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पीएम मोदी के शपथ ग्रहण को लेकर राहुल गांधी ने लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली 30 मई 2019 । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी भाग लेंगे। पहले कांग्रेस पार्टी की ओर से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी व राज्यसभा में पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद के भाग लेने की चर्चा चल रही थी। लेकिन, अब राहुल गांधी के भी इस कार्यक्रम में भाग लेने की खबर ने राजनीतिक जगत में हलचल मचा दी है।

पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे राहुल गांधी. (फोटो : गूगल)
लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। भाजपा अकेले दम पर 303 सीटों पर पहुंच गई है। वहीं कांग्रेस को 52 सीटों पर सिमट जाना पड़ा है। नेता प्रतिपक्ष का पद अब एक बार फिर मोदी सरकार के रहमो-करम पर टिक गया है। 2014 में भी कांग्रेस 44 पर सिमट गई थी और नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए 55 सीटों के आंकड़े से पीछे रह गई थी। इस बार सीटें बढ़ी जरूर हैं, लेकिन इस पद के लिए समुचित आंकड़ा नहीं मिल पाया है।

कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, गुलाम नबी आजाद व राहुल गांधी का नाम आया सामने. (फोटो : गूगल)
कांग्रेस ने इन तमाम अदावतों व चुनावी प्रचार अभियान के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ उछाले गए जुमलों को भुलाकर राष्ट्रपति भवन में होने वाले कार्यक्रम में भाग लेने का निर्णय लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष के इस फैसले की प्रशंसा हो रही है। अब कांग्रेस की ओर से तीन नेता इस कार्यक्रम में भाग लेंगे। वहीं, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री ने वी. नारायणसामी ने भी इस कार्यक्रम में भाग लेने का निर्णय लिया है। हालांकि, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कार्यक्रम में भाग लेने से इंकार कर दिया है।

15 साल से अकेला ही लड़ रहा मेरा भाई, सीनियर नेता बाहर करते हैं बुराई

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने 25 मई को हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में पार्टी नेताओं पर जमकर भड़ास निकाली थी. सूत्रों के मुताबिक, प्रियंका ने कहा था कि राहुल गांधी 15 साल से अकेला ही लड़ रहा है. इस दौरान किसी ने उसका साथ नहीं दिया. उनका कहना था कि मैं उसका साथ देने और पार्टी की विचारधारा के लिए लड़ने आई हूं.

‘राहुल की बुराई करते हैं वरिष्ठ नेता’
प्रियंका ने कहा था कि कुछ वरिष्ठ नेता जो यहां बैठे हैं वो राहुल की बाहर बुराई करते हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के हवाले से कहा जा रहा है कि सीडब्ल्यूसी में शामिल कई नेता प्रियंका की इस बात से सहमत थे कि नेताओं ने पार्टी को तरजीह नहीं दी. राहुल को जिस सहयोग की जरूरत थी वो उन्हें नहीं मिला.

न्यूज एजेंसी यूएनआई ने सूत्रों के हवाले बताया है कि प्रियंका ने बैठक में पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताया था. उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा था कि कांग्रेस के हत्यारे इसी कमरे में बैठे हैं.

‘टिकट देने के लिए बनाया गया दबाव’
प्रियंका का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा था जब पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने वहां मौजूद कुछ वरिष्ठ नेताओं के नाम लिए और कहा कि उन्होंने अपने बेटों को टिकट देने के लिए दबाव बनाया था. लेकिन चुनाव के समय जो संकट सामने था पार्टी को उससे बाहर निकालने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया.

बता दें कि 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद ही निराशाजनक रहा. कांग्रेस पार्टी 542 लोकसभा सीटों पर हुए चुनाव में केवल 52 सीटें ही जीत पाई थी. वहीं, भारतीय जनता पार्टी को 303 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. डीएमके 23 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही.

फिर हुई गोडसे को लेकर बयानबाजी शुरू

महू से भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे गोडसे को राष्ट्रवादी बताया। ठाकुर के बयान पर मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दुख जताते हुए कहा कि इससे भाजपा की सोच उजागर होती है। इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान भोपाल से सांसद चुनी गई प्रज्ञा ठाकुर ने भी गोडसे को राष्ट्रभक्त कहा था।

इंदौर में देवी अहिल्या जन्मोत्सव समिति के कार्यक्रम में उषा ठाकुर ने गोडसे से संबंधित सवाल के जवाब में कहा, ‘वे राष्ट्रवादी थे। कोई व्यक्ति जीवन भर देश की चिंता करता है। क्या परिस्थिति रही होगी जो उन्होंने यह निर्णय लिया यह तो वह ही जानता है। आप और हमको इस पर कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।’

इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान भोपाल से भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर ने एक चुनावी रैली के दौरान दिए बयान में गोडसे को राष्ट्रभक्त बताया था। प्रज्ञा ने कहा था कि गोडसे राष्ट्रभक्त थे, हैं और रहेंगे। उन्हें आतंकवादी कहने वाले पहले अपने गिरेबां में झांके।

प्रज्ञा के इस बयान पर काफी बवाल मचा था। भाजपा ने प्रज्ञा के इस बयान से खुद को अलग करते हुए उनका व्यक्तिगत बयान बताया था। चौतरफा दबाव के बाद प्रज्ञा ने अपने गोडसे वाले बयान पर माफी भी मांगी थी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि वह प्रज्ञा को दिल से कभी भी माफ नहीं कर सकेंगे।

तीन तलाक के विरोध ने दिलाए मोदी को वोट
लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को मिली शानदार जीत के संबंध में उषा ने कहा कि तीन तलाक के विरोध ने मोदी को वोट दिलाए। मोदी सरकार के फैसले से अल्पसंख्यक महिलाओं ने जो राहत महसूस की ये उसी का परिणाम है। मुस्लिम बहनों ने भी मोदी को राष्ट्र नायक के रूप में स्वीकारा है।

कमलनाथ ने किया ओएसडी के यहां मिले दस्तावेजों से किनारा

लोकसभा चुनाव से पूर्व मध्यप्रदेश में आयकर विभाग की छापेमारियों के मामले में आरोपियों का करीबी के तौर पर नाम जोड़े जाने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। बुधवार को सीएम कमलनाथ और उनके ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के बीच बेनामी लेन-देन के संबंध में फोन पर कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग और कागजातों में दर्ज कुछ नेताओं के नाम मीडिया में सामने आने के बाद उन्होंने आरोपों से किनारा किया है।
सीएम कमलनाथ ने कहा कि ये कागजात कहां से मिले? इन कागजात का मुझसे क्या संबंध? इन सवालों का जवाब नहीं है। आयकर विभाग ने छापेमारियां की, आगे जो भी कानूनी कार्रवाई होनी है, वो हां। मुझे क्या आपत्ति हो सकती है! उन्होंने कहा कि जिन लोगों के यहां छापेमारी हुई या जिनका भी नाम लिया जा रहा है, उन्हें मैं नहीं जानता। मैंने उनमें से एक का भी चेहरा कभी नहीं देखा।

कमलनाथ ने कहा कि यह सब केवल अच्छे काम से ध्यान भटकाने की कोशिश है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार बेहतर काम कर रही है और विरोधी ऐसा नहीं चाहते। उन्होंने व्यापमं, माखन लाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय का नाम लिए बगैर कहा कि भाजपा के शासनकाल में प्रदेश में जो भी घोटाले हुए, भ्रष्टाचार हुए, उनकी जांच होने जा रही है। सरकार को ऐसा करने से रोकने की कोशिश की जा रही है।

मालूम हो कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के लिए बढ़ रही मुश्किलों के बीच अब सीएम और उनके ओएसडी के बीच की बातचीत की रिकॉर्डिंग सामने आई थी। टीवी न्यूज चैनल टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार इसी बातचीत के आधार पर करोड़ों रुपये के लेन-देन का आरोप लगाया जा रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, तुगलक रोड स्थित निवास से हुई फोन की रिकॉर्डिंग और बातचीत के अंश मीडिया में बाहर आए हैं, जिसमें कथित तौर पर पैसों के कलेक्शन और ट्रांसफर के लेन-देन का जिक्र है।मीडिया में आई इस बातचीत को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि यह आयकर विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों पर आधारित है, साथ ही यह मुख्यमंत्री और उनके ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के बीच हुई बातचीत से जुड़ी है। आयकर विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों में उम्मीदवारों को करोड़ों रुपये भेजे जाने के सबूत भी हैं। टीवी न्यूज चैनल टाइम्स नाऊ ने मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके ओएसडी के बीच हुई बातचीत को ट्वीट भी किया है।

इन्हीं आरोपों पर सीएम कमलनाथ ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आयकर विभाग के सारे बयान फर्जी हैं। वे खुद बयान देते हैं। वे खुद इसे मीडिया को देते हैं। वे राजनीतिक खेल खेल रहे हैं, तो अच्छा है, इस राजनीतिक खेल का कोई अंत थोड़े ही होने वाला है।

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