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अमेरिका से लौटते ही प्रियंका गांधी एक्शन मोड में, सिंधिया व बब्बर के साथ की मीटिंग

नई दिल्ली 6 फरवरी 2019 । कांग्रेस पार्टी की महासचिव व पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी अपनी विदेश यात्रा से वापस लौट आई हैं. देश पहुंचते ही प्रियंका एक्शन मोड में आ गई है. राहुल गांधी के घर 12 तुगलक लेन पर पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के साथ बैठक की. बताया जा रहा है कि इस बैठक में उत्तर प्रदेश में सियासी बिसात बचाने को लेकर ठोस रणनीति बनाई गई. दरअसल प्रियंका गांधी बेटी के इलाज के लिए अमेरिका गई थी. वह सोमवार को वापस स्वदेश लौट आई. और आते ही लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई.

वहीं राहुल गांधी ने 7 फरवरी को लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए पार्टी महासचिवों और प्रदेश प्रभारियों की बैठक बुलाई है. महासचिव बनने के बाद प्रियंका गांधी भी इस बैठक में शामिल होंगी. हालांकि प्रियंका पहले भी पार्टी की रणनीतिक बैठक में हिस्सा लेती रही हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर ये पहला मौका होगा जब वे महासचिव की हैसियत से इस बैठक में शामिल होंगी. राहुल गांधी ने महासचिवों के बाद पार्टी के सभी प्रदेश अध्यक्षों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें लोकसभा चुनाव की तैयारी और संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा किए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं.

आपको बता दें कि केंद्र की सत्ता का द्वार उत्तर प्रदेश से होकर जाती है, यहां लोकसभा की सर्वाधिक 80 सीटें है. अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनानी है तो यूपी में अच्छा प्रदर्शन करके दिखाना होगा. इन्हीं बातों के मददेनजर कांग्रेस इस बार यहां खास ध्यान दे रही है. कांग्रेस लोकसभा चुनाव के पहले मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा को महासचिव व पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया. इसके साथ ही पश्चिम यूपी की जिम्मेदारी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंपी गई. बता दें कि पूर्वी उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का क्षेत्र है तो वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी यहीं है. ऐसे में देखने वाली बात है कि दोनों कांग्रेसी नेता बीजेपी के गढ़ में कितना सेंध लगा पाती है.

जल्द होगी अखिलेश-मायावती से मुलाक़ात, जानिए अंदर की बात

लोकसभा चुनाव से पहले राजनीति में कई तरह की हलचल हो रही है. उत्तर प्रदेश से ख़बर है कि यहाँ बसपा-सपा का गठबंधन बन गया है लेकिन ये तो पुरानी ख़बर है. हमें एक नई बात पता चली है. पूर्वी उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी प्रियंका गांधी के बारे में ख़बर है कि वो जल्द ही प्रदेश के बड़े कांग्रेसी नेताओं से मिल सकती हैं. परन्तु इससे भी बड़ी ख़बर ये है कि वो जल्द ही अखिलेश यादव और मायावती से भी मुलाक़ात कर सकती हैं. ये ख़बर चौंकाने वाली ज़रूर लग सकती है लेकिन ऐसा होने जा रहा है.

कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले एक और कोशिश करने की जुगत में है. कांग्रेस चाहती है कि बसपा और सपा दोनों इस बात पर मान जाएँ और गठबंधन कर लें. हालाँकि अखिलेश यादव और मायावती किसी भी तरह से गठबंधन को तैयार नहीं लग रहे. असल में पहले कांग्रेस नेता 20 के क़रीब सीटें माँग रहे थे जिसे देने के लिए दोनों ही पार्टियाँ तैयार नहीं थीं. प्रियंका गांधी ने राज्य का विश्लेषण किया है और उनका मानना है कि अगर दोनों 10 सीटें भी देने को राज़ी हो जाएँ तो गठबंधन कर लेने में ही भलाई है.

कांग्रेस असल में इस बात को समझ चुकी है कि उसकी राज्य में बहुत सीटें नहीं आने वाली हैं ऐसे में जो सीटें जीतने वाली भी हैं कहीं वो पार्टी न हार जाए. कांग्रेस नेताओं ने अनुमान लगाया है कि उनकी पार्टी 6 से 8 सीटें जीत सकती है लेकिन सपा-बसपा अगर अलग चुनाव लड़ेंगे तो ये संख्या 4 तक भी सिमट सकती है और हो सकता है कि 2 ही सीटें आ पायें.

