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सिंधिया खेमे के एक तिहाई मंत्री बनेंगे

भोपाल 24 दिसंबर 2018 । मध्यप्रदेश के मंत्रिमंडल को लेकर दिल्ली में तीन दिन से चल रही माथापच्ची का नतीजा अभी भी सामने नहीं आ पाया है, मगर यह फार्मूला लगभग तय हो गया है कि पहली बार के विधायक मंत्रिमंडल में नहीं लिए जाएंगे। वहीं, सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों की संख्या करीब एक तिहाई होगी। रविवार को नाथ की एके एंटोनी से मुलाकात हुई और सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मंत्रिमंडल के संभावित सदस्यों की सूची के साथ भेंट होने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ मंत्रिमंडल में प्रदेश के सभी दिग्गज नेताओं के समर्थकों को लिए जाने के संतुलन वाले फार्मूले पर रविवार को भी मशक्कत होती रही। दिनभर नाथ की टेलीफोन पर तमाम दिग्गज नेताओं के साथ चर्चा चली। फिर उनकी शाम को एआईसीसी के पर्यवेक्षक बनकर विधायक दल की बैठक लेने वाले एके एंटोनी से मुलाकात हुई। इसके बाद शाम को नाथ ने दोबारा नेताओं से टेलीफोन पर चर्चा की। सोमवार को मंत्रियों की सूची फाइनल करके टेलीफोन पर सभी को सूचना दे दी जाएगी।सूत्र बताते हैं कि मंत्रिमंडल में अपने समर्थकों को शामिल किए जाने को लेकर सबसे ज्यादा संवेदनशील सांसद सिंधिया दिखाई दे रहे हैं। उनके समर्थक मंत्रियों की संख्या कुल मंत्रियों का एक तिहाई होगा। साथ ही कुछ विभागों को लेकर भी नेताओं के समर्थकों के बीच बंटवारा होना है, जिसका नाम के साथ ही फैसला होने के संकेत हैं। निर्दलीय विधायकों में से प्रदीप जायसवाल और ठा. सुरेंद्र सिंह शेरा भैया को मंत्री बनाए जाने का लगभग फैसला हो चुका है।सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ विधायकों को नेताओं के समर्थकों से अलग रखकर मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का फार्मूला तैयार किया गया है। इनमें डॉ. गोविंद सिंह, केपी सिंह, आरिफ अकील, लक्ष्मण सिंह, विक्रम सिंह नातीराजा, बिसाहूलाल सिंह, विजयलक्ष्मी साधौ और सज्जन सिंह वर्मा के नाम प्रमुख हैं। राजस्थान की तरह मध्यप्रदेश में युवा विधायकों को मंत्रिमंडल में ज्यादा जगह मिलने की संभावना है और ऐसे करीब डेढ़ दर्जन मंत्री बनाए जा सकते हैं। गृह डॉ. गोविंद सिंह, परिवहन लखन घनघोरिया, नगरीय विकास सज्जन सिंह, खनिज केपी सिंह को मिलने के संकेत है।वहीं, मंत्री बनाए जाने वाले कमलनाथ समर्थकों में बाला बच्चन, हुकुम सिंह कराड़ा, लखन घनघोरिया, तरुण भनोत, दीपक सक्सेना, सिंधिया समर्थकों में प्रद्मुम्नसिंह तोमर, इमरती देवी, गोविंद सिंह राजपूत, डॉ. प्रभुराम चौधरी, तुलसीराम सिलावट, राजवर्द्धन सिंह, लाखन सिंह यादव तो दिग्विजय सिंह समर्थकों में बृजेंद्र सिंह राठौर, घनश्याम सिंह, हिना कांवरे, प्रियव्रत सिंह व सुरेंद्र सिंह बघेल के नाम नेताओं ने मंथन में लिए हैं। यही नहीं जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, ओमकार सिंह मरकाम, कमलेश्वर पटेल, सचिन यादव, हरदीप सिंह डंग, झूमा सोलंकी, पीसी शर्मा व हिना कांवरे के नाम भी चर्चा में आए हैं।

दोनों शहरी सीटों पर मिली हार को लेकर शहर कांग्रेस अध्यक्ष का बड़ा बयान, कहा प्रत्याशियों का चयन सही नहीं था,इसलिये हारी कांग्रेस

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में शहर की दोनों सीटों पर हुई कांग्रेस की करारी हार को लेकर शहर काँग्रेस अध्यक्ष महेश सोनी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि शहर की दोनों सीटों पर कांग्रेस इसलिए हारी क्योंकि प्रत्याशियों का चयन सही नहीं हुआ था।रविवार को क्षीरसागर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव गांधी भवन में शहर कांग्रेस की नई गठित की गई जम्बो कार्यकारिणी की जानकारी देने के लिए आहूत की गई प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने ये बात कही।यहाँ आपको बता दें कि हाल ही में हुये विधानसभा चुनाव में उज्जैन उत्तर और दक्षिण विधानसभा सीट से कांग्रेस ने क्रमशः राजेंद्र भारती और राजेन्द्र वशिष्ठ को टिकट दिया था और इन दोनों ही सीटों पर कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ा। शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने इस दौरान बगैर राजनीतिक लाग लपेट खुलकर अपनी बात कही।

शहर कांग्रेस अध्यक्ष महेश सोनी ने इस दौरान पुत्र मोह में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी की जनेऊ धारण करने वाले पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू पर भी निशाना साधा। उन्होंने गुड्डू को आयातित नेता करार दिया और कहा उनके बीजेपी में चले जाने से कांग्रेस को कोई नुकसान नहीं हुआ बल्कि फायदा हुआ है। गुड्डू की वजह से कांग्रेस में गुटबाजी हो गई थी उनके जाने से गुटबाजी खत्म हुई। महेश सोनी ने आरोप लगाया कि गुड्डू अपने बेटे की टिकट का सौदा कर बीजेपी में गए। हालांकि अब उन्हें समझ में आ रहा होगा,क्योंकि बीजेपी उन्हें घास डालने वाले नहीं और संघ की चड्डी पहनने से वो रहे। उन्होंने शहर कांग्रेस की जम्बो कार्यकारणी के गठन को लेकर भी सफाई दी और कहा कि संगठन को मजबूत करने और सभी नेताओं से समन्वय कर सभी समाजों और धर्मों के लोगों को कार्यकारिणी में जगह दी गई है।

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