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राहुल ने राफेल पर पलट दी बाजी, अपनी नहीं अब सुप्रीम कोर्ट की गलती बता रही है मोदी सरकार

नई दिल्ली 16 दिसंबर 2018 । राहुल ने बाजी पलट दी। इसे कहते हैं आत्मविश्वास का दम। निस्संदेह ये आत्मविश्वास मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में जीत से आया है। राफेल पर राहुल से माफी मांगने वाले बीजेपी नेता अब बगलें झांक रहे हैं, वहीं मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की ओर टोपी ट्रांसफर कर दी है। सीलबंद लिफाफे में जो तथ्य सरकार ने पेश किए, उसे पढ़ने में सरकार मानती है कि सुप्रीम कोर्ट से चूक हुई है।

जब राफेल पर सुप्रीम फैसले से बीजेपी में लौटी ‘आक्रामकता’

सुप्रीम कोर्ट ने राफेल को लेकर जब फैसला सुनाया तो बीजेपी खेमे में तीन राज्यों में हार के बाद मायूस चेहरे अचानक खिल उठे। कांग्रेस की ओर आक्रामकता लौट आयी। राहुल पर हमले का नया मौका किसी ने छोड़ा भी नहीं। नीचे स्तर के कार्यकर्ता से लेकर प्रवक्ता और नेता तक राहुल से माफी मांगने की जिद करने लगे।

राहुल के सामने बीजेपी हुयी चित

राहुल ने जवाब देने में थोड़ा वक्त जरूर लिया। मगर, तीसरा पहर बीतते-बीतते राहुल बाजी पलट चुके थे। उनके पास मजबूत, तर्कपूर्ण और हैरान करने वाले तथ्य थे। फैसले की तीन पंक्तियों में से ये तथ्य निकले थे। उन पंक्तियों में सीएजी और पीएसी से राफेल की प्राइस को लेकर चर्चा, समीक्षा का ज़िक्र था, तो संसद में संशोधित तथ्य रखने की बात भी।

तीन पंक्ति में राफेल पर सियासत का इतिहास, वर्तमान, भविष्य

राहुल के पास उन तीन पंक्तियों के जवाब में थे पीएसी के चेयरमैन मल्लिकार्जुन खड़गे। पीएसी के चेयरमेन के पास कोई मसला हो और उससे पूछे बगैर उसका कंटेंट कहीं साझा कर दिया, ऐसा असंवैधानिक काम हो ही नहीं सकता था।

पीएसी प्रमुख मल्लिकार्जुन रह गये हैरान

मगर, यहां पेंच दूसरा था। पीएसी चीफ को जानकारी ही नहीं थी कि सीएजी की ओर से राफेल की प्राइस को लेकर कोई मामला समीक्षार्थ या विचारणार्थ उनके पास आया है। अब पीएसी ने सीएजी को तलब करने का मन बनाया। हंगामा बरपने लगा था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का आधार ही ‘झूठा’ निकला

सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदे में प्रक्रिया को सही बताया था, अनियमितता की बात से इनकार किया था और सबका आधार वही था ‘जो तथ्य अदालत के सामने पेश किए गये’। अब अदालत के सामने पेश किए गये तथ्य ही झूठ निकले। लिफाफे में बंद झूठ।

सवालों में घिरे राहुल से सवाल करने वाले

बीजेपी के उन नेताओं को भी जवाब मिल गया था जो पूछ रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट से क्या राहुल गांधी ऊपर हैं? राजनीतिक दल और उनके नेता एक-दूसरे को कोसते-कोसते यह भी भूल चुके हैं कि लोकतंत्र में जनता की किस्मत तय करन वाली शक्ति विधायिका है। और, विधायिका का चरित्र जो होता है उसे बनाने या बिगाड़ने वाले राजनीतिक दल और नेता ही होते हैं। तब भी उसकी श्रेष्ठता कभी कम नहीं होती।

मोदी सरकार ने कहा-सुप्रीम कोर्ट से चूक हुई

अदालत की अवमानना के डर से कोई राजनीतिक दल सुप्रीम कोर्ट पर अंगुली नहीं उठा पा रहा था। मगर 24 घंटे नहीं बीते होंगे जब खुद मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फैसला बदलने का आग्रह कर डाला। सरकार ने कहा कि उसने जो तथ्य सुप्रीम कोर्ट को सील बंद लिफाफे में मुहैया कराए हैं, वह राफेल सौदे की प्रक्रिया के संबंध में थे। इसे समझने में सुप्रीम कोर्ट से गलती हुई है।

तथ्य नहीं पढ़ पाया सुप्रीम कोर्ट!

सुप्रीम कोर्ट ने तथ्यों को गलत पढ़ा! उन तथ्यों को जो सीलबंद थे! अगर राहुल गांधी के पास आत्मविश्वास नहीं होता या फिर कहें कि तीन राज्यों में हार के बाद जो आत्मविश्वास में कमी बीजेपी की तरफ दिख रही है, वैसी हालत होती तो शायद ये बात कभी सामने भी नहीं आती।

अखिलेश के आत्मविश्वास में साफ दिखी कमी

आप अखिलेश यादव का उदाहरण ले सकते हैं। राफेल मामले में जेपीसी जांच की मांग को जितनी जल्दबाजी में उन्होंने खारिज कर दिया, उसकी वजह उनमें आत्मविश्वास की कमी ही है। उन्हें लगा मानो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस के सुर में सुर मिलाने से उनकी राजनीतिक हवा ख़राब हो जाएगी।

अब जेपीसी से जांच ही है रास्ता

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी से जांच की जो मांग औपचारिक मांग भर लग रही थी, वह एक दिन बाद गम्भीर मांग के रूप में बदल चुकी है। अब जेपीसी से सरकार बच ही नहीं सकती। राफेल मामले में जांच का मतलब अब सिर्फ जेपीसी रह गया है। कोई दूसरी जांच सक्षम जांच नहीं कहलाएगी।

मोदी सरकार का राहुल ने उड़ाया मजाक

राहुल गांधी और दूसरे नेताओं के आत्मविश्वास में बड़ा फर्क आप फिलहाल देख सकते हैं। तीन पंक्तियों का विवरण पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले वाले दिन राहुल गांधी ने मोदी सरकार का जमकर मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है मानो पीएसी फ्रांस में बैठी हो।

जब राहुल ने मोदी को ललकारा

राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी को ललकारा भी कि वे कब तक भागते फिरेंगे। राहुल ने कहा कि वे इस बात को साबित करके रहेंगे कि चौकीदार चोर है।

राहुल के आत्मविश्वास ने पलटी बाजी

इसे कहते हैं आत्मविश्वास। राहुल के आत्मविश्वास ने हारी हुई बाजी को भी पलट कर रख दिया। अब राहुल से माफी मांगने वाले मुंह छिपाते फिर रहे हैं। जो लोग पूछ रहे थे कि क्या राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट से ऊपर हैं? उन्हें आज राजनीति की ताकत का पता चल गया है। सुप्रीम कोर्ट अब सीलबंद लिफाफे में सरकार के जवाब पर शायद ही कभी निश्चिन्त होकर फैसला दे पाए।

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