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अकेली पड़ीं साध्वी प्रज्ञा ने माफी के बाद अब मौन व्रत रखने का लिया फैसला

भोपाल  21 मई 2019 । अपने बयानों से देश की सबसे बड़ी पार्टी बी जे पी को परेशानी में डालने वाली प्रज्ञा ठाकुर ने पार्टी के कड़े रूख को देखते हुए अब मौन व्रत रखने का निर्णय लिया है। उन्‍हें लगता है कि इससे पार्टी के रूख में नरमी आएगी। मध्य प्रदेश की भोपाल सीट से बीजेपी उम्‍मीदवार प्रज्ञा सिंह ने हाल ही में महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था। उनके इस बयान की न सिर्फ विपक्ष बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी निंदा की थी। अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लिखा, ‘चुनावी प्रक्रियाओं के उपरान्त अब समय है चिंतन मनन का, इस दौरान मेरे शब्दों से समस्त देशभक्तों को यदि ठेस पहुंची है तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा के अंतर्गत प्रायश्चित हेतु 21 पहर के मौन व कठोर तपस्यारत हो रही हूं। हरिः ॐ।’

एग्जिट पोल के बाद मध्य प्रदेश में उठी फ्लोर टेस्ट की मांग

लोकसभा चुनाव के नतीज भले ही अभी ना आए हों लेकिन बीजेपी ने मध्यप्रदेश में सियासी भूचाल लाने के संकेत दे दिए हैं. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने राज्यपाल को पत्र लिखकर विधानसभा सत्र बुलाने के साथ फ्लोर टेस्ट पर विचार का हवाला देकर कमलनाथ सरकार को संकट में डाल दिया है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब मध्यप्रदेश में भी हॉर्स ट्रेडिंग की सियासत शुरू होने वाली है? एग्जिट पोल से अतिउत्साहित भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने लोकसभा चुनाव के फाइनल नतीजे आने से पहले ही मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार को फ्लोर टेस्ट का चैलेंज करने की तैयारी कर ली है. गोपाल भार्गव ने विधानसभा का सत्र बुलाए जाने के लिए राज्यपाल को भेजे गए पत्र का जिक्र कर मध्य प्रदेश में नई सरकार की सियासत को तूल दे दिया है. गोपाल भार्गव का दावा है कि कांग्रेस अल्पमत की सरकार है. बीजेपी लंबे समय से कांग्रेस सरकार पर नाकाम रहने का आरोप लगाती रही है. फ्लोर टेस्ट के बहाने से बीजेपी ने एक नए सियासी गठजोड़ को तूल दे दिया है. दरअसल 6 महीने पहले जब से कांग्रेस सत्ता पर बैठी है, तभी से ही बीजेपी की नेता सरकार गिराने का दावा कर रहे हैं. इस लिस्ट में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से लेकर कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेता भी शामिल हैं. ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी मध्यप्रदेश में उठापटक करेगी तो वही कांग्रेस सरकार के संसदीय कार्य मंत्री डॉ. गोविंद सिंह बीजेपी के फ्लोर टेस्ट के लिए पूरी तरह तैयार हैं. कह रहे हैं कि बीजेपी शेखचिल्ली के सपने देख रही है. बहरहाल 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में आई भी तो 230 में से अपने 114 और बीएसपी, एसपी और अन्य विधायकों के समर्थन के जरिए जबकि बीजेपी भी कुछ ही फासले पर 109 विधायकों के साथ है. इसी फासले के चलते बीते 6 महीनों सेबीजेपी सत्ता परिवर्तन को लेकर रह-रह कर उबाल खा रही है. शायद बेसब्री से इंतजार लोकसभा चुनाव तक का हो रहा था, लेकिन नतीजों से पहले ही अब बीजेपी का शक्ति परीक्षण का ये चैलेंज कमलनाथ सरकार के लिए आने वाले वक्त में किसी सियासी तूफान से कम नहीं.

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