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मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में लग सकता है राष्ट्रपति शासन

नई दिल्ली 15 अगस्त 2018 । केंद्र की मोदी सरकार एक साथ चुनाव कराने को लेकर गंभीर नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि सरकार लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने पर आमसहमति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने पर विचार कर रही है। यह बैठक विधि आयोग द्वारा इस मामले में कानूनी ढांचे की सिफारिश के बाद आयोजित की जा सकती है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर नेताओं के बीच चर्चा का दायर बढ़ाने के लिए आगामी दिनों में सर्वदलीय बैठक बुलाई जा सकती है। लेकिन बैठक बुलाने को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

सूत्रों ने कहा कि सरकार विधि आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है जो दोनों चुनाव एक साथ कराने के लिए कानूनी ढांचा पेश करेगी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सरकार के पास आने के बाद उस पर चर्चा के विस्तृत बिन्दु होंगे। चुनाव एक साथ कराने की व्यावहारिकता की जांच कर रहे आयोग ने इससे पहले अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले राजनीतिक दलों से नजरिया पूछा था।

भाजपा ने विधि आयोग को लिख कर दिया है कि वह संसद और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जाने की पक्षधर है। पार्टी का साफ कहना है कि देश हमेशा चुनावी मोड में नहीं रह सकता इससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं।

सूत्रों के अनुसार, माना जा रहा है कि यदि सभी विधानसभाओं के चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ कराने पर सहमति नहीं भी बनती है तो कम से कम 11 राज्य विधानसभाओं के चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ कराये जा सकते हैं। दरअसल इस वर्ष दिसंबर में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम विधानसभाओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है। यदि इन चार राज्यों में विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ कराये जाने पर सहमति बनती है तो कुछ समय के लिए इन राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ेगा।

ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और सिक्किम में 2019 में लोकसभा चुनावों के साथ ही विधानसभा चुनाव होंगे इसलिए इन राज्यों के साथ कोई दिक्कत नहीं है। जिन राज्यों को छह महीने पहले चुनावों में जाना पड़ सकता है उनमें हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र शामिल हैं। इन राज्यों में विधानसभा चुनाव अक्तूबर-नवंबर 2019 में होने हैं। यदि मोदी सरकार इन राज्यों में जल्द चुनाव कराने का फैसला लेती है तो झारखंड, महाराष्ट्र और हरियाणा की सरकारें सहमत हो सकती हैं क्योंकि इन सभी राज्यों में भाजपा की ही सरकारें हैंं

इस बीच, चुनाव आयोग ने कहा है कि उसे इस बात का कोई पता नहीं है कि 11 राज्यों के चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ कराये जाने हैं या सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ कराये जाने हैं। आयोग का कहना है कि वह किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहता है और चुनावी तैयारी नियमित रूप से चलती रहती है।

प्रभात और नरेंद्र की नई जुगल बंदी

केंद्रीयमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और राज्य सभा सदस्य प्रभात झा के बीच की  दूरियां अब खत्म हो गईं हैं .दोनों में रोज खूब बातें होती हैं .यह नजदीकियां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चल रही जन आशीर्वाद यात्रा में दोनों के साथ -साथ चलने के कारण बढ़ीं हैं .सूत्र बताते हैं की श्री झा जन आशीर्वाद यात्रा के बारे में श्री तोमर को हर रोज फीडबैक देते हैं .ऐसा इसलिए भी हो रहा हे ,क्योंकि दोनों की नजर एक ही कुर्शी पर लगी है .

मध्यप्रदेश की गवर्नर आनंदीबेन पटेल को छत्तीसगढ़ का अतिरिक्त प्रभार

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बलरामजी दास टंडन (Balramji Das Tandon) के निधन के बाद मध्यप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Anandiben Patel) को छत्तीसगढ़ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा. राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल की नियुक्ति तक पटेल अतिरिक्त जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगी. भाजपा के मातृ संगठन जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक टंडन का दिल का दौरा पड़ने के कारण रायपुर के एक सरकारी अस्पताल में निधन हो गया. वह 90 वर्ष के थे. आनंदीबेन पटेल बुधवार को रायपुर राजभवन में शपथ लेंगी.

बता दें कि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजी दास टंडन को बेचैनी होने के बाद डॉ. बीआर अंबेडकर स्मारक अस्पताल ले जाया गया था. टंडन जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और जुलाई, 2014 को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बने थे. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने दोपहर 2:10 बजे राज्यपाल के निधन की पुष्टि की, और अपनी शोक संवेदना प्रकट की.

उन्होंने कहा, ‘छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजी दास टंडन ने लगभग चार वर्षों तक अपनी मूल्यवान सेवाएं दी. राज्यपाल के रूप में वह छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर काफी सजग रहते थे. विगत चार वर्षों में प्रदेश के हितों को लेकर और प्रदेशवासियों की बेहतरी से जुड़े विषयों को लेकर मुझे हमेशा उनका मार्गदर्शन मिलता रहा है. मुझे ऐसा लग रहा है कि हम सबने अपने राज्य के अभिभावक को हमेशा के लिए खो दिया है.’

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