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सिंधिया की नसीहत, कमलनाथ की फजीहत

भोपाल 18 फरवरी 2020 । प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी के चलते उसकी मुश्किलें कम होती दिखाई नहीं दे रही हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोमवार को ग्वालियर में फिर दोहराया कि वे सड़क पर उतरने वाले बयान पर कायम हैं। इससे पहले सिंधिया ने अतिथि शिक्षकों के मामले पर सड़क पर उतरने का बयान दिया था। अब सड़क पर उतरने वाले बयान मामले में काफी तूल पकड़ लिया है। सिंधिया के बयान के बाद सीएम कमलनाथ ने भी काफी तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि सिंधिया सड़क पर उतरना चाहते हैं तो उतर जाए। कमलनाथ की टिप्पणी अहंकार से भरी हुई है। प्रदेश कांग्रेस पार्टी की आपसी असमंजस के अब कई मायने निकाले जा सकते हैं। इस बयानबाजी से पार्टी की आपसी अंतर्कलह के साथ-साथ वर्चस्व की भी लड़ाई प्रदर्शित होने लगी हैं। यह बात सच है कि सिंधिया ने सरकार को आईना दिखाया है, जिसे कमलनाथ सरकार देखना नहीं चाहती है। सड़क पर उतरने वाली नसीहत के पीछे सिंधिया को सरकार को अपने वचन पत्र की याद दिलाना भर था, जो कांग्रेस के चुनाव के पहले दिये थे। अब इसमें कमलनाथ सरकार को बुरा लगने वाली क्या बात है। उन्होंने जो कुछ भी कहा वह सत्य कहा है। सिंधिया प्रदेश की राजनीति के मझे हुए और जन से जुड़े नेता हैं, उन्हें जन-जन की भावनाएं दिखती हैं। आमजनों के बीच जाते हैं। कमलनाथ सरकार जब अपने वादों पर खरी नहीं उतर रही है तो जन के बीच में पूरी पार्टी की बदनामी हो रही है। सिंधिया को यही खल रहा है। जिसके लिए ही उन्होंने सरकार के विरोध में बयान दिया। आखिर यह बयान उन्होंने स्वयं के लिए नहीं पार्टी और सरकार के हित में दिया है। अगर सीएम कमलनाथ अपनी सरकार के वादों और वचनों को निभानों में नाकामयाब हैं तो वह कमलनाथ खुद जिम्मेदार हैं। यदि वचनों को निभाने में पैसों की कमी का बहाना बनाया जा रहा है तो आईफा अवॉर्ड जैसे आयोजन के लिए सरकार के पास कहां से पैसे आ रहे हैं। आखिर इस आयोजन में भी तो करोड़ों रूपए खर्च होंगे। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को सिंधिया की और उनके बयान की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। इस बयान के पीछे बहुत बड़ा संदेश छुपा है, जो निश्चित रूप से प्रदेश सरकार से जुड़ा है। वैसे भी सिंधिया एक वरिष्ठ नेता हैं और कांग्रेस उनके और परिवार के बलिदानों को भुला नहीं सकती है। आज प्रदेश में यदि कमलनाथ सरकार चल रही है तो वह सिंधिया की बदौलत ही चल रही है। यह बात कांग्रेस का भूलनी नहीं चाहिए। यदि सिंधिया चाह लें तो एक दिन भी सरकार नहीं चल सकती है। इसलिए ज्योतिरादित्य सिंधिया की नसीहत को प्रदेश सरकार नजरअंदाज नहीं कर सकती है। यदि उन्होंने कुछ बोला है तो सोच समझ कर ही बोला है। वक्त रहते कमलनाथ सरकार को संभल जाना चाहिए नहीं तो बहुत देर हो चुकी होगी।

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की 3 सीटों पर जोर-आजमाइश

मध्य प्रदेश की सत्ता पर काबिज कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं के बीच सियासी अदावत कम होने के बजाए बढ़ती जा रही है. मुख्यमंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच शह-मात का खेल जारी है. ज्योतिरादित्य सिंधिया की राज्यसभा की राह रोकने के लिए अब प्रियंका गांधी का कार्ड खेला जा रहा है. माना जा रहा है कि प्रियंका को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजे जाने का दांव कमलनाथ गुट की ओर से चला गया है.

मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से दो सीटें विधायकों के आंकड़े के लिहाज से कांग्रेस के खाते में आ रही हैं. इन सीटों के लिए दिग्गज नेताओं के बीच जोर आजमाइश तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत अन्य कई और नेता भी इस कतार में लगे हुए हैं, जो ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह में रोड़े अटका सकते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि प्रियंका गांधी को राज्यसभा भेजने के सुझाव के पीछे कहीं ज्योतिरादित्य को पीछे रखने के लिए सियासी खेल तो नहीं खेला जा रहा है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया के सड़क पर उतरने के बयान के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी आंखे तरेर ली थीं. इसी के बाद माना जा रहा है कि सिंधिया को मध्य प्रदेश कांग्रेस में उन्हें किनारे करने की कोशिश के तहत कमलनाथ सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने सोमवार को ट्वीट कर प्रियंका गांधी को राज्यसभा भेजने की मांग की है.

