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नये वाहन क्रय तथा नये वर्ष के कलेण्‍डर-डायरी मुद्रण पर लगाया प्रतिबंध

नई दिल्ली 30 दिसंबर 2018 । मध्‍यप्रदेश में नई सरकार के सामने अपने वचन पत्र की पूर्ति के लिए वित्‍तीय संकट गहराया हुआ है। किसानों की कर्ज माफी की घोषणा और आते ही कर्ज माफी की घोषणा के बाद अब सरकार को उसके लिए संसाधन जुटाने की चुनौती है। वित्‍तीय संकट से निपटने के लिए राज्‍य सरकार के वित्‍त विभाग ने सबसे पहले खर्चों में मितव्‍ययता का निर्णय लिया है। इस संबंध में वित्‍त विभाग ने 28 दिसम्‍बर को देर शाम परिपत्र जारी कर दिया है।

वित्‍त विभाग ने नई वाहनों के क्रय, नये वर्ष में राजस्‍व विभाग को छोड़ सभी निगम-मण्‍डलों, विभागों के कलेण्‍डर एवं डायरी के मु्द्रण पर रोक लगा दी हैं। वर्ष 2018-19 के बाकि बचे समय के लिए भुगतानों की सीमा भी तय की गयी है। मुख्यमंत्री कमल नाथ के निर्देश पर वित्त विभाग ने विभिन्न खर्चों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी आदेश जारी कर दिये हैं। प्रदेश में अब नवीन वाहनों की खरीदी पर इस वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही एयरकण्डीशनर समेत अन्य विलासिता संबंधी उपकरणों की खरीदी पर भी रोक लगा दी गई है।

वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश में राजस्व विभाग (शासकीय मुद्रणालय) को छोड़कर अन्य विभागों, निगम, मण्डलों आदि द्वारा वर्ष 2019 के लिये डायरी, कैलेण्डर के मुद्रण पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसी के साथ, कार्यालयों की मरम्मत, संधारण, कार्यालयीन सामग्री और अन्य कार्यों पर वित्तीय नियंत्रण रखने के लिये खर्चे की सीमा तय की गई है। वर्ष 2018-19 का इन मदों/कार्यों के लिये आवंटित बजट अथवा वर्ष 2017-18 में इन मदों/कार्यों पर हुए व्यय में से, जो भी कम है, उसे खर्चे की सीमा के रूप में निर्धारित किया गया है। खर्चे की यह सीमा कार्यालयीन फर्नीचर, पुस्तकें, पत्रिकाएँ और लेखन सामग्री की खरीदी, आतिथ्य व्यय, मुद्रण एवं प्रकाशन, कंसल्टेंसी सर्विसेस, विशेष सेवाओं के लिये मानदेय, सुरक्षा, सफाई, परिवहन व्यवस्था, मशीन और उपकरणों का संधारण, वाहन संधारण, फर्नीचर संधारण आदि के लिये निर्धारित की गई है।

प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे अस्पताल, आंगनवाड़ी, आश्रम विद्यालय

राज्य सरकार ने आवश्यक श्रेणी में व्ययों को प्रतिबंध से छूट प्रदान की है। विदेशी सहायता प्राप्त परियोजनाएँ, केन्द्रीय क्षेत्रीय योजनाएँ और प्राप्त केन्द्रीय अनुदान को प्रतिबंध से छूट दी गई है। इसके साथ ही, छात्रावास, आश्रम विद्यालय, अस्पताल, जेल, पशु चिकित्सालय और आँगनवाड़ी में लगने वाली आवश्यक दवाइयाँ और खास सामग्री की पूर्ति मद में भी व्यय सीमा में प्रतिबंध की छूट रहेगी। राज्य शासन ने अस्पतालों में उपचार कार्य में उपयोग में आने वाली सामग्री लिनिन, गॉज, बैण्डेज और अन्य सामग्री की खरीदी पर भी छूट प्रदान की है।

सर्वधर्म समभाव को बढ़ावा देने के लिये नया अध्यात्म विभाग गठित
मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने वचन-पत्र के संकल्पानुसार नवीन अध्यात्म विभाग के गठन का निर्णय लिया है। नये विभाग में धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा आनंद विभाग संविलियित रहेंगे। साथ ही अभी तक कार्यरत धार्मिक न्यास तथा धर्मस्व संचालनालय, तीर्थ एवं मेला प्राधिकरण, मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना संचालनालय और राज्य आनंद संस्थान समाहित रहेंगे।

सर्वधर्म समभाव के लिये बनेगा नया विभाग

अध्यात्म विभाग के गठन का उद्देश्य सभी धर्मों, पंथों और आस्थाओं को समाहित करते हुए प्रदेश में अंतर साम्प्रदायिक सद्भाव और सर्वधर्म समभाव को मजबूत करना है। अमेरिका, इंग्लैण्ड, अर्जेंटीना, अफगानिस्तान, अल्जीरिया, बांग्लादेश, ब्रूनेई, म्यांमार, ट्यूनीशिया, इण्डोनेशिया, डेनमार्क आदि अनेक देश में विभिन्न नाम से अध्यात्मिक मामलों का विभाग कार्यरत है।

