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दिल्ली में राहुल गांधी ने लगाई कमलनाथ के मंत्रिमंडल पर मोहर

नई दिल्ली 25 दिसंबर 2018 । कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के मंत्रीमंडिल पर मोहर लगा दी है। इधर, भोपाल में मंगलवार को होने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ के मंत्रिमंडल के शपथग्रहण समारोह की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। चार दिन से दिल्ली गए कमलनाथ आज रात भोपाल वापस आ जाएंगे। इसके बाद ही मंत्रिमंडल के नामों का खुलासा होने की उम्मीद जताई जा रही है। मंत्रिमंडल गठन को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ 4 दिन से दिल्ली में हैं। वे गुरुवार को दिल्ली पहुंच गए थे। उन्होंने राहुल गांधी के अलावा प्रदेश के दिग्गज नेताओं दिग्विजय सिंह, अरुण यादव और ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी चर्चा की। इन चार दिनों में कमलनाथ चार बार राहुल गांधी और तीन बार ज्योतिरादित्य सिंधिया से मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि इन मुलाकातों के बीच एक बार राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी लगभग एक घंटे चर्चा हुई है। विधानसभा अध्यक्ष का नाम आज तय होने की संभावना है।क्रिसमस के दिन शपथ ले रही कमलनाथ कैबिनेट के नाम तय हो गए हैं. करीब 22 मंत्रियों का मंत्रिमंडल पहले दौर में बनेगा. उसमें जहां कुछ पूर्व मंत्रियों को जगह दी जा रही है वहीं दो बार के विधायक भी मंत्री बनाए जा रहे हैं. पार्टी हाईकमान के साथ हुई चर्चा के बाद ये तय हो गया है कि 2019 के चुनाव को देखते हुए सारे समीकरण बैठाए जा रहे हैं. जातिगत आधार के साथ ही क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखा जा रहा है. मुख्यमंत्री कमलनाथ, स्टार कैंपेनर ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह समर्थकों को पूरे संतुलन के साथ जगह दी जा रही है.

डा. साधौ स्पीकर
मालवा- निमाड, ग्वालियर चंबल, महाकौशल, विंध्य के क्षेत्रीय गणित को देखते हुए मंत्रियों के नाम तय हो गए हैं. कांग्रेस सूत्रों से जो खबरें आ रही हैं उसके मुताबिक महेश्वर से विधायक डा. विजयलक्ष्मी साधौ को स्पीकर बनाया जा सकता है. साधौ एससी वर्ग से है वहीं दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में दो बार मंत्री रही हैं. महिला कोटे के तहत भी डा. साधौ की दावेदारी को पुख्ता माना जा रहा है. वो दिग्विज सिंह समर्थक हैं.सिंह के कोटे से ही भोपाल से पी सी शर्मा, आरिफ अकील, इंदौर से जीतू पटवारी मंत्री बनने की लिस्ट में बताए जा रहे हैं. इंदौर से सिंधिया गुट से तुलसी सिलावट का नाम मंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे है. एससी कोटे से सिलावट पहले भी संसदीय सचिव रह चुके हैं.

ग्वालियर चंबल से
वरिष्ठ नेताओं में चंबल रीजन से डा. गोविंद सिंह, पिछोर से के पी सिंह के नाम मंत्री पद के लिए है. सिंह समर्थक ये दोनों नेता पूर्व में भी कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. राघौगढ़ से दो बार के विधायक दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धनसिंह का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है.मालवा- निमाड़ से
कमलनाथ समर्थक एवं पूर्व में दिग्विजय सिंह कार्यकाल में भी मंत्री रहे सज्जन वर्मा, बाला बच्चन, नर्मदा प्रजापति, के मंत्री बनने की चर्चा है. मालवा- निमाड़ और महाकौशल का क्षेत्रीय संतुलन इससे साधने की कोशिश है.

जातिगत समीकरण
सिंधिया खेमे से प्रद्युमनसिंह ग्वालियर से, डबरा से इमरती देवी , लाखन सिंह को मंत्री बनाने की चर्चा है.

महाकौशल -विंध्य से
महाकौशल और विंध्य से बिसाहुलाल सिंह अनूपपुर से, विक्रमसिंह नाती राजा राजनगर से, लखन घनघोरिया और तरुन भानोट जबलपुर से,प्रदीप जायसवाल वारासिवनी से निर्दलीय जो पूर्व कांग्रेसी है उन्हें भी मंत्री बनाने की तैयारी है. सीनियरिटी क्षेत्रीय संतुलन को देखते हुए इनके नाम आगे बताए जा रहे हैं.

दो बार के विधायकों का फॉर्मूला
मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों का कहना है मंत्रियो के नामों को लेकर कोई पेंच नहीं फंसा है. इसकी वजह ये है कि पहली बार के विधायकों को मंत्री नहीं बनाने का फैसला अहम रहा. इसके बा़द सीनियर विधायकों पर सहमति बनी. 2019 के चुनाव को देखते हुए सिर्फ 20 से 25 सदस्यों का मंत्रिमंडल रखा जाएगा.

इसके साथ ही कमलनाथ, सिंधिया, दिग्विजय सिंह समर्थकों के नाम तय हो गए हैं. चर्चा है कि सिंह बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों को उचित प्रतिनिधित्व देने की बात हाईकमान के सामने रख चुके थे. बहुमत से दो सीट दूर कांग्रेस ने इसमें उस संतुलन को साध लिया है. खास बात ये है कि मंत्रिमंडल शपथ लेगा, लेकिन कमलनाथ अभी स्वयं अभी विधायक नहीं हैं.

