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20 रुपये के रेल टिकट को बना देते थे 200 का, तीन गिरफ्तार

नई दिल्ली 1 जुलाई 2018 । फर्जी रेल टिकटों के जरिए रेलवे को करोड़ों का चूना लगाने वाले अन्तर्राज्यीय गिरोह के तीन शातिरों को पूर्वोत्तर रेलवे आरपीएफ की सीआईबी टीम ने धर दबोचा। यह गिरोह कम दूरी के जरनल टिकट पर टेम्परिंग करके उसे लम्बी दूरी में बदल कर यात्रियों को बेच रहे थे। इनके पास से 45 जरनल टिकट, स्टेशनों व किराए की 125 मोहरें समेत काफी सामान बरामद हुआ है।
इंस्पेक्टर सीआईबी अशरफ सिद्दीकी ने बताया कि पिछले दो तीन साल से फर्जी टिकटों का धंधा लखनऊ में फल फूल रहा था। ये शातिर रोजाना डेढ़ से दो सौ टिकटों पर टेम्परिंग करके यात्रियों को बेचते थे। इससे रेलवे को आर्थिक नुकसान हो रहा था। साथ ही यात्री फर्जी टिकट के साथ पकड़ा जाता तो उस पर भी जुर्माने की कार्रवाई हो रही थी। उन्होंने बताया कि काफी समय से इनकी तलाश की जा रही थी। बीते शुक्रवार को मुखबिर के जरिए सूचना मिली की लखनऊ जंक्शन पर तीन लोग यात्रियों को फर्जी रेल टिकट बेच रहे हैं।

ऐसे बनाते थे फर्जी टिकट
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे कम दूरी के जरनल रेल टिकट खरीदते थे। मसलन पहले ये लोग लखनऊ से जैतीपुर या फिर हरौनी का टिकट लेते थे। टिकट की कीमत 15 से 20 रुपए से अधिक नहीं है। इसके बाद ये लोग उसी टिकट से ब्लेड के जरिए जगह का नाम, किलोमीटर व किराया मिटा देते थे। फिर उस टिकट पर एक से दो सेंटीमीटर की मोहरों के जरिए जगह, किराया व किलोमीटर भरते था। उस टिकट को यात्रियों को दस से बीस रुपये कम में बेचते थे। सीआईबी को इनके पास से 125 छोटी-छोटी मोहरें मिली है। जिन पर किलोमीटर, स्टेशनों के नाम व किराया लिखा हुआ है।

खैनी की पन्नी में मिली मोहरें
आरोपियों ने सभी मोहरें पटना और मुजफ्फरपुर में बनवाई हैं। ये मोहरें इतनी छोटी थी कि शातिरों ने 125 मोहरों को खैनी की पन्नी में छिपा रखा था। टिकट पर टेम्परिंग करने से पहले ये मोहर के पीछे फेवी क्विक से एक बूंद गिराते थे। फिर छोटी सी लकड़ी चिपका कर टिकट पर किराये, जगह व दूरी की मोहर लगा देते थे। मोहरें उसी लिपि में बनी हुई थी जिस लिपि में रेलवे जरनल टिकट निकलते हैं। सटीक टेम्परिंग की वजह से ये शातिर पकड़े नहीं गए। इनके पास दिल्ली, हावड़ा, जयपुर, मुजफ्फरपुर, पटना, गुवाहाटी, डिब्रूगढ़ आदि शहरों की मोहरें मिली हैं।

हर टिकट पर कमा रहे थे चार से पांच सौ
सीआईबी के मुताबिक ये जैतीपुर के बीस रुपये के टिकट पर टेम्परिंग करके 480 रुपए का बना देते थे। टेम्परिंग के जरिए 20 किलोमीटर की दूरी को 500 किलोमीटर बना दी जाती थी। ये शातिर तिथि में कोई छेड़छाड़ नहीं करते थे। फर्जी टिकट बनाने के बाद ये लोग बस व रेलवे स्टेशन पर सीधे साधे यात्री को किसी बहाने से 20 से 25 रुपए कम करके टिकट बेच देते थे। यही नहीं बातों में फंसा कर कभी कभी ये लोग यात्री असली टिकट लेकर उसे फर्जी टिकट दे देते थे। असली टिकट को रिफंड करके उसका पैसा भी डकार जाते थे।

आठवीं से अधिक पढ़े लिखे नहीं हैं ठग
जानकारों के अनुसार जरनल टिकट रिफंड पर सिर्फ दस से बीस रुपए ही काटे जाते हैं बाकी के रकम यात्री को वापस लौटा दी जाती थी। इससे रेलवे को काफी आर्थिक नुकसान हो रहा था। सीआईबी के मुताबिक ये सभी आरोपी आठवीं से अधिक पढ़े लिखे नहीं है। उनको ठगी का यह गुर एक रेलकर्मी ने ही सिखाया है। बाद में उस लिपिक को रेलवे ने बर्खास्त कर दिया था। सीआईबी के मुताबिक रेलकर्मी का अब देहांत भी हो चुका है।

लकायदा की धमकी के बाद रेलवे का अलर्ट, CRPF ने ट्रेनों में शुरू की चेकिंग

आतंकी संगठन अलकायदा ने रेल पटरियां उखाड़ने की धमकी दी है। इस मामले में सीआरपीएफ ने गोपनीय रिपोर्ट सुरक्षा एजेंसियों और रेलवे बोर्ड को भेजी है। रिपोर्ट के अनुसार आतंकी संगठन अलकायदा पटरियों को उखाड़कर आतंक फैलाने की साजिश रच रहा है। इस मामले में देश सहित मप्र के जबलपुर मंडल में आने वाले सभी रेलवे स्टेशन और रेलवे सुरक्षा बल को अलर्ट मिला है।

मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है। यात्रियों को आरपीएफ के हेल्पलाइन नंबर के बारे में जागरूक किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि आतंकी संगठन ने इंस्पायर ट्रेन डिरेल ऑपरेशन नाम से एक पत्रिका जारी की है। इसमें बताया गया है कि चलती ट्रेन को पटरी से उतारने के लिए किन तरीकों को अपनाया जा सकता है। इसके साथ अन्य साक्ष्यों और सूचनाओं के आार पर अलर्ट घोषित किया गया है।

ट्रेनों की सर्चिंग व पेट्रोलिंग जारी

मंडल से निर्देश मिलने के बाद रेलवे स्टेशन और आउट साइड स्टेशनों पर जीआरपी ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। ट्रेन आते ही सामान्य बोगियों में यात्रा करने वाले संदिग्धों से पूछताछ का सिलसिला चल रहा है। ट्रेकमैनों को पटरियों पर विशेष नजर रखने और गड़बड़ी मिलते ही तत्काल अधिकारियों को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं आरपीएफ एसओ श्वेता सूर्यवंशी के निर्देशन में पटरियों की देखरेख के लिए आउट साइड स्टेशनों पर 24 घंटे पेट्रोलिंग की जा रही है।

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