मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> पीएम केयर्स फण्ड पर उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

पीएम केयर्स फण्ड पर उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

नई दिल्ली 14 अप्रैल 2020 । कोरोना के महासंकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने प्राइम मिनिस्टर सिटिजन असिस्टैंस ऐंड रिलीफ इन इमर्जेंसी सिचुएशन (पीएम केयर्स) फंड का गठन किया है। केंद्र के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी गई है जिस पर सोमवार को सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ता समेत पीएम केयर्स के अन्य आलोचकों की एक दलील यह है कि जब आपदा से निपटने के मकसद से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष पहले से है ही तो नया पीएम केयर्स फंड बनाने की जरूरत क्यों हुई?

पीएम केयर्स का गठन 2020 में तब किया गया जब देश कोरोना महासंकट से जूझ रहा है।
इसका गठन चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में किया गया है। प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष हैं।
रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री ट्रस्ट के सदस्य। विज्ञान, स्वास्थ्य, कानून, सार्वजनिक कार्य जैसे क्षेत्रों की प्रसिद्ध हस्तियों को ट्रस्ट के सदस्य के रूप में नामित किया जा सकता है।
पीएम केयर्स ट्रस्ट में जमा पैसा किस आपदा में कितना खर्च किया जाए, इसका फैसला मंत्रियों एवं नामित सदस्यों को सामूहिक तौर पर लेना होगा।
पीएम केयर्स में जो कोई भी जितना भी धन दान करेगा, वह पूरी की पूरी रकम टैक्स छूट के दायरे में आएगी। टैक्स छूट का यह नियम व्यक्ति, संस्था या कंपनी सब पर लागू होगा।
कंपनियों के लिए एक और अच्छी बात यह है कि वो पीएम केयर्स फंड में दान की गई रकम को कंपनीज ऐक्ट 2013 के तहत सीएसआर यानी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी मद में हुआ खर्च बता सकती हैं।
पीएम केयर्स के खातों की ऑडिटिंग कौन करेगा, यह अब तक स्पष्ट नहीं है।
प्रधानमंत्री राहत कोष –

तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने जनवरी 1948 में संविधान लागू होने से पहले प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष का गठन किया था। तब जरूरत पाकिस्तान से विस्थापित लोगों की मदद करने की थी।
तब इसकी संचालन समिति के सदस्यों में एक कांग्रेस अध्यक्ष भी शामिल होते थे।
1985 में राजीव गांधी की सरकार ने इस फंड का पूर्ण नियंत्रण प्रधानमंत्री कार्यालय के हाथ में दे दिया।
1985 से इस कोष का कितना पैसा, किस आपदा पर खर्च होगा, यह सिर्फ प्रधानमंत्री की सिफारिश पर तय होने लगा।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में दान की गई पूरी रकम टैक्स छूट के दायरे में आती है।
कंपनियां इस फंड में भी दान देकर रकम को सीएसआर खर्च के तौर पर दिखा सकती है।
इस फंड के खातों की ऑडिटिंग भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ओर से नहीं होती है, कोई थर्ड पार्टी ही ऑडिट करती रही है।
प्रधानमंत्री राहत कोष में पड़े हैं 38 अरब रुपए
दरअसल, पीएम केयर्स के आलोचकों का कहना है कि अभी पीएम राष्ट्रीय राहत कोष में 3,800.44 करोड़ रुपये पड़े हैं तो कोरोना संकट में इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हालांकि, खबर यह भी है कि इस फंड की सिर्फ 15′ रकम ही नकदी के रूप में है, शेष धन एफडी के रूप में जमा है या फिर राज्य सरकारों को लोन के रूप में दिया गया है।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

Ram Mandir निर्माण के लिए Rajasthan के लोगों ने दिया सबसे ज्यादा चंदा

जयपुर: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के केंद्रीय उपाध्यक्ष और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के …