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चुनाव आयोग के निर्देश पर एक और कलेक्‍टर को हटाया

भोपाल 27 अक्टूबर 2018 । मतदाता सूची में गड़बड़ियों पर चुनाव आयोग ने अब अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। भिंड के बाद सतना कलेक्टर मुकेश कुमार शुक्ला को हटा दिया।

सतना में रामनगर तहसील में 73 मतदाताओं के नाम बिना आवेदन के सूची में जोड़ दिए गए थे। इस मामले में तीन दिन पहले रामनगर के नायब तहसीलदार अंबिका प्रसाद पांडेय को निलंबित किया गया है। शुक्ला की जगह 2005 बैच के अफसर राहुल जैन को कलेक्टर बनाया है।

वहीं, शुक्ला को मंत्रालय में अपर सचिव बनाया गया है। वहीं, चाचौड़ा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक ममता मीना के पति आरएस मीना को भी गुना से हटा दिया। वे 26वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल गुना में सेनानी के पद पर पदस्थ थे।

सूत्रों के मुताबिक सतना की मतदाता सूची काफी दिनों से विवादों में है। प्राइवेट वेंडरों द्वारा मतदाताओं का डाटा ले जाकर दिल्ली और जयपुर में मतदाता परिचय पत्र बनाने की शिकायत आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने चुनाव आयोग में की थी। इस मामले में मतदाता सूची का काम करने वाली एजेंसियों की जांच रिपोर्ट मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने मांगी थी।

वहीं, रामनगर तहसील में 73 मतदाताओं के नाम बिना आवेदन के अंतिम मतदाता सूची में जोड़ने का मामला सामने आया था। जांच में यह बात प्रमाणित भी हो गई। इस पर नायब तहसीलदार अंबिका प्रसाद पांडेय को तीन दिन पहले निलंबित कर दिया। इसके अलावा शुक्ला के खिलाफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा को लेकर भी आरोप थे।

रामनगर नगर परिषद के सीएमओ ब्रह्मानंद शुक्ला ने कलेक्टर को पत्र लिखकर यात्रा में हुए खर्च के भुगतान की अनुमति मांगी थी। शुक्ला की जगह संचालक नगर तथा ग्राम निवेश राहुल जैन को पदस्थ किया है। जैन का प्रभार आयुक्त नगरीय विकास गुलशन बामरा देखेंगे। आरएस मीना को छठवीं वाहिनी जबलपुर में सेनानी बनाया गया है। छठवीं वाहिनी के सेनानी ललित शाक्यवार को सहायक पुलिस महानिरीक्षक पुलिस मुख्यालय और एमएल सोलंकी को गुना में 26वीं वाहिनी का सेनानी बनाया गया है।

नगर एवं ग्राम निवेश सहायक संचालक के घर से 19 लाख जप्त

होशंगाबाद में पेट्रोल पंप के लिए जमीन की एनओसी देने के मामले में लोकायुक्त पुलिस द्वारा 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़े गए नगर एवं ग्राम निवेश के सहायक संचालक सुदीश कुमार राय के घर शुक्रवार को 19 लाख 37 हजार रुपए नकद मिले। सहायक संचालक का एक बैंक लॉकर भी है जिसकी कार्रवाई जारी है।

होशंगाबाद के एक ठेकेदार हरिशंकर शर्मा पेट्रोल पंप खोल रहे हैं जिसके लिए नगर एवं ग्राम निवेश से जमीन की एनओसी की आवश्यकता थी। इसके लिए सहायक संचालक राय ने हरिशंकर से रिश्वत की मांग की थी।

गुरुवार की रात को राय ने साउथ टीटीनगर स्थित एक कैफे में ठेकेदार को बुलाया था। लोकायुक्त पुलिस ने हरिशंकर शर्मा की शिकायत पर सहायक संचालक को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया है।

नगर एवं ग्राम निवेश के सहायक संचालक राय के घर शुक्रवार को लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 19 लाख 37 हजार रुपए की नकदी और एक डुप्लेक्स के दस्तावेज मिले। साथ ही लोकायुक्त पुलिस को तीन गाड़ियों की रजिस्ट्री मिली हैं। राय का एक बैंक लॉकर मिला है जिसे शुक्रवार को खोला गया है। बैंक लॉकर में मिले कीमती सामान का मूल्यांकन किया जा रहा है।

दो जिलों के आरटीओ को हटाया

भोपाल। चुनाव संबंधी शिकायतों के चलते ग्वालियर और सिंगरौली के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को हटा दिया। दोनों को परिवहन आयुक्त कार्यालय में पदस्थ किया है।

