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रिजर्व बैंक में उलटफेर से बढ़ेगी मोदी सरकार की परेशानी

नई दिल्ली 25 जून 2019 । रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में एक बार फिर बड़ा उलटफेर सामने आया है। इससे पहले 10 दिसंबर 2018 को तत्कालीन आरबीआई गवर्नर ने अपना कार्यकाल पूरा होने के नौ महीने पहले ही इस्तीफा दे दिया था। उर्जित पटेल ने केंद्र सरकार के साथ विवादों के कारण इस्तीफा दिया था। अब आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने भी अपना कार्यकाल पूरा होने के छह माह पहले ही इस्तीफा दे दिया है। आरबीआई के वरिष्ठ पदों पर कार्यकाल बीच में छोड़कर अधिकारियों के जाने से अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है। एेसे में आर्थिक मोर्चे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की परेशानी बढ़ सकती है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने अपना कार्यकाल पूरा होने से छह माह पहले इस्तीफा देकर केंद्र सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। विरल आचार्य रिजर्व बैंक के फाइनेंशियल स्टेबिलिटी यूनिट, मॉनेटरी पॉलिसी डिपार्टमेंट, डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च, फाइनेंशियल मार्केट ऑपरेशन डिपार्टमेंट और फाइनेंशियल मार्केट रेग्युलेशन डिपार्टमेंट के इंचार्ज थे। उन्होंने 23 जनवरी 2017 को रिजर्व बैंक ज्वाइन किया था और उनका कार्यकाल जनवरी 2020 में पूरा होने वाला था। विरल आचार्य इससे पहले रिजर्व बैंक की स्वायत्तता का मुद्दा उठाकर भी सुर्खियों में आए थे। अब उनके इस्तीफे का कारण भी सरकार से सामंजस्य नहीं बैठना बताया जा रहा है।

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर पद से विरल आचार्य के इस्तीफे के बाद रिजर्व बैंक में तीन अन्य डिप्टी गवर्नर हैं। इसमें एनएस विश्वनाथन, बीपी कानूनगो और एम के जैन शामिल हैं। एनएस विश्वनाथन का कार्यकाल भी जुलाई के पहले हफ्ते में पूरा हो रहा है। लेकिन संभावना है कि उनका कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।

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