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पढ़िए कब होगा मप्र सहित 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव का ऐलान

नई दिल्ली 17 जुलाई 2018 । मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़, राजस्थान एवं मिजोरम में विधानसभा चुनाव का माहौल बन चुका है। पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह सहित राहुल गांधी के दौरे भी शुरू हो गए हैं। राज्यों में दावेदारों के जनसंपर्क तक शुरू हो चुके हैं। अब बस इंतजार है तो निर्वाचन आयोग द्वारा किए जाने वाले चुनाव के ऐलान का। खबर आ रही है कि भारत निर्वाचन आयोग 05 अक्टूबर को चुनाव का ऐलान कर सकता है। हालांकि अभी यह नहीं तय किया जा सका है कि प्रदेश में होने वाला विधानसभा चुनाव कितने चरणों में होगा।नवम्बर में होगी वोटिंग, दिसम्बर में नतीजे

सूत्रों की मानें तो नवम्बर के आखिर तक चारों राज्यों के चुनाव अलग-अलग चरणों में संपन्न कराये जा सकते हैं। जबकि दिसंबर की शुरूआत में ही चुनाव परिणाम डिक्लेयर कर दिए जाएंगे। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के साथ ही राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में नई विधानसभा का गठन सात जनवरी तक होना है।

वन नेशन-वन इलेक्शन का प्लान रद्द
बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग चारों राज्यों में चुनाव की रूपरेखा पहले ही तैयार कर चुका था। लेकिन, वन नेशन-वन इलेक्शन की चर्चाएं शुरू होने के बाद चुनाव आयोग इस बात की संभावनाएं तलाश रहा था कि लोकसभा इलेक्शन विधानसभा चुनावों के साथ ही हो जाएं। हालांकि अब इलेक्शन कमीशन ने इस तरह की सभी कवायदों को ठंडे बस्ते में डालकर चारों राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारी तेज कर दी है।

PM पद की रेस में बहनजी: 2019 में इस फॉर्मुले पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी बसपा

क्‍या 2019 के लोकसभा चुनावों में किसी पार्टी को बहुमत न मिलने पर मायावती बड़ी भूमिका पर नजरें गड़ाए हुए हैं? पिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारों में यह सवाल काफी घूम रहा है. हालांकि बसपा सुप्रीमो मायावती खामोश हैं लेकिन विश्‍वसनीय सूत्रों ने न्‍यूज18 को बताया कि पार्टी जमीनी स्‍तर पर ‘प्रधानमंत्री के रूप में बहनजी’ की रणनीति पर काम करेगी. 2019 के चुनावों से पहले संभावित गठबंधन की दिशा में प्रधानमंत्री के पद की महत्‍वाकांक्षा मायावती और उनकी पार्टी का रुख तय करेगा. यही रणनीति राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों के लिए भी अपनाई जाएगी.

आलोचकों का कहना है कि जिस पार्टी के पास लोकसभा में अभी एक भी सीट नहीं है उसके लिए प्रधानमंत्री पद की महत्‍वाकांक्षा रखना दूर की कौड़ी है. बसपा नेता इस तर्क को खारिज करते हैं. नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्‍ठ नेता ने बताया कि पार्टी का वोट शेयर उत्‍तर प्रदेश व कई अन्‍य राज्‍यों में बरकरार रहा है और इसे सीटों में बदलने की जरूरत है.

बसपा नेता के अनुसार, ‘2014 में पार्टी को भले ही लोकसभा सीट नहीं मिली हो लेकिन उसे उत्‍तर प्रदेश में 19.8 प्रतिशत वोट मिले थे. इसी तरह मध्‍य प्रदेश और उत्‍तराखंड में साढ़े चार फीसदी वोट आए थे. कर्नाटक, पंजाब, दिल्‍ली, राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ में भी बसपा को ठीकठाक वोट मिले थे.’

बसपा नेता ने आगे बताया कि पार्टी को लगता है कि नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ ‘बढ़ती नाराजगी’ और संयुक्‍त विपक्ष की उभरती संभावनाओं के चलते सीटें जीतना बड़ी चुनौती नहीं है.

कर्नाटक सरकार के शपथग्रहण कार्यक्रम में स्‍टेज पर विपक्ष के दिग्‍गजों और सोनिया गांधी के साथ घनिष्‍ठता दिखाने के बाद मायावती ने 2014 की विफलता को पीछे छोड़कर 2019 में महत्‍वपूर्ण ताकत बनने का इशारा किया है. अब उन्‍हें लगता है कि अगर वह अपनी चालें सही तरह से चलेंगी तो वह राष्‍ट्रीय स्‍तर पर बड़ी खिलाड़ी बनकर उभर सकती हैं. भारतीय राजनीति में दलितों के सबसे बड़े नेताओं में से एक होना और प्रशासक के रूप में जोरदार तजुर्बा मायावती के पक्ष में जाता है.

2019 में अपने लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए बसपा ने दो तरह की रणनीति अपनाई है. इसके तहत बसपा सावधानी से गठबंधन पर काम कर रही है और कांग्रेस व संभावित क्षेत्रीय दलों को खुश रख रही है. साथ ही खुद को विपक्षी महागठबंधन के शिल्‍पकार के रूप में भी स्‍थापित करना चाहती है.

