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सेरोगेसी कानून से सेरोगेट मदर के शोषण पर लगी रोक

उज्जैन 23 दिसंबर 2018 । पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा बाजार में सेरोगेट मदर का धंधा जिस कदर फल-फूल रहा था, उसमे चुपचाप पल रहे कुछ अमानवीय पहलुओं की अनदेखी हो रही थी। अब जबकि सरकार ने सरोगेसी रेगुलेशन बिल पास कर दिया है तो सरोगेट महिलाओं के शोषण पर विराम लग जाएगा। इस कानून के तहत् कमर्शियल सेरोगेसी पर पूरी तरह बैन होगा। यानी बच्चा चाहने वाले माता-पिता,उन्हे कोख किराए पर देने वाली महिला को सिर्फ दवाइयो और अस्पताल के खर्चे के अलावा कुछ और नही दे सकते। बिल के प्रावधानों के अनुसार कोख उधार देने वाली महिला बच्चा चाहने वाले माता-पिता की करीबी रिश्तेदार ही होनी चाहिए। कानून के प्रावधानों के अनुसार कोई भी महिला अपने गैमीट (एग/अंडाणु) देकर या फिर बच्चे को अपनी कोख मे पाल कर एक बार से अधिक सरोगेसी में मदद नही कर सकती l
यह बात इंडियन सोसायटी ऑफ प्रिनेटल डाइग्नोसिस एण्ड थेरेपी के कार्यकारी सदस्य डॉ नरेश पुरोहित ने अखिल भारतीय चिकित्सा आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नागपुर के तत्वावधान मे सेरोगेसी रेगुलेशन बिल पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला मे उपस्थित चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कही।
डॉ पुरोहित ने अपने उद्‌बोधन में कहा कि भारत मे सेरोगेसी का जो ढांचा बन गया है उसमे किसी दंपति हेतु इस पद्धति से बच्चा हासिल करना इतना सरल और कम खर्च मे संभव रहा था कि इस मकसद से विदेशों से यहां आने वाले लोगो की तादाद हर वर्ष बढती जा रही थी Iकिन्तु जब सरोगेसी का नियमन नही होने की सर्वाधिक मार सेरोंगेट मदर पर पडने की बात उठाई जाती थी’ तो यह दलील देकर वह दबा दी जाती रही कि इससे गरीब महिलाओं की कुछ मदद हो जाती है। यह अपने आप में एक संवेदनहीन तर्क है कि किसी की मजबूरी एवं त्रासदी का हल कुछ रकम अदा करना भर मान लिया जाए।

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