धार्मिक न्यास और धर्मस्व एवं आनंद विभाग के कार्य लगभग समान

धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा शासन संधारित मंदिरों का जीर्णोद्धार, पुजारियों को मानदेय, धर्मशाला निर्माण, धार्मिक स्थलों की यात्रा, तीर्थ एवं मेला विकास के कार्य किये जाते हैं। आनंद विभाग का उद्देश्य भी नागरिकों की खुशहाली एवं परिपूर्ण जीवन उपलब्ध कराना है। यह उद्देश्य भी प्रस्तावित अध्यात्म विभाग में अपने आप ही समाहित होगा। अध्यात्म धर्म का विरोधी नहीं है, बल्कि यह एक दिव्य और सार्वभौम चेतना के अनुभव पर बल देता है। विकसित देशों के विभिन्न अस्पतालों में भी डिपार्टमेंट ऑफ स्पिरिचुअल केयर होता है।

अध्यात्म विभाग के उद्देश्य

प्रस्तावित अध्यात्म विभाग के उद्देश्यों में सभी समुदायों में एक कॉमन विजन और अपनत्व बोध का विकास, विभिन्न पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के लोगों की विविधता का सम्मान करते हुए उनमें आपसी समझ और सौहार्द का विकास, जिम्मेदार नागरिक का विकास, भ्रूण हत्या, स्वच्छता मिशन और साम्प्रदायिक तनावों के समय शांति स्थापना, गौ-वंश संरक्षण जैसे विषयों में विभिन्न धर्मगुरुओं के माध्यम से प्रेरणा संचार, संत शक्ति का रचनात्मक उपयोग, लोक न्यास, औकाफ, धार्मिक मेलों, तीर्थों, तीर्थ-यात्राओं आदि का उचित प्रबंधन, आनंद की अवधारणा का नियोजन, नीति निर्धारण और क्रियान्वयन शामिल हैं।

अध्यात्म विभाग के प्रमुख कार्य

प्रस्तावित अध्यात्म विभाग के प्रमुख कार्यों में भारत एवं मध्यप्रदेश के कम्पोजिट कल्चर के विकास के लिये सतत प्रयास, प्रदेश के सभी समुदायों के बीच शांति और मैत्रीपूर्ण सह अस्तित्व की भावना का विकास, देश-प्रदेश के महत्वपूर्ण सामाजिक एवं नागरिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में विभिन्न धर्मों की संत शक्ति का उपयोग, शासकीय देव स्थानों की चल-अचल सम्पत्तियों का सुव्यवस्थित संधारण और धर्म-स्थानों का विकास तथा संरक्षण, उपासना स्थलों की सम्पदा का वैज्ञानिक मूल्यांकन, उपासना स्थलों की सामाजिक-सांस्कृतिक उपस्थिति को विकसित करना, धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिये पर्यटन विभाग से समन्वय, पुजारी, सेवादार, मुजाबिर आदि के लिये मानदेय की व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं का निर्माण, धार्मिक एवं पूर्व न्यासों का प्रशासन, उद्यानिकी विभाग के सहयोग से मंदिर उद्यान और ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से मंदिर सरोवरों का पुनरुद्धार, माँ नर्मदा न्यास अधिनियम आदि विभिन्न विधिक व्यवस्थाओं का विकास एवं प्रवर्तन शामिल हैं।

ताप्ती, मंदाकिनी और क्षिप्रा नदी न्यास का भी होगा गठन

साथ ही सूर्यपुत्री माँ ताप्ती नदी, माँ मंदाकिनी नदी और माँ क्षिप्रा नदी न्यास के गठन की कार्यवाही भी होगी। प्रदेश की पवित्र नदियों को जीवित इकाई बनाने के लिये कानून बनेगा। शासकीय एवं ऐतिहासिक धर्मस्थानों के संधारण के लिये विशेष पैकेज, रामपथ गमन के प्रदेश में पड़ने वाले अंचलों का विकास, धार्मिक स्थलों पर लगने वाले मेला आयोजन स्थल पर भीड़ एवं सुरक्षा प्रबंधन, धर्मस्थलों की सम्पत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिये राजस्व एवं नगरीय प्रशासन विभाग का समन्वय, प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर चिन्हित तीर्थ-स्थलों की यात्रा एवं प्रबंधन, आनंद मापन के मानदण्ड एवं कार्यक्रमों की पहचान, आनंद का प्रसार बढ़ाने के लिये विभिन्न विभाग के बीच समन्वय और आनंद विषय पर एक ज्ञान संसाधन केन्द्र की तरह कार्य करना शामिल है।

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