कांग्रेस के क्षेत्रीय नेता हालाँकि गठबंधन नहीं चाहते. उन्हें मालूम है कि गठबंधन होने की स्थिति में उनका टिकट कट सकता है और जिस सीट पर वो चुनाव में उतरने की उम्मीद कर रहे हैं उस पर सपा-बसपा का प्रत्याशी आ सकता है. कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश की सियासत अभी तक शांत नहीं हुई है. उम्मीद की जा रही है कि लोकसभा चुनाव से पहले नए समीकरण बन सकते हैं.

विदेश से वापस आईं प्रियंका गांधी, संभाली चुनावी कमान

अमेरिका से भारत लौटने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा राजनीति में सक्रिय हो गई हैं. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के बड़े नेताओं से भी मुलाकात की है. दरअसल, प्रियंका अपनी बेटी मिराया वाड्रा का इलाज कराने के लिए अमेरिका गई थीं, पहले वो 1 फरवरी को वापस लौटने वाली थीं, लेकिन इलाज में देरी होने के कारण वो 4 फरवरी को वापस आईं.

प्रियंका इस समय पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान संभाल रही हैं, उन्हें कांग्रेस महासचिव बनाया गया है. भारत लौटने के बाद प्रियंका ने तुगलक रोड स्थित राहुल गांधी के घर जाकर उनसे मुलाकात की, और उत्तर प्रदेश की रणनीति पर चर्चा भी की. प्रियंका की मुलाकात के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद थे.

बता दें कि गुरुवार को कांग्रेस के अलग-अलग राज्यों के इंचार्ज और पार्टी महासचिवों की बैठक है, जिसमें प्रियंका गांधी भी शामिल हो सकती हैं. आने वाले लोकसभा चुनाव की रणनीति को लेकर ये बैठक बुलाई गई है. इससे पहले शनिवार को भी राहुल गांधी ने विधायक दल के नेताओं और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों की बैठक बुलाई थी, जिसमें चुनवों की तैयारियों पर समीक्षा की गई थी.

कांग्रेस ने 23 जनवरी को प्रियंका गांधी को महासचिव बनाकर पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान दी थी, जिसके बाद पार्टी उत्तर प्रदेश में अच्छे परिणाम की उम्मीद कर रही है. कांग्रेस के पास वर्तमान में यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से केवल दो हैं. माना जा रहा है कि रायबरेली सीट से प्रियंका गांधी 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं. इससे पहले वो कई बार सोनिया गांधी के लिए प्रचार करने आ चुकी हैं.

UP नहीं पूरे देश में होगा प्रियंका का रोल, इंदिरा से मोदी की तुलना गलत: राहुल

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आक्रामक रूप से भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हमलावर हैं. हर गरीब को न्यूनतम आय, किसान कर्ज माफी और बहन प्रियंका गांधी वाड्रा की राजनीति में एंट्री से राहुल गांधी ने लगातार कई मास्टरस्ट्रोक चले. प्रियंका गांधी विदेश से वापस भारत लौट आई हैं, उनके रोल पर राहुल गांधी का कहना है कि प्रियंका गांधी का रोल सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे देश में होगा.

अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी के रोल के साथ-साथ अंतरिम बजट और लोकसभा चुनाव को लेकर बात की. प्रियंका गांधी वाड्रा को लेकर उन्होंने कहा, ‘महासचिव होने के नाते प्रियंका गांधी का रोल राष्ट्रीय है, मैंने अभी एक टास्क दिया है, पहला टास्क पूरा होने पर दूसरा टास्क भी दिया जाएगा.’

उन्होंने कहा कि मेरा मकसद पूर्वी हिस्से में कांग्रेस पार्टी को बढ़ाना है, जिसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और तमिलनाडु जैसे क्षेत्र है. उन्होंने कहा कि ये कोई छोटा काम नहीं है, ये एक बड़ा टास्क है. गौरतलब है कि प्रियंका गांधी के राजनीति में किरदार को लेकर राहुल गांधी का पहली बार बयान आया है, वो भी तब जब प्रियंका गांधी अपने विदेश दौरे से वापस लौटी हैं.

आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन ना होने पर कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. लोकसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी वाड्रा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को दी है.

‘यूपी में दम लगाकर लड़ेंगे’

इस इंटरव्यू में सपा-बसपा गठबंधन के बारे में उन्होंने कहा कि वह मायावती और अखिलेश यादव का सम्मान करते हैं, लेकिन हम अपनी विचारधारा पर चुनाव लड़ेंगे. विचारधारा के तौर पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में कुछ समानताएं हैं, लेकिन गठबंधन ना होने का फायदा हम कांग्रेस पार्टी का दम दिखाकर उठा सकते हैं.

‘राम मंदिर का मामला अभी कोर्ट में’

राम मंदिर के मसले पर भी राहुल गांधी ने बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि ये मामला अभी कोर्ट में है, हम भारत की संवैधानिक संस्थान का सम्मान करते हैं. मेरे लिए अभी इस समय उस पर कोई विचार देना सही नहीं होगा.

‘मोदी के वर्क कल्चर से हर कोई खफा’

इस इंटरव्यू में भी राहुल गांधी के निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रहे, उन्होंने कहा कि अपने 15 साल के राजनीतिक करियर में उन्होंने किसी नेता के खिलाफ विपक्ष की ऐसी एकजुटता नहीं देखी है. उन्होंने कहा कि अगर वह आज राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज या अन्य बीजेपी नेताओं से बात करूंगा, तो वह नरेंद्र मोदी के काम करने के तरीके से खफा ही होंगे.

अंतरिम बजट में केंद्र सरकार द्वारा किसानों को सालाना 6000 रुपये की मदद देने पर राहुल गांधी ने कहा कि ये एक मजाक की तरह है. किसान को सिर्फ 17 रुपये प्रति दिन की मदद देना नाकाफी है. उन्होंने कहा कि किसानों की कर्जमाफी कर कांग्रेसशासित राज्यों ने जो उनकी मदद की है, उस हिसाब से केंद्र सरकार का बजट कुछ भी नहीं है.

‘इंदिरा गांधी से मोदी की तुलना बेमानी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की दादी इंदिरा गांधी की तुलना को कांग्रेस अध्यक्ष ने बेमानी बताया. राहुल ने कहा कि ऐसा करना इंदिरा जी का अपमान होगा. उन्होंने कहा कि मेरी दादी के हर फैसले प्यार से भरे हुए होते थे, उन्होंने देश के गरीबों के लिए काम किया है. लेकिन उससे उलट नरेंद्र मोदी का हर फैसला नफरत से भरा हुआ होता है. इसके अलावा नरेंद्र के दिल में गरीबों के लिए जगह नहीं है.

राहुुल गांधी को मिला ‘भाभी जी’ का साथ, श‍िल्‍पा श‍िंदे ने थामा कांग्रेस का हाथ

बिग बॉस सीज़न 11 विनर और ‘भाभी जी घर पर हैं’ सीर‍ियल से देशभर की चहेती बनींं शिल्पा शिंदे ने औपचारिक तौर पर अब कांग्रेस का हाथ थाम लिया है, विश्वस्त सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक शिल्पा शिंदे को मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने पार्टी की सदस्य्ता दिलाई है और जल्द ही मुंबई से उनके चुनाव लड़ने का भी ऐलान किया जा सकता है.

आपको बता दें कि राजनीतिक पार्टियों में टीवी कलाकार और सीने जगत से जुड़े कलाकारों को ना सिर्फ चुनावी प्रचार में मतदाताओं का मन जीतने के लिए जोड़ा जाता है बल्कि वक्त वक्त पर इन कलाकारों को राजनीतिक एंट्री भी मिलती रही है केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी इसका सबसे बड़ा उदहारण बनी हुई है.

वैसे बात अगर शिल्पा शिंदे की जाए तो मुंबई सहित देशभर में शिल्पा शिंदे की बड़ी फैन फॉलोविंग है और यकीनन कांग्रेस ने इसी फैन फॉलोविंग को ध्यान में रखकर शिल्पा शिंदे को अपनी पार्टी में जगह दी है और आने वाले दिनों में शिल्पा शिंदे को मुंबई या फिर महाराष्ट्र की किसी अन्य सीट से लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी का उम्मीदवार भी घोषित किया जा सकता है.

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