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राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन पूरे नाम से होता है, संक्षिप्त से नहीं- चुनाव आयोग

नई दिल्ली 14 नवम्बर 2018 । चुनाव आयोग ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि वह राजनीतिक दलों का पंजीकरण उनके संक्षिप्त नाम से नहीं, बल्कि पूरे नाम से करता है। दरअसल, ‘‘आपकी अपनी पार्टी (पीपुल्स) ’’ का एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसे चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ अरविंद केजरीवाल नीत पार्टी ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है, जिसपर आयोग ने अदालत में यह दलील दी है।

क्या कहा चुनाव आयोग ने
आम आदमी पार्टी (आप) ने इस नई पार्टी का पंजीकरण इस आधार पर खत्म करने की मांग की है कि इसका भी संक्षिप्त नाम ‘‘आप’’ होगा, जिससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति हो सकती है। चुनाव आयोग के वकील ने उच्च न्यायालय में दलील दी कि आयोग राजनीतिक दलों का पंजीकरण उनके पूरे नाम से करता है ना कि संक्षिप्त नाम से , इसलिए इससे कोई भ्रम नहीं होगा। न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए अगले साल 22 फरवरी की तारीख तय की है।

कितनी पार्टियों की सूची दी है चुनाव आयोग ने
इससे पहले, ‘‘आपकी अपनी पार्टी (पीपुल्स)’’ के वकील ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा। वहीं, आम आदमी पार्टी के वकील ने भी चुनाव आयोग के जवाब पर प्रति उत्तर दाखिल करने के लिए वक्त मांगा। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कई पार्टियों की सूची दी, जिनके संक्षिप्त नाम एक जैसे हैं। साथ ही, कहा कि जब आम आदमी पार्टी का पंजीकरण 2013 में हुआ था तब एक अन्य पार्टी उसके संक्षिप्त नाम से पहले से पंजीकृत थी।

क्या कहा गया याचिका में
यह याचिका अधिवक्ता अनुपम श्रीवास्त के मार्फत दायर की गई है। इसमें दावा किया गया हे कि नयी पार्टी का नाम मतदाताओं में भ्रम पैदा कर सकता है। आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग के 16 जुलाई के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसके जरिए आपकी अपनी पार्टी (पीपुल्स) के पंजीकरण के खिलाफ उसकी आपत्ति खारिज कर दी गई थी।

BJP से नाराज़ हैं संघ कार्यकर्ता, RSS प्रमुख को चिट्ठी लिखकर की शिकायत

आरएसएस के पूर्व प्रचारकों व पूर्णकालिक कार्यकर्ता की देहरादून में हुई एक बैठक और संघ प्रमुख को भेजे गए पत्र से उत्तराखंड की सियासत में भूकंप आ गया है. पूर्व प्रचारकों की नाराज़गी के वजह से पार्टी और संघ में हलचल मच गई है. बीजेपी के महामंत्री संगठन संजय कुमार पर यौन शोषण के आरोप के बाद आरएसएस प्रचारकों की नाराज़गी से बीजेपी की मुश्किलें खड़ी हो गई हैं.

देहरादून के एमकेपी कॉलेज में रविवार को संघ के पूर्व प्रचारकों और पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं ने एक बैठक की. इसमें देहरादून और हरिद्वार ज़िले के 40 पूर्व प्रचारक शामिल हुए. इसमें इस बात पर नाराज़गी जताई गई कि बीजेपी संगठन में आरएसएस कार्यकर्ताओं को महत्व नहीं दिया जा रहा. यह भी कहा गया कि संगठन में ऐसे लोग शामिल हो गए हैं जिनका आरएसएस या बीजेपी से कोई नाता नहीं रहा है.

बैठक के बाद संघ प्रमुख को एक पत्र लिखकर इन लोगों ने अपनी भड़ास भी निकाली. इसमें कहा गया है कि संगठन के मौजूदा दायित्वधारियों ने संघ के पूर्व प्रचारकों और पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को हाशिए पर रखा है. उन्हें न कार्यक्रमों की सूचना दे जाती है न ही संपर्क किया जाता है. पत्र में इन लोगों ने संघ प्रमुख से उनकी व्यथा सुनने की गुहार लगाते हुए कहा है कि ऐसे लोगों की वजह से ‘प्रचारक’ शब्द पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं.

एबीवीपी से जुड़े रहे उच्च शिक्षा राज्यमंत्री धन सिंह रावत का कहना है कि सरकार और संगठन अपना अलग-अलग काम करते है. हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि संघ के पूर्व कार्यकर्ताओं की अगर कोई शिकायत है तो उसे सुना जाएगा.

संघ और बीजेपी संगठन में मनमुटाव की ख़बरें तो पहले भी आती रही हैं लेकिन राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि संघ कार्यकर्ताओं की नाराज़गी इस तरह खुलकर सामने आई है. चूंकि संघ को नाराज़ करना बीजेपी के लिए संभव नहीं है इसलिए इस चिट्टी की में कही बातों की गूंज देर तक सुनाई देगी.

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