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RBI दे सकता है सरकार को 40 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक मदद

नई दिल्ली 8 जनवरी 2019 । पिछले कुछ दिनों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि RBI और सरकार के बीच कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक रिजर्व बैंक सरकार को डिविडेंड देने को तैयार है. एजेंसी के मुताबिक RBI मार्च तक सरकार को 4.32 बिलियन डॉलर से 5.8 बिलियन डॉलर (करीब 400 अरब रुपये) दे सकता है. सरकार लंबे समय से डिविडेंड की मांग कर रही थी. उम्मीद है कि इस रकम से फिस्कल डेफिसिट की खाई को कम किया जा सकेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्स कलेक्शन में भारी कमी आई है, जिसके बाद सरकार लगातार डिविडेंड का मांग कर रही थी.

बता दें, 10 दिसंबर को उर्जित पटेल ने RBI गवर्नर पद से इस्तीफा दिया था. उनके बाद शक्तिकांत दास को RBI का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है. उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि कुछ मुद्दों पर RBI और सरकार के बीच मतभेद हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है.

बता दें, वर्तमान गवर्नर शक्तिकांत दास ने रिजर्व मनी को लेकर एक पैनल का गठन किया है. पैनल इस बात पर विचार कर रहा है कि आखिरकार RBI के रिजर्व की साइज कितनी होनी चाहिए. RBI के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि डिविडेंड की राशि 300 बिलियन रुपये से ज्यादा होगी.

बाजार में कैश की हुई किल्लत तो

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि कर्ज देने के लिए बैंकों की कैश मनी की जरूरतों को फिलहाल पूरा किया जा चुका है. लेकिन अर्थव्यवस्था में लिक्‍विडिटी (धन) की दिक्कत हुई तो केंद्रीय बैंक जरूरी कदम उठाएगा. दरअसल, नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA)से जूझ रहे सरकारी बैंकों और छोटे एवं मझोले उपक्रमों (MSME)सेक्टर के प्रतिनिधियों से शक्तिकांत दास ने मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उन्‍होंने ये बातें कहीं. शक्तिकांत दास ने कहा कि मंगलवार को मुंबई में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के साथ उनकी स्थिति पर बातचीत की जाएगी.

दास ने लिक्‍विडिटी पर कहा, ‘‘हम लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं. हमारा मानना है कि कुल मिला कर लिक्‍विडिटी की जरूरतें पूरी हो रही है.’’ उन्होंने कहा कि यदि इसमें दिक्कतें हुई तो रिजर्व बैंक कदम उठाएगा. उन्होंने पर्याप्त लिक्‍विडिटी बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि बाजार की जरूरतों के हिसाब से ही तरलता की मात्रा बढ़ाई जाएगी. एमएसएमई के साथ बैठक के बारे में दास ने कहा कि बैंकों को लोन के पुनर्गठन से पहले एमएसएमई की वहनीयता परखने के लिये कहा गया है.

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