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राहुल गांधी की नागरिकता पर नर्स का खुलासा, बोलीं- हॉस्पिटल में सबसे पहले मैंने अपने हाथों में लिया

नई दिल्ली 4 मई 2019 । कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जन्म को लेकर केरल की एक नर्स ने नया खुलासा किया है। वायनाड में एक रिटायर नर्स और वहीं की वोटर राजम्मा वावथिल ने दावा किया है कि राहुल का जन्म दिल्ली के एक अस्पताल में हुआ था, और उस समय वह उसी अस्पताल में ड्यूटी पर थीं। नर्स ने कहा कि 19 जून 1970 को जब राहुल गांधी का जन्म हुआ तब वह उसी अस्पताल में नर्स थीं।

72 वर्षीय नर्स का कहना है कि तब वह उस हॉस्पिटल में एक ट्रेनी के तौर पर नर्स का काम सिख रही थी और जब कांग्रेस अध्यक्ष का जन्म हुआ तब वह पहली महिला थीं जिन्होंने राहुल को अपने हाथों में लिया था।

वावथिल ने कहा, ‘मैं भाग्यशाली थी क्योंकि मैं उन कुछ लोगों में शामिल थी जिन्होंने नवजात बच्चे को अपने हाथों में लिया था। वह बहुत प्यारा था। मैं उनके जन्म की गवाह थी। मैं रोमांचित थी… हम सभी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पोते को देखकर रोमांचित थे।’

उन्होंने कहा कि 49 साल बाद वह प्यारा बच्चा कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में वायनाड से चुनाव लड़ रहा है। वावथिल ने कहा कि उन्हें अच्छी तरह याद है जब सोनिया गांधी को डिलीवरी के लिए ले जाया गया तब राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी और चाचा संजय गांधी अस्पताल के लेबर रूम के बाहर इंतजार कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी कहानी है जो उन्होंने अक्सर अपने परिवार को सुनाई है। रिटायर नर्स ने कहा कि वह भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की उस शिकायत से दुखी हैं, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष की नागरिकता का सवाल उठाया गया है। वावथिल के अनुसार, कोई भी भारतीय नागरिक के रूप में राहुल गांधी की पहचान पर सवाल नहीं उठा सकता है और स्वामी ने नागरिकता को लेकर जो सवाल उठाए हैं वह ‘आधारहीन’ है। रिटायर नर्स ने कहा कि राहुल गांधी के जन्म के बारे में सभी रिकॉर्ड अस्पताल में होंगे।

दिल्ली के होली फैमिली अस्पताल से नर्सिंग का कोर्स पूरा करने वाली वावथिल बाद में नर्स के रूप में भारतीय सेना में शामिल हुईं। सेवा से वीआरएस लेने के बाद वह 1987 में केरल लौटीं और सुल्तान बाथरी के पास कल्लोर में बस गईं।

चौथे दौर की शुरुआती खबरों से उड़ सकते हैं बीजेपी के होश, यूपी-महाराष्ट्र से बड़ा झटका लगने के संकेत

लोकसभा चुनाव के लिए चौथे दौर की वोटिंग खत्म होने के साथ जो खबरे चारों तरफ से आ रही हैं उससे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए एक अशुभ तस्वीर उभर कर सामने आ रही है। एनडीए के लिए चुनाव का चौथा चरण बेहद अहम था क्योंकि जिन 71 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान हुआ उनमें से एनडीए ने 2014 में 56 सीटें जीती थीं। अकेले बीजेपी की इनमें 45 सीटें थीं, बाकी उसके सहयोगी शिवसेना र एलजेपी की थीं।

लेकिन मतदान स्थलों से आई सूचनाएं संकेत देती हैं कि इन सीटों पर बीजेपी को करारा झटका लग सकता है। चौथे दौर में उत्तर प्रदेश की 13 सीटें भी शामिल थीं, जिनमें से सिर्फ कन्नौज को छोड़कर बाकी 12 सीटें बीजेपी ने 2014 में जीती थीं। लेकिन इस बार इन 13 सीटों पर उसके हिस्से बहुत ज्यादा कुछ आने के संकेत नहीं मिल रहे।

इसके अलावा दूसरा बड़ा झटका एनडीए और खासतौर से बीजेपी को महाराष्ट्र से लगने के संकेत हैं। महाराष्ट्र में 29 अप्रैल को 17 सीटों पर मतदान हुआ। इसके साथ ही महाराष्ट्र की सभी सीटों का मतदान पूरा हो गया। इन सभी सीटों को 2014 में एनडीए ने जीता था। बीजेपी के हिस्से में 8 और उसकी सहयोगी शिवसेना के हिस्से में 9 सीटें आई थीं। लेकिन इस बार चुनावी इलाकों से आई सूचनाएं इशारा कर रही हैं कि कांग्रेस-एनसीपी का जोश और राज ठाकरे द्वारा ऐन चुनावों के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह-तरह से पोल खोलने का असर इन सीटों पर पड़ेगा।

राज ठाकरे ने अपने वीडियो संदेशों के जरिए जो खुलासे किए उसका असर बीजेपी और शिवसेना दोनों पर पड़ने के आसार नजर आए। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इससे शिवसेना को ज्यादा नुकसान होने की संभावना है। एक विश्लेषक का तो यहां तक कहना है कि अगर शिवसेना अपने हिस्से की 24 में से 6 सीटें भी जीत जाए तो बड़ी बात होगी।

इनके अलावा राजस्थान की भी 13 सीटों पर सोमवार (29 अप्रैल) को मतदान हुआ। 2014 में बीजेपी ने राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन राज्य में मतदाताओं के रुझान से लगता है कि अगर वह इन 25 में से आधी सीटें भी जीत पाए तो बड़ी बात होगी। इसी तरह के रुझान मध्य प्रदेश से मिल रहे हैं, जहां बीजेपी ने 2014 में 29 में से 27 सीटें जीती थीं। हालांकि सोमवार को मध्य प्रदेश की सिर्फ 6 सीटों पर चुनाव हुआ, लेकिन चुनाव विश्लेषक मानते हैं कि इनमें से 5 पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा सकता है। इसी तरह बिहार की जिन 5 सीटों पर सोमवार का चुनाव हुआ उनमें से बीजेपी ने एक और उसकी सहयोगी एलजेपी ने 2 सीटें जीती थीं। लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं।

पश्चिम बंगाल से आने वाली रिपोर्ट्स भी कुछ ऐसा आभास दे रही हैं कि बीजेपी इस बार आसनसोल सीट तक एक बड़े अंतर से तृणमूल कांग्रेस के हाथों हार सकती हैं। 2014 में बीजेपी ने यह सीट जीती थी। बाकी जिन 8 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान हुआ, वहां तो वैसे भी बीजेपी का कोई आधार है ही नहीं।

ऐसे में बीजेपी के लिए सांत्वना सिर्फ ओडिशा से मिल सकती है जहां सोमवार को 6 सीटों पर मतदान था। लेकिन 2014 में इन सभी सीटों पर नवीन पटनायक की बीजेडी ने जीत हासिल की थी। अगर बीजेपी इन सीटों को जीत भी जाती है तो भी उसके लिए 2019 की राह मुश्किल ही साबित हो सकती है।

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