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पंजाबः किसान मोर्चा और डेरा सच्चा सौदा से चिंता में डूबे बड़े दल

नयी दिल्ली 18 फरवरी 2022 । पंजाब विधानसभा चुनाव में इस बार हर सीट पर मुकाबला तिकोना या चतुष्कोणीय होने के कारण सभी दलों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। राज्य विधानसभा की कुल 117 सीटें हैं, जिन पर मतदान 20 फरवरी को होना है और 10 मार्च को मतगणना होगी। खासकर डेरा सच्चा सौदा और संयुक्त किसान मोर्चा इस बार बड़े दलों की चिंता का कारण हैं। जानिए कैसे… पंजाब में लगभग अधिकांश सीटों पर इस बार मुकाबला कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल के बीच है तथा भारतीय जनता पार्टी तथा उसकी सहयोगी दल भी या तो कुछ सीटों पर टक्कर देने की स्थिति में है या वोट काटने की लेकिन मुख्य टक्कर आप पार्टी तथा कांग्रेस के बीच दिखाई देती है। इस बार चुनावी परिदृश्य बिलकुल बदला हुआ है। कहीं अकाली दल कांग्रेस से सीधे टक्कर में है या आप और कांग्रेस और कहीं भाजपा गठबंधन और कांग्रेस। इस बार किसानों के संयुक्त किसान मोर्चा ने भी चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज की है। ऐसे हालात में सभी मुख्य दलों को वोट कटने की चिंता सता रही है।

मजीठिया ने सिद्धू की घेराबंदी की!
इस बार कांग्रेस मुख्य उम्मीदवारों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार चरनजीत चन्नी दो सीटों भदौर तथा चमकौर साहिब से चुनाव मैदान में हैं। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर (पूर्व) सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। इस सीट पर पहले पांच साल उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू और पिछले पांच साल नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रतिनिधत्वि किया, लेकिन उनकी जीत को खतरे में डालने की हुंकार भरते हुए अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया अपनी सीट मजीठा अपनी पत्नी को सिद्धू के खिलाफ मुकाबले आ डटे हैं और धुआंधार प्रचार में जुटे हैं। सिद्धू की उन्होंने ऐसी घेराबंदी की है जो वो सीट तक सीमित रह गए हैं। वहीं, उप-मुख्यमंत्री ओपी सोनी अमृतसर सेंट्रल, उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा डेरा बाबा नानक सीट से चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस में अंतर्कलह सबसे बड़ा रोड़ा
इस बार जो बात कांग्रेस के खिलाफ जा रही है, वह पार्टी की अंतर्कलह है जो अब तक धधक रही है। नवजोत सिंह सिद्धू ने चन्नी, रंधावा, तृप्त राजिंदर बाजवा सहित कुछ मंत्रियों और विधायकों के साथ मिलकर आलाकमान से कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटवाया और उसके बाद मुख्यमंत्री बनने की मुहिम में पिछड़ गए। चन्नी को कमान मिलने से आपसी कलह तेज हो गई है और मतभेद सतह पर आ गये हैं। अब तक सिद्धू के अपनी सरकार को निशाने पर रखने के कारण पार्टी की छवि तो धूमिल हुई हो या नहीं लेकिन लोग उन्हें अच्छी तरह पहचान गए। यह तो 10 मार्च को मतगणना से पता चलेगा किसको कितना नुकसान या फायदा हुआ।

कैप्टन बढ़ाएंगे कांग्रेस की मुश्किल?
कैप्टन अमरिंदर सिंह साफ कह चुके हैं कि सिद्धू और चन्नी दोनों मुख्यमंत्री बनने लायक नहीं हैं। पंजाब को काबिल आदमी ही चला सकता है। सीमावर्ती राज्य होने के कारण इसकी सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, मैंने सोनिया गांधी को रेत माफिया के बारे में बताया तो इसमें मंत्रियों से लेकर विधायकों के शामिल होने की बात कही लेकिन आलाकमान ने मुझे कोई कार्रवाई न करने को कहा क्योंकि कार्रवाई करने से पूरी कांग्रेस टूट जाती।

