरवरी को प्रयागराज में संगम में डुबकी लगाएंगी. इसके बाद वह अपने राजनीतिक करियर की औपचारिक शुरुआत करेंगी. चार फरवरी को कुंभ का दूसरा शाही स्नान है. इसी दिन मौनी अमावस्या भी है. रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद प्रियंका गांधी लखनऊ में राहुल के साथ एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगी.

रिपोर्ट के मुताबिक अगर किसी कारणवश राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा 4 फरवरी को संगम में स्नान नहीं कर पाते हैं तो वे 10 फरवरी को पवित्र डुबकी लगाएंगे. 10 फरवरी का मुहुर्त भी खास है. इस दिन बसंत पंचमी है और तीसरा शाही स्नान है. माना जा रहा है कि यह शायद पहली बार है जब राहुल गांधी और प्रियंका गांधी- दोनों संगम में स्नान करेंगे. बता दें कि इससे पहले साल 2001 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कुंभ मेले में पहुंची थीं और पवित्र स्नान किया था.

2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने एक बड़ी राजनीतिक चाल चलते हुए प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का महासचिव नियुक्त कर दिया है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 40 से 42 सीटें हैं. इस क्षेत्र में वाराणसी, गोरखपुर, मुगलसराय जैसे इलाके आते हैं, जहां बीजेपी की अच्छी पकड़ है. 2014 के लोकसभा चुनाव में इनमें से ज्यादातर सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी.

प्रियंका गांधी के इस कदम के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं और इसे बीजेपी के दक्षिणपंथी विचारधारा का कांग्रेस द्वारा जवाब बताया जा रहा है. बता दें कि 2017 में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान कई मंदिरों में पूजा अर्चना की थी. जानकार बताते हैं कि यह कांग्रेस की सॉफ्ट हिंदुत्व की नीति के तहत किया गया था. राहुल के इस कदम की बीजेपी ने आलोचना की थी और कहा था कि राहुल को मंदिर तभी याद आते हैं जब चुनाव आता है.

राहुल गांधी का मंदिर दौरान कर्नाटक चुनाव के अलावा हाल ही में हुए राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में भी जारी रहा था. बीच-बीच में बीजेपी की आलोचनाओं का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि वह बीजेपी के लोगों से बेहतर हिन्दू धर्म को समझते हैं. राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने खुद को जनेउधारी हिन्दू बताया था. राजस्थान के एक मंदिर में पूजा करते हुए राहुल ने अपना गोत्र दत्तात्रेय और ब्राह्मण बताया था.

प्रियंका अब मोदी को देंगी टक्कर, सपा-बसपा गठबंधन ने बदली रणनीति
चौकीदार पर सामूहिक हमला करके भाजपा का महल लूटने का विपक्षी प्लान आगामी लोकसभा चुनाव की धुरी साबित होगा। भाजपा की विशाल सीप की कीमत उसके मोती मोदी से है। इस सीप की चमक पर ग्रहण लगाने के लिए यूपी में सपा-बसपा के साथ कांग्रेस मास्टर स्ट्रोक मारकर भारतीय राजनीति में भूचाल ला सकती है।

भाजपा के जनाधार का महल तब तक सलामत है जब तक इसका रक्षक सलामत है। ये रक्षक इकलौता चौकीदार है। जो बेहद बलवान है। हजारों की फौज तब तक महफूज है जब तक इसकी लोकप्रियता की ताकत बरकरार है। जैसे किस्सों-कहानियों में राजा की जान तोते मे है वैसे भाजपा की जान लोकप्रियता के महानायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मे है। जिस दिन मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ गिरता साबित कर दिया गया उस दिन भाजपा का महल लड़खड़ा जायेगा। क्योंकि नरेंद्र मोदी भाजपा के महल की नीव हैं। एक बड़े से गुब्बारे की हवा छोटी सी नोक का छिद्र निकाल देता है। तेज दौड़ती गाड़ी के पहिये की हवा निकाल कर अदृश्य नोक गाड़ी की रफ्तार पर विराम लगा देती है।

शक्तिशाली भाजपा को शिकस्त देने के लिए समूचा विपक्ष भाजपा के सीप के मोती मोदी को परास्त करने का मास्टर प्लान तैयार कर रहा है।

आगामी लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को उनकी लोकसभा सीट से हराने के लिए विपक्षी दल आपसी कटुता और प्रतिद्वंता को भुला देने के लिए तैयार हैं। वाराणसी की लोकसभा सीट पर उन्हें कांटे की टक्कर देकर सम्पूर्ण देश में भाजपा को कमजोर साबित करने की रणनीति तैयार की गई है। यदि मोदी वाराणसी के बजाय लखनऊ से चुनाव लड़ते हैं तो प्रियंका गांधी मोदी को लखनऊ से जबरदस्त टक्कर दे सकती हैं। कांग्रेस में लोकप्रियता की क्वीन कहे जाने वाली प्रियंका को जिताने के लिए सपा-बसपा गठबंधन वाराणसी/लखनऊ लोकसभा सीट पर से अपने प्रत्याशी ना उतार कर मास्टर प्लान को अंजाम तक पंहुचायेंग। यानी नरेन्द्र मोदी को उनकी लोकसभा सीट के मुकाबले में समूचे विपक्ष की ताकत के साथ प्रियंका की लोकप्रियता सोने पे सुहागा बनेगी। इस एतिहासिक लड़ाई में सपा-बसपा और कांग्रेस की मिलीभगत प्रधानमंत्री मोदी को हराने के लिए मास्टर स्ट्रोक खेल सकती है। जिस तरह सपा-बसपा ने कांग्रेस के साथ बिना गठबंधन किये रायबरेली और अमेठी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए सीट छोड़ दी है वैसे ही वाराणसी/लखनऊ के लिए गांधी परिवार की तीसरी सदस्य प्रियंका के लिए भी सीट छोड़ दी जायेगी।

विपक्षी पार्टियों के सूत्रों के अनुसार कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन के बीच इस तरह के मास्टर प्लान की खिचड़ी खामोशी से पक रही है। सूत्रों की इस खबर और राजनीति जानकारों के अनुमानों को राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने बल दे दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रियंका गांधी को कांग्रेस में महासचिव बनाये जाने से एक दिन पहले कहा था कि हम कांग्रेस के साथ सामंजस्य बनाये हुए हैं। जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका को पार्टी का महासचिव बनाये जाने के एलान के दिन कहा कि सपा-बसपा के साथ कांग्रेस का रिश्ता टूटा नहीं है।

नवेद शिकोह

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