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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा: आरक्षण कोई समस्या नहीं है,लेकिन आरक्षण को लेकर राजनीति समस्या है

नई दिल्ली 20 सितम्बर 2018 । आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अवैध और अनुचित तरीके से धर्मांतरण गलत है। तीन दिवसीय सम्मेलन के आखिरी दिन सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-ए को स्वीकार नहीं करता है। ये अनुच्छेद जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देते हैं।

उन्होंने राज्य के अधिक विकास की वकालत की। यह राज्य के लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिये जरूरी है।

एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि हिंदुत्व के खिलाफ कोई गुस्सा नहीं है और इसकी स्वीकार्यता दुनियाभर में बढ़ रही है।

महिलाओं की सुरक्षा और बलात्कार की बढ़ती घटनाओं से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि हमें ऐसा माहौल बनाना होगा जहां महिलाएं सुरक्षित महसूस करें। उन्होंने कहा कि पुरुषों को महिलाओं का सम्मान करना सीखना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि एलजीबीटीक्यू समुदाय को अलग-थलग नहीं किया जाना चाहिये क्योंकि वे समाज का हिस्सा हैं। साथ ही समलैंगिकों के अधिकार ही एकमात्र ज्वलंत मुद्दा नहीं है जिसपर चर्चा की जानी चाहिये।

भागवत ने कहा कि समय बदल रहा है और समाज को ऐसे मुद्दों पर फैसला करना चाहिये

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मन्दिर का शीघ्र निर्माण होना चाहिए।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, ‘‘राम मन्दिर का निर्माण यथाशीघ्र होना चाहिए।’’

उन्होंने इस मुद्दे पर वार्ता का समर्थन किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय राम मन्दिर समिति को करना है जो राम मन्दिर के निर्माण के लिए अभियान की अगुवाई कर रही है।

संघ प्रमुख ने कहा कि उन्हें यह नहीं मालूम कि राम मंदिर के लिए अध्यादेश जारी किया जा सकता है क्योंकि वह सरकार के अंग नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि क्या अध्यादेश जारी किया जा सकता है और इसे कानूनी चुनौती मिल सकती है..ऐसे मुद्दों पर विचार किया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आज दो टूक शब्दों में कहा कि देश में सामाजिक आधार पर आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक आरक्षण प्राप्त समुदाय ना कह दे कि उन्हें इसकी आवश्यकता नहीं है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने यहां विज्ञान भवन में ‘भविष्य का भारत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण’ विषय पर अपनी व्याख्यानमाला के तीसरे एवं अंतिम दिन प्रश्नों के उत्तर देते हुए कहा, “सामाजिक विषमता को दूर करने के लिए संविधान सम्मत सब प्रकार के आरक्षण का संघ पूरा समर्थन करता है। आरक्षण कब तक चलेगा, इसका निर्णय वही करेंगे जिनके लिए दिया गया है।”

उन्होंने कहा कि क्रीमी लेयर को हटाने या अन्य जातियों को जोड़ने के बारे में विभिन्न आयोग निर्णय करें। संविधान ने पीठ स्थापित कीं हैं उनमें इसका निराकरण हो सकता है।

एक सवाल पर उन्होंने कहा कि आरक्षण कोई समस्या नहीं है लेकिन आरक्षण को लेकर राजनीति समस्या है। समाज एक अंग पंगु हो गया है तो उसे ठीक करके बाकी अंगों के समान स्वस्थ बनाना होगा।

श्री भागवत ने कहा, “सामाजिक कारणो से हजारों वर्षों से यह स्थिति है कि हमारे समाज के एक अंग हमने निर्बल बना दिया है, हजार वर्षों की बीमारी ठीक करने में यदि 100-150 साल हमें नीचे झुक कर रहना पड़ता है तो यह महंगा सौदा नही है, यह हमारा कर्तव्य है।”

अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार कानून के दुरुपयोग को लेकर देश के कुछ भागों में आंदोलन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सामाजिक पिछड़ेपन के कारण स्वाभाविक रूप से अत्याचार होते हैं और उससे निपटने के लिए कानून बनते हैं। उन कानूनों को ठीक प्रकार से लागू किया जाये और उसका दुरुपयोग नहीं होने दिया जाये।

उन्होंने कहा कि अत्याचार को सदभावना जागृत करके लागू किया जाये।

जाति व्यवस्था को लेकर पूछे गये सवालों के जवाब में सरसंघ चालक ने कहा कि आज जो है वह जाति अव्यवस्था है और उसे समाप्त होना है। लेकिन हमें उसके स्थान पर क्या होना चाहिए, उस पर ध्यान देना चाहिए। अंधेरे को लाठी मार कर नहीं भगाया जा सकता। एक दीपक जला देने से अंधेरा दूर हो जाता है। उन्होंने कहा कि समाज से सामाजिक विषमता का पोषण करने वाली बातें दूर होनी चाहिए। ऐसा करना कठिन कार्य है।

श्री भागवत ने कहा कि ऐसा अगर कोटा प्रणाली से किया जाएगा तो नहीं होगा। सहज प्रक्रिया से होगा तो एक निश्चित समय बाद स्वाभाविक रूप से हो जाएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि संघ में जाति पूछने की प्रथा शुरू से ही नहीं है। संघ में 1950 के दशक में केवल ब्राह्मणों का वर्चस्व था लेकिन बाद में हर ज़ोन में हर जाति समुदाय के लोगों का प्रतिनिधित्व बढ़ता जा रहा है और यह स्वाभाविक रीति से हो रहा है। संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी में भी ऐसा ही स्वरूप दिखने लगा है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि संघ ने घूमंतू जातियों को स्थिर करने और उनके बच्चों के शैक्षणिक एवं आर्थिक उन्नति के लिए प्रयास करना आरंभ कर दिया है।

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