आयोग के निर्देश्‍ा पर इंदौर, रीवा, सतना, कटनी और भोपाल के बाबुओं के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि परिवहन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को लेकर शिकायतें हुई थी। शिकायतों के परीक्षण के बाद चुनाव आयोग के निर्देश पर ग्वालियर के आरटीओ एमपी सिंह और सिंगरौली के आरटीओ एसपी दुबे को मैदानी पदस्थापना से हटाकर मुख्यालय में अटैच कर दिया है।वहीं, इंदौर परिवहन कार्यालय के बाबू आरडी माहोर, विष्णु राय और धर्मेंद्र डावोर को हटा दिया। भोपाल में रूपा चौपड़ा, सतना में शिवेंद्र सिंह, कटनी में जितेंद्र सिंह और रीवा में ललित शुक्ला के खिलाफ कार्रवाई की गई है।रेल टिकट में प्रधानमंत्री की फोटो और केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रचार से जुड़े विज्ञापन हटा लिए गए हैं। यह जानकारी चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को दी है। दरअसल, इस मुद्दे को लेकर शिकायत हुई थी, जिस पर सीईओ ऑफिस ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था।

शिवराजसिंह बतायें कि जनआशीर्वाद यात्रा में बचे 43 विधानसभा क्षेत्रों की जनता के आशीर्वाद की उन्हें क्या जरूरत नहीं बची…

प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि शिवराजसिंह चुनावी व्यस्तता के बहाने से बची ‘‘जन आशीर्वाद यात्रा’’ नहीं ‘‘जबरन आशीर्वाद यात्रा’’ कैंसिल कर 31 अक्टूबर से भोजपुर से जनादेश यात्रा शुरू कर रहे हैं। उन्हें जनादेश तो कुशासन से त्रस्त और गुस्साई जनता 28 नवंबर को बिदा करके देगी। किस बात की जनादेश यात्रा? शिवराजसिंह की यह जनादेश यात्रा न होकर वास्तव मंे बिदायी यात्रा होगी, जिसे उन्होंने स्वयं भांप लिया है। जिस पर मोहर प्रदेश की जनता 28 नवंबर को लगा देगी।

कमलनाथ ने कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान ने अपनी जन आशीर्वाद यात्रा मंे 187 विधानसभा क्षेत्रों मेें जाकर जनता से आशीर्वाद लेने के नाम पर जबरन आशीर्वाद यात्रा निकाली, लेकिन 43 विधानसभा क्षेत्र की जनता से बिना आशीर्वाद लिये चुनावी व्यस्तताओं का बहाना बनाकर यात्रा बीच में ही यात्रा बंद कर दी और अब जन आशीर्वाद यात्रा निरस्त कर जनादेश यात्रा निकाल रहे हैं। अब उनकी चुनावी व्यस्ततायें कहां गईं? क्या चुनावी व्यस्तताओं की आड़ में सिर्फ यात्रा का नाम बदलना मकसद था? क्या यहां की जनता को वे अपना दुश्मन मानते हैं? क्या उन्हें यहां की जनता के आशर्वीद की आवश्यकता नहीं थी? यदि शिवराज इन क्षेत्रों में भी अपनी जबरन आशीर्वाद यात्रा ले जाते तो किसान उनसे सिर्फ इतनी ही तो मांग करते कि हमंे सोयाबीन की फसल की पूरी कीमत दिला दो। हमें भावांतर का पैसा कब मिलेगा? हमारा मंूग, उड़द और मक्का क्यों नहीं खरीदा जा रहा? रबी की फसल के लिये हम लोगों को असली खाद और बीज दिलवा दो।

नाथ ने कहा कि बेरोजगार भी यही तो पूछते कि मामाजी हमें रोजगार कब तक मिलेगा? इन्वेस्टर्स मीट में आपने जिन बड़ी-बड़ी कंपनियों और फेक्ट्रियां लगाने की जो घोषणाऐं की थीं, वो कब लगेंगी? हम सभी युवा ढूंढ रहे हैं कि आपकी घोषणा के अनुरूप चीन, जापान, अमेरिका, इंगलैण्ड, दक्षिण कोरिया की कंपनियां कहां हैं? उन्होंने कहा कि शिवराजसिंह को उनके सामने जादू बताकर सिर्फ नया आश्वासन ही तो देना था, वे उनसे डर क्यों गये? अपने यहां की सड़कें बताकर जनता सिर्फ इतना ही तो पूछती कि क्या ये अमेरिका से अच्छी हैं? क्या अमेरिका में भी ऐसी ही सड़कें रहती हैं?

कमलनाथ ने कहा कि शिवराजसिंह को जनादेश तो चुनाव में अब जनता देगी। शिवराजसिंह ने स्वयं परिस्थितियों को भांप लिया है। जनआशीर्वाद यात्रा का नाम बदलकर जनादेश यात्रा निकालकर वे भ्रम पैदा कर रहे हैं और स्चयं को ही धोखा दे रहे हैं। तमाम कर्मचारी जिन्होंने अपनी मांगों को लेकर अपना मुण्डन करवाया, सरकार का श्राद्ध किया, यहां तक की महिला कर्मचारियों, शिक्षकों तक ने अपना मुंडन करवाया। दिव्यांगों को पीटा गया, किसानों पर गोली चलाई, धर्मप्राण जनता का राम रथ थाने में खड़ा करवाया गया, साढ़े चार लाख पेंशनरों की पेंशन का दो-दो बार का एरियर्स खो हो गया, ढाई लाख संविदा कर्मियों को नियमितीकरण का ठंेगा दिखाया गया, अवैध उत्खनन रोकने गये कर्मचारियों को पीटा गया और उनकी हत्या तक हो गयी। ये सबके-सब पीड़ित वर्ग अब आगामी 28 नवंबर को चुनाव के दिन शिवराजसिंह को जनादेश देंगे। शिवराजसिंह को मतदान का इंतजार करना चाहिये, न कि जनादेश के पहले ही जनादेश यात्रा निकालकर हंसी का पात्र बनना चाहिये। यदि निकालना ही है, तो इस यात्रा का नाम बिदायी यात्रा रखकर निकालें।