जमीन पर ‘प्रधानमंत्री के रूप में मायावती’ अभियान का मूलमंत्र है. इसके लिए स्‍पष्‍ट वजहें भी दी गई हैं. पहली, ‘दलित की बेटी’ प्रधानमंत्री बन रही है इस सपने को बेचते हुए पार्टी कैडर और दलितों को एकजुट कर प्रेरित करना. दूसरी, चुपचान राजनीतिक हलकों में इस आइडिया को स्‍थापित करना.

सोमवार को लखनऊ में पार्टी के बड़े कार्यकर्ताओं की बैठक में बसपा की यह रणनीति साफ नजर आई. इस बैठक में मायावती मौजूद नहीं थी लेकिन उनका संदेश भरोसेमंद नेताओं के जरिए भेज दिया गया. बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष जय प्रकाश सिंह ने कहा, ‘पार्टी एक निश्चित रणनीति पर काम कर रही है. पूरा देश बहनजी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता है.’

उन्‍होंने आगे कहा, ‘जैसे रावण को राम, कंस को कृष्‍ण ने मारा था वैसे ही मोदी को मायावती हराएंगी.’ सिंह ने साथ ही कहा कि विपक्षी एकता मायावती के इर्दगिर्द हो रही है और बेंगलुरु में एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण कार्यक्रम की तस्‍वीर इस बात को पूरी तरह से पेश करती है.

राज्‍य सभा सांसद और राष्‍ट्रीय संयोजक वीर सिंह ने भी अपने भाषण में यही भावना दर्शाई.

मायावती के एक और विश्‍वस्‍त और एमएलसी भीमराव अंबेडकर ने कहा कि हालात 1993 जैसे ही हैं जब सपा के तत्‍कालीन अध्‍यक्ष मुलायम सिंह यादव और बसपा प्रमुख कांशी राम ने बीजेपी को यूपी से हटाने के लिए हाथ मिलाया था. उन्‍होंने कहा कि उस समय ‘मिले मुलायम कांशी राम, हवा में उड़ गए जय श्री राम’ नारा था. इसे देखते अंदाजा लगाया जा सकता है कि नतीजा क्‍या होने वाला है.

2019 के चुनावों के लिए बन रहे माहौल को देखते हुए मायावती ने बड़ी ही चतुराई से प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी महत्‍वाकांक्षा को स्‍थापित करना शुरू किया है. यही वजह है कि वह उत्‍तर प्रदेश और इसके बाहर गठबंधन पर गंभीरता से विचार कर रही हैं. वह न केवल यूपी में अपनी पार्टी के विस्‍तार देना चाहती है बल्कि लोकसभा में भी मजबूत ताकत बनाना चाहती हैं. वह कांग्रेस और गैर एनडीए दलों के साथ भी घनिष्‍ठता बनाए रखना चाहती हैं.

येचुरी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना, सीबीआई में बीजेपी, आरएसएस के लोगों की भर्ती

माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने केंद्र की मोदी सरकार पर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को बर्बाद करने का आरोप लगाते हुये सोमवार को कहा कि इसमें सिर्फ उन्हीं लोगों को शामिल किया जा रहा है जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के विरोधियों को निशाना बना रहे हैं।

येचुरी ने एक ट्वीट में लिखा, यह शर्मनाक एवं घिनौना है। इसके लिए स्वयं प्रधानमंत्री जिम्मेदार हैं। उन्होंने मीडिया में आई उन खबरों पर प्रतिक्रिया के रूप में यह ट्वीट किया है जिनके अनुसार, सीबीआई की नीति निर्धारक शाखा ने केंद्रीय सतर्कता आयोग को दो पत्र लिखकर कहा है कि ब्यूरो के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना सीबीआई की चयन समिति की बैठक में निदेशक आलोक वर्मा की जगह उपस्थित नहीं हो सकते क्योंकि अस्थाना पर कई मामलों में नजर रखी जा रही है।

खबरों के अनुसार, सीबीआई ने यह भी कहा है कि वर्मा इस समय विदेश दौरे पर हैं और वह जल्दी में बुलाई गई बैठकों में शामिल नहीं हो सकते। साथ ही यह भी कहा गया है कि चयन समिति द्वारा प्रस्तावित अधिकारियों की जाँच के लिए भी उसे पर्याप्त समय चाहिये। इस संबंध में येचुरी ने ट्विटर पर लिखा है परंपरा के अनुसार, सीबीआई में शामिल करने के लिए अधिकारियों के नाम का प्रस्ताव सीबीआई ही करता है। केंद्रीय सतर्कता आयोग को लिखे इस पत्र से जाहिर होता है कि नामों की सिफारिश कहीं और से की जा रही है। ये वे लोग हैं जो अपराधी और भ्रष्टाचारी हैं। यह समझना मुश्किल नहीं है कि इन नामों की सिफारिश कौन कर रहा है।

