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ताइवान चुनाव में राष्ट्रपति साई इंग वेन की जीत

नई दिल्ली 12 जनवरी 2020 । ताइवान में हुए चुनाव में राष्ट्रपति साई इंग-वेन जीत गई हैं। यहां के मतदाताओं ने स्वशासित द्वीप ताइवान को अलग-थलग करने के चीन के अभियान को सिरे से नकार दिया और अपनी प्रथम महिला नेता को दूसरी बार चुनाव में विजयी बनाया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन की दूसरी बड़ी जीत पर बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि साई इंग-वेन ने इस जीत से दिखा दिया है कि ताइवान में लोकतांत्रिक जड़ें कितनी मज़बूत हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी साई को बधाई देते हुए कहा कि साई इंग-वेन ने इस जीत से यह दिखा दिया है कि लोकतंत्र से किस तरह समृद्धि और सुख शांति का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने चीन को अंगूठा दिखाते हुए एक बड़े बहुमत के साथ दूसरी बार राष्ट्रपति के पद पर निर्वाचित हो गयीं। साई ने शनिवार को घोषित चुनाव परिणामों के अनुसार 57.1 प्रतिशत मत हासिल किए। चीन समर्थित हान क्यू-यू से 38. 6% प्रतिशत मत मिले, जबकि जेम्स सांग को 4.3 % प्रतिशत मिले। साई को दूसरी पारी के लिए रिकार्ड 80 लाख मत मिले, जो चीन के लिए एक सबक़ है। चीन की शी जिनपिंग सरकार समर्थित हान क्यू-यू ने साई को जीत पर बधाई दी है और कहा है कि उन्होंने शी जिनपिंग से भी साई को जीत पर बधाई देने का अनुरोध किया है। ताइवान की कुल जनसंख्या दो करोड़ तीस लाख है। उम्मीद की जा रही है कि साई की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी देश की सांसद में भी बहुमत हासिल कर लेगी। साई ने विजयोपरांत चीन को आगाह किया कि वह ताइवान द्वीप को बल के प्रयोग से हड़पने का ख़्याल त्याग दे। उन्होंने कहा कि यह दुनिया जानती है कि ताइवान के लोगों को स्वतंत्र लोकतांत्रिक मूल्य और जीवन जीने की कला से कितना प्रेम है। चीन सन 1949 के गृह युद्ध के बाद से ताइवान पर अपना अधिकार जताता आ रहा है। साई ने आशा जताई कि बीजिंग अब यह समझ गया होगा कि प्रजातांत्रिक ताइवान को किसी डंडे के ज़ोर पर कब्जाया नहीं जा सकता है। चीन यह दावा करता आ रहा है कि वह बल प्रयोग से ताइवान को पुनर्गठित करने में सक्षम है। अब यह एक धारणा बनती जा रही है कि ताइवान और चीन को यह भूल जाना चाहिए कि दोनों देशों को पुनर्गठन सम्भव है। इस चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा था कि चीन और ताइवान पुनर्गठित कैसे हो सकते हैं। इस आशय के साथ चीन एक ग्रेटर चीन का सपना देख रहा था। व्यावहारिक रूप में ताइवान एक स्वतंत्र देश है, जहां उसकी अपनी चुनी हुई सरकार, संविधान और सेना है। इसके बाद चीन आज भी ताइवान को एक सार्वभौमिक सरकार के रूप में मान्यता देने से कतराता आया है, बल्कि ताइवान को मान्यता दिए जाने पर उस से संबंध तोड़ने की चेतावनी देता आ रहा है।

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