सज्जन वर्मा ने लिखा है, ‘इंदिरा गांधी जी, अनुसूचित जाति जनजाति एवं महिला वर्ग के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध थीं. उन्हीं के पद चिन्हों पर प्रियंका जी चल रही हैं. जिस तरह इंदिरा जी कमलनाथ जी को मध्यप्रदेश में लाई थीं, उसी तरह अब प्रियंका गांधी जी को प्रदेश से राज्यसभा में लाने का वक्त आ गया है.’

मध्य प्रदेश से राज्यसभा की खाली होने वाली तीन सीटों में से दो कांग्रेस और एक बीजेपी के पास जाना तय है. कांग्रेस की 2 सीटों पर पहले ही दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह दावेदार हैं. लेकिन जिस तरह से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का नाम राज्यसभा के लिए चर्चा में आया है. ऐसी स्थिति में तीनों दिग्गज नेता में से किसी एक को फिलहाल सदन में जाने का मौका छोड़ना पड़ सकता है.

बता दें फिलहाल इन सीट पर दिग्विजय सिंह, प्रभात झा और सत्यनारायण जटिया राज्यसभा सदस्य हैं, जिनकी सीटें रिक्त हो रही हैं. राज्यसभा के तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में हर प्रत्याशी को कम से कम 58 वोट की जरूरत होगी. एक फरवरी 2020 की स्थिति में जौरा व आगर विधानसभा सीट रिक्त हैं. एमपी में कांग्रेस के 114 विधायक हैं तो बीजेपी के पास 107 हैं. कांग्रेस को दो बसपा व एक सपा विधायक सहित अन्य चारों निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन है. इस तरह कांग्रेस के पास 121 विधायकों का समर्थन है.

मध्य प्रदेश की आर्थिक हालत नाजुक, सुधार के लिए सीएम कमलनाथ ने योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष की मदद ली

प्रदेश की वित्तीय हालत सुधारने के लिए कमलनाथ सरकार अब फाइनेंशियल एक्सपर्ट की मदद ले रही है. भोपाल में आज मुख्यमंत्री कमलनाथ ने योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और आर्थिक सलाहकार मोंटेक सिंह अहलूवालिया के साथ बैठक की.केंद्र से फंड में कटौती और पिछले कर्ज की वजह से मध्य प्रदेश सरकार की आर्थिक हालात नाज़ुक है. इस वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए सरकार अब देश के वित्तीय एक्सपर्ट्स की मदद ले रही है. भोपाल के मिंटो हॉल में मंगलवार को ऑल्टरनेट प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग वर्कशॉप का आयोजन किया. इसमें मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, कई कैबिनेट मंत्री और उच्च अधिकारी शामिल हुए. वर्कशॉप में प्रदेश में व्यापार के नए रास्ते खोजने के साथ सरकारी खर्च को कम करने पर चर्चा की गई.मोंटेक सिंह बोले पीपीपी मॉडल सबसे बेहतर

योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और आर्थिक सलाहकार मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा, “निजी निवेशक तभी आएगा जब उसे भरोसा होगा. इसके लिए पीपीपी मॉडल ही सबसे बेहतर विकल्प है. देश की सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए कानून बनाना चाहिए ताकि भरोसे का वातावरण बने.”

मोंटेक सिंह ने आंध्र प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा, “जब वहां पर राजनीतिक स्थितियां बदलीं तो एक निजी एजेंसी ने पैसा लगाकर मेगा सिटी बनाई थी. दूसरी सरकार ने आकर उस फैसले को पलट दिया ऐसे में निवेशक, निवेश करने से पहले कई बार सोचता है.” उन्होंने कहा, “पीपीपी मॉडल के प्रारूप अभी भी फाइनल नहीं हुए हैं, हर प्रदेश इसे अपने हिसाब से मैनेज कर रहे हैं.”

सीएम बोले-निवेश से ही बढ़ेगी आर्थिक गतिविधियां

वर्कशॉप को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, “अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है कि आर्थिक गतिविधियां बनी रहें. इसके लिए निवेश ही रास्ता है. पूरा देश बदल रहा है. हमें भी बदलाव को स्वीकार करना होगा और उसके हिसाब से ही अपनी नीति और कार्यक्रम बनाने होंगें.”

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, “यह योजना सिर्फ सड़क निर्माण से ही जुड़ी नहीं है. ग्रामीण व्यवस्था को गति देने वाली योजना है. इससे मिट्टी-गिट्टी रोजगार के अवसर बने. गतिविधियां तेज हुईं और आर्थिक विकास हुआ.”

कर्जमाफी को लेकर उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, “जब हमने यह योजना लागू की थी तब बैंकिंग सेक्टर से जुड़े लोगों ने आलोचना की थी. हमारा यह स्पष्ट मत था कि मध्य प्रदेश में 70 फीसदी ग्रामीण आबादी है जो खेती किसानी से जुड़ी हुई है. खेती किसानी से ग्रामीण बाजार जुड़ा हुआ होता है, ग्रामीण बाजार में तभी आर्थिक गतिविधि बढ़ेगी जब किसानों के पास खरीदने की क्षमता होगी. इसके लिए जरूरी था कि उनके ऊपर चढ़े कर्ज के बोझ को कम किया जाए. इसी सोच के साथ हम कर्ज माफी योजना लाए थे.”

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