माकपा महासचिव ने लिखा है, उच्चतम न्यायालय के सभी आदेशों को ताक पर रखकर सीबीआई को खुलेआम खत्म किया जा रहा है। उसमें सिर्फ उन्हीं अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है जो भाजपा और आरएसएस के राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनायेंगे।

कांग्रेस के बड़े नेता की दोनों किडनी फेल, पार्टी में सन्नाटा

कांग्रेस पार्टी के लिए बुरी खबर है। पार्टी के एक बड़े नेता की दोनों किडनी फेल हो गयी हैं। उनकी हालत काफी गंभीर है। अस्पताल में उनकी जान बचाने के लिए कोशिशें की जा रही हैं लेकिन उनकी तबीयत नहीं सुधर रही है। हालात यह हैं कि उनकी जिन्दगी बचाने के लिए सप्ताह में पांच बार डायलिसिस करना पड़ रहा है।

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सीएम से लेकर रह चुके हैं राज्यपाल
हम जिस बड़े नेता की बात कर रहे हैं वो किसी नाम या पहचान के मोहताज नहीं हैं। कांग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में उनका नाम आता है। वो यूपी और उत्तराखंड के सीएम रह चुके हैं। इसके साथ ही वो आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं। इसके अलावा भी उनको हमेशा ही कांग्रेस में बड़े पदों पर रखा गया। वो कांग्रेस के रणनीतिकारों में एक हैं।

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इस नेता की हो रही है बात
हम जिस नेता की बात कर रहे हैं वो कोई और नहीं बल्कि नारायण दत्त तिवारी हैं। नारायण दत्त तिवारी पिछले कई दिनों से दिल्ली साकेत के मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती हैं। उनकी दोनों किडनियां खराब हो गयी हैं। डॉक्टरों को उनके शरीर की गन्दगी साफ करने के लिए एक हफ्ते में पांच बार डायलिसिस करना पड़ रहा है।

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खतरनाक स्तर पर ब्लड प्रेशर
किडनी फेल होने की वजह से उनका क्रिएटिनिन काफी बढ़ गया है। उनका रक्तचाप भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इतना ही नहीं उनको कई तरह के इंफेक्शन भी हो गये हैं। इस वजह से उनके पैर अकड़ने लग गये हैं.

सरकार देश में अघोषित आपातकाल लागू कर रही है: सिंघवी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सरकार पर डर का माहौल पैदा करने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि सरकार देश में अघोषित आपातकाल लागू कर रही है। सिंघवी ने यहां एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि सरकार हर चीज पर नियंत्रण करना चाहती है और सरकार द्वारा बनाये गये माहौल को इससे पूर्व पहले कभी नहीं देखा गया।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विधि प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित लोकतंत्र, संविधान, देश बचाने के कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सिंघवी ने कहा कि संविधान का स्तंभ भी खतरे में है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा एवं निष्पक्षता सर्वोच्च है, लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार ने इसे चौराहे पर ला दिया है। उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों को प्रेस वार्ता कर अपनी पीड़ा व्यक्त करनी पड़ी। उन्होंने संविधान के साथ छेड़छाड़ की चेष्टा को घातक बताते हुए वकीलों से आह्वान किया कि वे सजग भूमिका निभायें।

उन्होंने कश्मीर की स्थिति पर कहा कि कश्मीर में शांति प्रक्रिया को भाजपा आगे बढाने में विफल रही और घाटी में पिछले चार वर्षो के दौरान स्थिति खराब हुई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के पूर्व महासचिव एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहन प्रकाश ने कहा कि कांग्रेस की विरासत को नई पीढ़ी समझे। यह गाँधी और नेहरू का रास्ता है, जिस पर अडिग रहकर देश मजबूत बनाना है, लेकिन भाजपा की विरासत कमजोर है और मोदी सरकार में देश में किसानों, युवाओं और दलितों पर अत्याचार बढ़े है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट कहा कि आज सत्ता में ऐसे लोग बैठे है जिनके राज में लोकतंत्र एवं संविधान दोनों खतरे में है। इतिहास में पहली बार उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा सरकार के $िखलाफ़ जो कदम उठाया गया था वह इस बात का संकेत है कि सत्ताधारी भाजपा न तो लोकतंत्र में विश्वास रखती है और न ही भारतीय संविधान का सम्मान करती है।

उन्होंने कहा कि आश्चर्य है कि जिस लोकतंत्र एवं भारतीय संविधान की मिसाल पूरे विश्व में दी जाती है, उसकी अपने ही देश में आज स्थिति यह हो गयी है कि स्वयं भारतीय नागरिकों को लगने लगा है कि लोकतंत्र और संविधान सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है और हारने वालों की भी विपक्ष के रूप में अहम भूमिका होती है लेकिन आज एक ऐसी पार्टी सत्ता में आकर बैठ गयी है, जो खुले आम भारत को विपक्ष मुक्त करने का दावा करती है। उन्होंने कहा कि जनता भाजपा का असली चेहरा पहचान चुकी है और आगामी विधानसभा चुनाव में इस जनविरोधी भाजपा सरकार को वह उखाड़ फेंकेगी।

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