बसपा के साथ अकाली भेद पाएगी किला?
अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल जलालाबाद सीट से, मजीठिया अमृतसर (पूर्व), उम्रदराज नेता एवं देश के दिग्गज और पंजाब के पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल लंबी सीट से चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा पार्टी ने अपने पुराने चेहरों पर भरोसा जताया है। पार्टी के स्टार प्रचारक सुखबीर सिंह बादल और उनकी पत्नी हरसिमरत कौर बादल अपनी पार्टी के लिये चुनाव प्रचार कर रहे हैं। बड़े बादल लंबी में अपने लिये खुद प्रचार में जुटे हैं तथा लोगों से अपने पिछले कामों के नाम पर वोट मांग रहे हैं। अकाली दल का इस बार बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन है। मालवा में किसान मोर्चा बढ़ाएगा मुश्किल
पंजाब के मालवा क्षेत्र में 69 सीट, माझा 25 और दोआबा क्षेत्र 23 सीटें हैं। पिछली बार मालवा में कांग्रेस को 40,आप पार्टी को 18 सीटें मिली थीं और इस बार भी किसान बहुल मालवा बदलाव के पक्ष में है तथा कपास क्षेत्र कहे जाने वाले इस क्षेत्र में लोग बदलाव का मन बना चुके हैं, अब देखने वाली बात यह है कि मालवा किसकी नैया पार लगायेगा?

डेरा सच्चा सौदा का 43 सीट पर प्रभाव
इस क्षेत्र में 13 जिले पड़ते हैं तथा कम से कम 43 सीटों पर डेरा सच्चा सौदा का खासा असर है। अब देखने वाली बात यह है कि डेरा मुखी इन दिनों फरलो पर जेल से बाहर हैं। जिस पार्टी की ओर डेरा का झुकाव होगा वही दल अच्छी स्थिति में होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह डेरा ब्यास से मिल चुके हैं तथा भाजपा के कई नेता डेरा सच्चा सौदा के अपने को अनुयायी कहते हैं तथा सभी दलों के उम्मीदवार इन डेरों में जाकर हाजिरी दे चुके हैं। चन्नी भी जालंधर के बल्लां वाले डेरा के अनुयायी हैं। इस बार माझा में भी ज्यादातर सीटों पर आप तथा कांग्रेस और अकाली दल के बीच सीधी टक्कर है। अन्य दल भी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। पंजाब में बदलाव की लहर की बात जोरों पर हैं। लोगों का कहना है कि अब तक कांग्रेस तथा अकाली दल-भाजपा को देख लिया लेकिन न तो विकास हुआ न रोजगार। अब किसी अन्य को देखना चाहते हैं। दलित बहुल दोआबा क्षेत्र में कांग्रेस, अकाली दल, आप और भाजपा की टक्कर है। दलित समाज को लुभाने के लिये कांग्रेस ने तो अपना उम्मीदवार ही सीएम चन्नी को घोषित कर दिया। अकाली दल सरकार बनने पर उप मुख्यमंत्री पद किसी दलित को देने की बात करता है।

आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा भगवंत मान राज्य में अपने प्रत्याशियों के लिये धुंआधार प्रचार कर रहे हैं। उनका साथ पार्टी सुप्रीमो एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दे रहे हैं। मान धूरी क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं। वह संगरूर संसदीय सीट से दूसरी बार सांसद भी रहे हैं। उधर, भाजपा नीत गठबंधन में पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह तथा अकाली दल (ढींडसा) शामिल हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह पटियाला सीट, भाजपा प्रधान अश्विनी शर्मा पठानकोट सीट से चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा भाजपा ने कांग्रेस के बागियों को भी टिकट दिया है।

नये समीकरणों के उभरने के बाद अब बड़े दलों को इस बात की चिंता सता रही है कि किसान संगठनों के संयुक्त समाज मोर्चा के उम्मीदवार उनके वोट जरूर काटेंगे जिसका असर कांग्रेस, शिअद, आप और भाजपा गठबंधन पर पड़ेगा। सभी दल हालांकि अपने परंपरागत वोटों के सहारे चल रही हैं लेकिन यह तो 20 फरवरी को पता चलेगा कि उनका वोट कटा या बंटा।

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