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राजस्थान में मुख्यमंत्री के सामने ही खुल गई भ्रष्टाचार की पोल

नई दिल्ली 17 नवंबर 2021 । भ्रष्टाचार की जड़े हमारे देश में मजबूत हो चुकी हैं। भले ही इसे उखाड़ फेंकने के दावे लगातार किए जाते रहे हैं लेकिन सच यही है कि भ्रष्टाचार अब भी चरम पर है। राजस्थान में कुछ इसी तरीके का आलम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने भी आ गया। दरअसल, एक सभा में आयोजित शिक्षकों के राज्य स्तरीय सम्मान समारोह के दौरान गहलोत ने शिक्षकों के तबादले में पैसों की लेनदेन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हम सुनते हैं कि तबादलों के लिए कई बार पैसे खिलाने पड़ते हैं… सही बात है या नहीं… मुझे नहीं मालूम, आप बताइए सही है? इसके जवाब में वहां मौजूद शिक्षकों ने हां कहा। जिसके बाद गहलोत ने कहा कमाल है। गहलोत ने शिक्षकों के तबादलों के लिए पैसे की बात का पता चलने पर इसे दुखदाई बताया और कहा कि तबादले की कोई नीति बन जाने पर ना तो पैसे चलेंगे और ना ही शिक्षकों को इसके लिए किसी विधायक के पास अनुशंसा हेतु जाना पड़ेगा। उसके बाद मंच पर मौजूद शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जो इशारा था कि कहीं न कहीं जेब कट जाती है उसे मेरे नेतृत्व में.. मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षकों के तबादलों की नीति लागू करके उसको बिल्कुल खत्म किया जायेगा वहीं इसको लेकर राजनीति शुरू हो गई है। भाजपा ने इस विषय को लेकर राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता राजेन्द्र राठौड़ ने ट्वीट किया कि शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा मंत्री की उपस्थिति में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तबादले के लिये पैसे देन की बात पूछी तो सभी शिक्षकों ने एक स्वर में ‘हां’ में जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि शिक्षक समाज का दर्पण होता है, जो कभी झूठ नही बोल सकता। आज शिक्षकों ने सरकार का भ्रष्ट चेहरा सभी को दिखाया है।

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