हर मंत्री अलग लेगा शपथ, इतने मंत्रियों के लिए गाड़ि‍यों का इंतजाम

प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ की टीम का मंगलवार को गठन होगा। राजभवन में मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह तीन बजे से होगा। इसमें शपथ सामूहिक नहीं, बल्कि हर मंत्री अलग-अलग लेगा। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए मंत्री बनने वाले विधायकों के समर्थक बड़ी संख्या में भोपाल आ रहे हैं।

इसे देखते हुए मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय (एमवीएम) के खेल मैदान में बैठक व्यवस्था बनाई जा रही है। यहां एलईडी स्क्रीन लगाई जाएंगी, ताकि दूरदराज से आने वाले समर्थक कार्यक्रम देख सकें। वहीं, राजभवन में जगह की कमी को देखते हुए सिर्फ चुनिंदा वाहनों की पार्किंग ही होगी। मिंटो हॉल परिसर में अस्थायी पार्किंग व्यवस्था बनाई गई है।

मंत्रियों की शपथ को लेकर राजभवन में सोमवार को सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रभांशु कमल ने बैठक की। इसमें सभी तैयारियों को पुख्ता रखने के निर्देश दिए तो यह भी बताया गया कि राजभवन में पार्किंग नहीं होगी। सिर्फ चुनिंदा वाहन ही राजभवन परिसर में खड़े होंगे। बाकी वाहन आमंत्रितों को लेकर आएंगे और छोड़कर चले जाएंगे।

मिंटो हॉल परिसर में वाहन खड़े करने की जगह बनाई गई है। इस बार मंत्रियों की सामूहिक शपथ नहीं होगी। एक-एक मंत्री मंच पर आएगा और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल उन्हें संविधान, पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी।अभी तक एक साथ सात-आठ मंत्रियों को शपथ दिलाई जाती रही है। उधर, गृह विभाग ने नए मंत्रियों के लिए 30 वाहनों का इंतजाम कर लिया है। शपथ ग्रहण समारोह शुरू होने से पहले वाहन राजभवन पहुंच जाएंगे। मंत्रियों को वाहन का आवंटन मौके पर ही किया जाएगा।

MP में सिर्फ कांग्रेस ही नहीं दिग्गी राजा ने भी की है धमाकेदार वापसी

मध्य प्रदेश में 2018 में केवल कांग्रेस की सत्ता में वापसी नहीं हुई है, बल्कि दिग्विजय सिंह की भी धमाकेदार वापसी हुई है, जिन्हें एक समय पर एमपी कांग्रेस के पर्याय या फिर एक बड़े नाम के रूप देखा जाता था.

एमपी इकाई में कई बार गुटबाजी का आरोप भी दिग्विजय पर लगा. लेकिन दो बार सीएम रहे दिग्विजय ने इसे पूरी तरह से बदलते हुए सभी गुटों को एकसाथ लाकर कमलनाथ के पीछे मजबूती से खड़ा कर दिया. उनकी ‘नर्मदा परिक्रमा’ ने भी कांग्रेस को जनता से जोड़ने में मदद की, जो कि पिछले दस सालों में नही हुआ था. एक पुरानी कहावत यहां साबित होती है कि- आप उसे प्यार करें या नफरत लेकिन नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं.

टिकट बंटवारे के बाद फैले असंतोष से लेकर पार्टी के बागियों को वापस लाने तक दिग्विजय की मध्‍य प्रदेश के चुनावी संग्राम में भूमिका महत्वपूर्ण रही. सरकार के गठन के बाद ‘दिग्गी राजा’ वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति में सक्रिय हैं और अब ऐसी अनुमान है कि कैबिनेट गठन में भी उनकी बात मानी जाएगी.

2003 में उमा भारती की अगुवाई वाली बीजेपी से मिली करारी हार के बाद दिग्विजय एमपी की राजनीति से अज्ञातवास में चले गए थे. चुनावों से ठीक पहले उन्होंने संकल्प लिया था कि अगर 2003 का चुनाव कांग्रेस हार गई तो वह दस साल तक राज्‍य में कोई पद नहीं लेंगे.

इसके बाद वे दिल्ली चले गए और उन्हें पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया. लेकिन 2017 में, राघोगढ़ के महाराजा के लिए चीजें बदल गईं और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिग्विजय को गोवा और कर्नाटक के चुनाव प्रभारी के रूप में दी गई जिम्मेदारियों से हटा दिया और उस साल अगस्त में ही उन्हें तेलंगाना प्रभारी का पद भी गंवाना पड़ा था. इस फैसले ने पार्टी में कई लोगों को चौंका दिया क्योंकि उन्हें नेहरू-गांधी परिवार के सबसे भरोसेमंद व्यक्तियों में से एक माना जाता था.

इन सब के बीच उन्होंने अपने गृह प्रदेश में वापसी की और जैसा कि उनके भाई लक्ष्मण सिंह उनके लिए कहते हैं, ‘आप दिग्विजय को राजनीति से अलग नहीं कर सकते क्योंकि वह उसी में सांस लेते हैं, उसे ही पीते हैं और उसी में सोते हैं.’

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