– सवाल नंबर सात –
स्कूली शिक्षा को क्यों पहुँचाया गंभीर आघात ?

प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ ने शिवराजसिंह से ‘‘चालीस दिन-चालीस सवाल’’ पूछने की कड़ी में बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर स्कूलों में बिजली का न होना, लाइब्रेरीविहीन स्कूल, शिक्षकों की कमी, खेल मैदान का न होना, कक्षांे की कमी, लाखों बच्चों का बीच में स्कूल छोड़ देना, सर्व शिक्षा अभियान आदि पर केंद्रित वस्तुस्थिति बताते हुए स्वर्णिम से समृद्ध मध्यप्रदेश को लेकर आज सातवां सवाल पूछा। सवाल इस प्रकार है:-

(1) मध्यप्रदेश के प्राथमिक ,माध्यमिक और उच्चत्तर माध्यमिक ,कुल 150762 स्कूलों में से 1 लाख़ 6 हज़ार से अधिक,अर्थात 71ः स्कूलों मे बिजली पहुँची ही नहीं है।
(2) मध्यप्रदेश के नौनिहालों की आधुनिक शिक्षा का हाल यह है कि मात्र 15.7ः स्कूलों में कंप्यूटर एजुकेशन की व्यवस्था है अर्थात राज्य के 1.22 लाख़ स्कूलों में आज भी कम्प्यूटर शिक्षा नहीं है।
(3) मध्यप्रदेश के सिर्फ़ 15.6ः माध्यमिक स्कूलों में और मात्र 19ः उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में लाइब्रेरी की व्यवस्था है। सरकारी स्कूलों में तो यह नगण्य है।
(4) केंद्र की डाईस-2017 रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में 19 हज़ार स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे चलते हैं।
(5) 14.6 हज़ार स्कूलों में बारिश के दिनों में पहुँच का रास्ता ही नहीं रहता,यानी इन स्कूलों में बच्चे पढ़ने ही नहीं जा पाते।
6) राज्य में 46.6 हजार स्कूलों में अब भी नहीं बन पाया बच्चों के लिए खेल मैदान।प्रदेश के 93 हजार से अधिक स्कूलों में आज भी दिव्यांग बच्चों के लिये नहीं बन पाया है रैंप।
(7) आज भी मप्र के 4451 स्कूलों में सिर्फ़ एक ही कमरा है। यानी चार से आठ वर्ग के बच्चे एक ही रूम में पढ़ते हैं।
( 8) कक्षा 1से5 तक की स्कूली शिक्षा के दौरान ही एक साल मे 3.57लाख बच्चों को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है।कक्षा 6से8 तक की स्कूली शिक्षा के दौरान ही 1 साल में 3.42लाख बच्चो को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है।
(9) कुल मिलाकर कक्षा 1 से 8 तक 1 साल मे 7.17 लाख बच्चों को शिक्षा छोड़ देनी पड़ती है।
10) कंट्रोलर आॅडिटर जनरल की रिपोर्ट बताती है कि 2010 से 2016 तक माध्यमिक शिक्षा अर्थात आठवीं तक के 42 लाख़ 46 हज़ार बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया।
11) सर्व शिक्षा अभियान के तहत 1 से 8 वीं तक मुफ़्त किताबें बाँटे जाने का प्रावधान है ।
10) कंट्रोलर ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट बताती है कि 2010 से 2016 तक माध्यमिक शिक्षा अर्थात आठवीं तक के 42 लाख़ 46 हज़ार बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया ।
11) सर्व शिक्षा अभियान के तहत 1 से 8 वीं तक मुफ़्त किताबें बाँटे जाने का प्रावधान है। कैग ने अपनी 2017 की रिपोर्ट में बताया कि 2010 से 2016 तक 42 लाख़ 88 हज़ार किताबें बाँटी ही नहीं गईं ।
12) कैग की 2017 की रिपोर्ट बताती है कि मध्यप्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में 63 हज़ार 851 शिक्षकों की कमी है।
13) सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक़ सरकार ने स्कूल शिक्षा के लिए आवंटित कुल बजट में से 2011-2016 के बीच 7284.61 करोड़ रुपए (आवंटन का 31 प्रतिशत) जारी ही नहीं किये। सरकार बच्चों के शिक्षा के अधिकार के हनन में सबसे बड़ी अपराधी रही ।
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