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फीस अधिनियम के विरोध मे 5 से प्रायवेट स्कूल अनिश्चितकाल को बंद

ग्वालियर 5 सितम्बर 2018 । प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा स्कूलों के लिए बनाये गये फीस अधिनियम को वापिस नहीं लिए जाने एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद शिक्षकों से जबरन गैर शैक्षणिक कार्य कराये जाने के विरोध में आज 5 सितम्बर से प्रायवेट स्कूल अनिश्चितकाल के लिए बंद करने एवं शिक्षक दिवस नही मनाने का ऐलान किया है।
प्रायवेट स्कूल एसोसियेशन के संभागीय सचिव अनिल दीक्षित के अनुसार गत माह 19 अगस्त को ग्वालियर में एसोसियेशन की प्रदेश स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया था। जिसमें प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा फीस अधिनियम जैसे काले कानून को वापिस लेने की मांग एवं कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद प्रायवेट स्कूल षिक्षकों को स्कूल की मान्यता निरस्त करने व सरकारी स्कूल के शिक्षकों की वेतन वृ़द्ध रोके जाने का भय दिखाकर जबरिया नगर निगम से आई0डी0 बनवाने सफाई सर्वे करवाना बच्चों को दवा पिलाने स्वास्थ्य परीक्षण आधार कार्ड बनवाने छात्रो के बैंक खाते खुलवाने जैसे गैर शैक्षणिक कार्य बंद नहीं कराये गये एवं मान्यता सम्बंधी मुददों को लेकर एसोसियेषन के अध्यक्ष अजीत सिंह व शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कई दौर की बैठक बेनतीजा रही। सरकार की हठधर्मिता के कारण 5 सितम्बर से प्रदेश स्तर पर प्रायवेट स्कूल अनिश्चित काल के लिए बंद किये जा रहे है।
जिला अध्यक्ष कौशलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि वास्तव में सरकार का फीस अधिनियम लाना प्रदेश के प्रायवेट स्कूलों को बंद कराने की सोची समझी नीति है इसे हर हाल में वापिस लेना ही होगा। यदि सरकार समय रहते नहीं चेतती इसके गंभीर परिणाम आगे आने वाले चुनावों में भुगतने पड सकते है। अध्यक्ष चौहान ने स्कूल संचालको से अनुरोध किया कि वे एक बार फीस अधिनियम का अध्ययन कर स्कूल संचालन में आने वाली कठिनाईयां व नकारात्मक परिणाम को समझते हुये 5 सितम्बर से अनिश्चितकाल के लिए स्कूल बंद रखें एवं किसी भी तरह के गैर शैक्षणिक कार्य करने का बहिष्कार करें।
एसोसियेशन के के सदस्यगण केके श्रीवास्तव, गोविन्द सिंह राठौर, प्रदीप सिंह राजपूत, स्मिता दुबे, जूली अग्रवाल, सिद्धार्थ बरोही, प्रशांत सिंह भदौरिया, शिवेन्द्र सिंह यादव, केके सोनी, बृजेश चतुर्वेदी, अनूप सिंह चौहान, महेन्द्र सिंह परिहार, अजय अग्रवाल, रविकान्त दुबे, राजेश श्रीवास्तव, राजकरण सिंह भदौरिया, आरडी शर्मा आदि स्कूल संचालकों ने फीस अधिनियम जैसे काले कानून को वापिस नही लिये जाने पर 5 सितम्बर शिक्षक दिवस नही मनाने का निर्णय लिया है।

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