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रिलायंस कम्युनिकेशंस दिवालिया घोषित

नई दिल्ली 13 मई 2019 । अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) की दिवालिया प्रक्रिया आखिरकार घोषित हो गई है. नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) द्वारा रिलायंस कम्युनिकेशंस बोर्ड को भंग कर दिया है. इस पर NCLT ने अपना अधिकार कर लिया है. रिलायंस कम्युनिकेशंस पर करीब 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है.

आपको बता दें की NCLT ने गुरुवार को अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस को इनसॉल्वेंसी के लिए भेजने की बात स्वीकार कर ली. हालांकि, आरकॉम ने अपना बचाव के लिए तर्क देते हुए दिवालिया प्रक्रिया में 357 दिनों की छूट मांगी थी, क्योंकि मुकदमेबाजी में इतने दिन खर्च हो गए हैं.

NCLT ने कंपनी के बोर्ड को अपने हाथ में लेते हुए इसके लिए एक नया रेजोल्युशन प्रोफेशनल नियुक्त कर दिया. नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल ने एसबीआई के नेतृत्व वाले 31 बैंकों के कंसोर्शियम को इस बात की भी इजाजत दी कि वह कर्ज देने वालों की एक कमिटी बनाए. इस निर्णय को वीपी सिंह और आर दुरईसामी की बेंच ने लिया है.

उल्लेखनीय है की टेलीकॉम सेक्टर में छिड़े जबरदस्त टैरिफ वार के बाद RCom को भारी नुकसान झेलना पड़ा था. जबरदस्त प्रतिस्पर्धा के दौर में फ्री कॉल्स और बेहद सस्ता डेटा होने के बाद RCom के लिए कर्ज़ से उबर पाना मुश्किल हो गया और कंपनी दौड़ से जल्द ही बाहर हो गई और कर्ज में फंसी आरकॉम को करीब 3 साल पहले अपना कामकाज बंद करना पड़ा था.

अनिल अंबानी का सबसे बुरा दौर आना है बाकी, आखिरी कश्ती में भी हो रहा छेद

नई दिल्ली। बीते कुछ सालों में एक ओर जहां बड़े भाई मुकेश अंबानी लगातार तरक्की करते जा रहे हैं। वहीं छोटे भाई अनिल अंबानी की हालत खराब होती जा रही है। बड़े भाई मुकेश अंबानी ने एक दो बार अनिल अंबानी की मुश्किलें कम करनी भी चाही, लेकिन हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया। लेकिन मुकेश अंबानी के आगे आने से लोगों को लगा कि अब छोटे भाई की गाड़ी पटरी पर आ जाएगी। अगर आप भी सोच रहे है कि अनिल की मुश्किलें कम हो जाएंगी तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। उल्टा अनिल की आखिरी किश्ती में भी छेद होने लगा है।

दिवालिया के कगार पर आरकॉम

पहले ही मुसीबतें झेल रही अनिल अंबानी की टेलीकॉम कंपनी रिलायंस कम्यूनिकेशन (आरकॉम) के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई औपचारिक रूप से शुरू हो गई। अनिल अंबानी की आरकॉम पर 31 बैंकों का करीब 50,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। आरकॉम ने सबसे अधिक कर्ज भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से लिया है। रिलायंस ने रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल का चयन करने के लिए तीन मई को बैठक भी की थी। एनसीएलटी की मुंबई बेंच में अगली सुनवाई 30 मई को होगी। कर्ज में डूबी आरकॉम का ऑपरेशन दो साल पहले ही बंद हो गया था।

आखिरी किश्ती में भी हो रहा छेद

ये तो हुई अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम की बात, अब बात करते हैं अनिल अंबानी की इकलौती सुरक्षित कंपनी रिलायंस कैपिटल की। अनिल अंबानी के आखिरी सुरक्षित एसेट रिलायंस कैपिटल में भी अब धीरे-धीरे गिरावट हो रही है और इसने अपनी नियोजित 2 बिलियन डॉलर के एसेट की बिक्री की तैयारियां करनी शुरू कर दी हैं।

केवल 11 करोड़ का कैश रिजर्व

हालत यह हो गई है कि अनिल अंबानी के ग्रुप की सबसे सुरक्षित माने जाने कंपनी के पास अब केवल 11 करोड़ का ही कैश रिजर्व रह गया है। और जो मौजूदा हालात पूरे ग्रुप की अभी है ऐसे में गिरते हुए मार्केट कैपिटल को देखते हुए दूर दूर तक कोई सुधार की उम्मीद नही दिख रही है।

12 महीने में 76 फीसदी गिरा मार्केट कैप

अनिल अंबनी ग्रुप की कंपनी रिलायंस निपॉन को छोड़ दिया जाए तो ग्रुप का कुल मार्केट कैप बीते एक साल में 76 फीसदी तक गिर चुका है। यहां गौर करने वाली बात है कि ग्रुप की इस हालत की जिम्मेदार आरकॉम, आरपावर, आरइन्फ्रा और रिलायंस नवल ऐंड इंजीनियरिंग है। आपको बता दें कि ये चार कंपनियां ग्रुप के 60 फीसदी कर्जे के लिए जिम्मेदार हैं।

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