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पेट्रोल के दामों को लेकर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर निशाना

नई दिल्ली 16 मार्च 2020 । अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमतों (Fuel Prices) में भारी गिरावट के बावजूद हाल ही में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गई बढ़ोतरी को लेकर पूर्व कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) पर तीखा हमला किया. राहुल गांधी ने कहा कि अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर दामों में गिरावट का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने की उनकी सलाह को नजरंदाज कर दिया गया.
राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘तीन दिन पहले ही मैंने प्रधानमंत्री कार्यालय से निवेदन किया था कि अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर तेल के दामों में गिरावट का लाभ आम लोगों तक पहुंचाया जाए और पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम की जाएं. लेकिन इस सलाह को मानने की बजाय, हमारे समझदार ने ईंधन पर एक्‍साइज ड्यूटी बढ़ा दी.’

अपने ट्वीट में उन्‍होंने एक वीडियो भी अटैच किया है जिसमें देखा जा सकता है कि अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर तेल कीमतों में भारी गिरावट से जुड़े एक रिपोर्टर के सवाल से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कथित तौर पर बचती दिख रही हैं.सरकार ने शनिवार को पेट्रोल और डीजल पर 3 रुपये पति लीटर की दर से एक्‍साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी कर दी थी जिससे उसे 39000 करोड़ रुपये का अतिरक्‍त राजस्‍व प्राप्‍त होगा. 2014-15 की तरह ही इस बार भी सरकार ने अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर तेल कीमतों में भारी गिरावट का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंचाने के अपने कदम को दोहराया.

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने बुधवार को आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री एक चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने में व्यस्त हैं. ऐसे में इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट की ओर उनका ध्यान नहीं गया है. गांधी ने ट्वीट किया था, ‘‘पीएमओइंडिया, जब आप एक चुनी हुई कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे थे उस समय आप वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई 35 प्रतिशत की गिरावट को नहीं देख पाए.”उस समय अपने ट्वीट में गांधी ने प्रधानमंत्री से कहा था कि वे पेट्रोल के दाम घटाकर 60 रुपये प्रति लीटर से कम पर लाएं. इससे सुस्त अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में मदद मिलेगी

कांग्रेस MLA ने विधायकों के पद छोड़ने की खबरों पर कहा- पार्टी को नहीं मिला कोई इस्तीफा

राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने गुजरात के विधायकों को राजस्थान भेज दिया, लेकिन फिर भी उसकी परेशानियां कम होती हुई नजर नहीं आ रही है. कांग्रेस के दो विधायकों के इस्तीफा देने की खबरें सामने आ रही हैं. इस पर गुजरात के कांग्रेस विधायक विरजीभाई ठुम्मर ने रविवार को इन खबरों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि अफवाहें उड़ रही हैं लेकिन पार्टी को अभी तक किसी का इस्तीफा नहीं मिला है. सोमाभाई पटेल कल तक कांग्रेस के संपर्क में थे. दूसरे विधायक जेवी काकडिया से मैंने संपर्क करने की कोशिश की थी लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका है.
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को डर सता रहा है कि कहीं उसके विधायक बीजेपी के पाले में न चले जाएं, इसलिए उसने शनिवार को अपने 14 विधायकों को इंडिगो फ्लाइट से राजस्थान के लिए रवाना कर दिया. वहीं, पांच विधायक सड़क मार्ग से राजस्थान के लिए रवाना हो गए. अहमदाबाद हवाईअड्डे से जयपुर जाने वाले 14 विधायकों में लखाभाई भरवाड़ (वीरमगाम), पूनम परमार (सोजित्रा), जिनीबेन ठाकुर (वाव), चंदनजी ठाकुर (सिद्धपुर), रित्विक मकवाना (चोटिला), चिराग कालरिया (जामजोधपुर), बलदेवजी ठाकुर, नाथाभाई पटेल, हिम्मतसिंह पटेल, इंद्रजीत ठाकुर, राजेश गोहिल, अजितसिंह चौहान, हर्षद रिबादिया और प्रद्युम्न सिंह जडेजा शामिल हैं.

वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस विधायकों पर काफी दबाव है और भाजपा धन और बाहुबल से राज्यसभा चुनाव को प्रभावित करना चाहती है.

182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में भाजपा के पास 103, जबकि कांग्रेस के पास 73 विधायक हैं. राज्यसभा के उम्मीदवार को जीतने के लिए 37 वोटों की जरूरत होगी. दोनों पार्टियों के पास दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त ताकत है. कांग्रेस को उम्मीद है कि निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी उनके उम्मीदवार के लिए ही वोट करेंगे.

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