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प्रियंका गांधी की बड़ी भविष्यवाणी, बोलीं- 23 मई को ‘ये’ ही होगा..

नई दिल्ली 19 मई 2019 । लोकसभा चुनाव के 7वें यानी आखिरी चरण के लिए प्रचार थमने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बड़ा दावा किया है. प्रियंका गांधी इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही हैं. प्रियंका का कहना है कि, 23 मई को न्याय और जनता की आवाज की जीत होगी. इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि, बीजेपी ने चुनाव में असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की लेकिन हमने उनके इस प्रयास को असफल कर दिया.

लोकसभा चुनाव के आखिरी दौर का चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा, प्यारे दोस्तों, 60 दिनों से ‘एक व्यक्ति-एक वोट’ यानी सबकी राजनीतिक बराबरी का जोशीला चुनाव प्रचार अभियान आपके प्यार से सम्भव हुआ.

प्रियंका ने दावा करते हुए कहा, BJP की तमाम कोशिशों के बावजूद हमने चुनाव को रोजगार, खेती और कमाई के मुद्दों से भटकने नहीं दिया. 23 तारीख को न्याय और जनता की आवाज़ की जीत निश्चित है.

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 के अंतिम चरण का चुनाव प्रचार शुक्रवार शाम 5 बजे थम गया. चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद बीजेपी ने दावा किया है कि उसे 300 से अधिक सीटें मिलेंगी और प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की वापसी सुनिश्चित होगी. जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीटों का अनुमान लगाने से इनकार कर दिया. उन्होंने चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री का पद किसे मिलेगा इस पर भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

सोनिया गाँधी ने खेला तगड़ा दांव ;नरेंद्र मोदी के पीएम बनने में लग सकता है रोड़ा

नरेंद्र मोदी दोबारा पीएम न बन अपाये इसके लिए सोनिया गाँधी ने मतदान खतम होने के पहले ही दांव चलना शुरू कर दिया है दरअसल सोनिया गाँधी ने चुनाव के रिजल्ट से पहले ही सारी विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने की कवायद शुरू कर दी थी।

यूपीए चेयरपर्सन ने विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं को फोन करके कहा कि 22, 23 और 24 मई को दिल्ली में रहिए मतलब साफ़ है की नतीजों से पहले सोनिया गाँधी विपक्ष के नेताओ की बैठक के लिए खुद अपने कंधो पर जिम्मेदारी ली है।

साल 2004 में भी सोनिया गाँधी बे इसी तरह की कवायद के यूपीए -1 बनवायी थी इस बैठक के माध्यम से कांग्रेस और सैन्य गाँधी ने साफ़ संदेश देने की कोशिश की है भले ही यूपीए की पार्टियों का प्री-पोल गठजोड़ न हो पाया हो लेकिन मोदी के खिलाफ सब साथ खड़े हैं और एकजुट हैं।  सोनिया गाँधी क्षेत्रीय पार्टियों को संदेश देना चाहती है की किसी किसी एक दल के बजाय गठबंधन की सरकार बनाने का न्योता मिलना चाहिए।

TMC में राहुल को PM बनाने को लेकर सुगबुगाहट शुरू.मोदी को हटाने के लिए ममता कुछ भी करने को तैयार

चुनावों के अंतिम चरण के लिए 19 मई को मतदान होना है लेकिन 23 मई को आने वाले चुनाव नतीजों से पहले ही सियासी गलियारों में उथल पुथल मच गई है। पीएम पद के लिए बीजेपी की तरफ से पीएम मोदी चेहरा हैं लेकिन विपक्ष की तरफ से पीएम पद के लिए अभी तक किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई है। हालांकि कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी के नाम पर चर्चा है जोकि अभी आधिकारिक नहीं है।

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक राहुल को पीएम पद के लिए प्रोजेक्ट किए जाने को लेकर तृणमूल कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी को केंद्र से बाहर करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। टीएमसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी अगले पीएम के लिए राहुल गांधी के नाम पर तैयार हैं लेकिन नरेंद्र मोदी किसी भी कीमत पर वापस नहीं आना चाहिए। वहीं डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने मंगलवार को एक बार फिर राहुल गांधी को पीएम बनाने की बात कही। एक सूत्र ने कहा, ‘अगर स्टालिन राहुल को पीएम बनाने के लिए कहते हैं तो यह मसला नहीं है क्योंकि सभी मोदी को बाहर करना चाहते हैं।’

हालांकि राहुल और ममता बनर्जी के संबंध बहुत मधुर नहीं रहे हैं। कैंपेन के दौरान दोनों नेता एक दूसरे पर लगातार हमला करते रहे हैं। वहीं तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव की मीटिंग का हवाला देते हुए तृणमूल के सूत्र ने कहा, ‘राज्यों की पार्टियां मोदी को बाहर करने की कोशिश कर रही हैं जिसमें ममता बनर्जी एक महत्वपूर्ण रोल अदा कर रही हैं।’ राव ने ममता बनर्जी से बीते साल मुलाकात की थी और ममता बनर्जी ने कहा था कि राव आगे की बात के लिए दोबारा आएंगे।

वर्तमान में राव ने केरल के सीएम पिनराई विजयन, एमके स्टालिन और जगनमोहन रेड्डी और एचडी कुमारस्वामी से मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस की तुलना में बीजेपी से राव को ज्यादा कठिनाई है क्योंकि बीजेपी के साथ गठबंधन उनको कई दक्षिणी राज्यों में नुकसान पहुंचा सकता है क्योंकि यहां लोग बीजेपी के लिए इच्छुक नहीं हैं। यही बात जगनमोहन रेड्डी पर लागू होती है जो आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के हाथ से सत्ता लेना चाहते हैं। विपक्ष के नेताओं में केवल ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ही कांग्रेस और बीजेपी से उचित दूरी बनाए हुए हैं। सूत्रों का कहना है, ‘नवीन के पास 5 साल हैं इसलिए उन्हें दिल्ली जाने की कोई हड़बड़ी नहीं है।’

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