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राज्यसभा जाने को लेकर सिंधिया की बेरुखी से कांग्रेस में बढ़ी बेचैनी

भोपाल 3 मार्च 2020 । मध्य प्रदेश में जल्द ही राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होने हैं. कांग्रेस की ओर से पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम सामने आ रहा है. लेकिन वह उच्च सदन में जाने के लिए तैयार नहीं हैं और इसलिए इस बात ने पार्टी की चिंताएं बढ़ा दी हैं.

दूसरे राज्यों के नेता भी मध्य प्रदेश कोटे से राज्यसभा में जाने की तैयारी में है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया में से एक को ही पार्टी उच्च सदन में भेजना चाहती है, लेकिन यह कौन होगा यह बड़ा सवाल बना हुआ है. हालांकि, सिंधिया के करीबियों का कहना है कि उनकी राज्यसभा में जाने की इच्छा नहीं है. वह इस संबंध में पार्टी के कुछ नेताओं को बता चुके हैं. यह बात परोक्ष रूप से पार्टी हाईकमान तक भी पहुंचा दी गई है.

अब कांग्रेस आलाकमान के सामने यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि सिंधिया राज्यसभा चुनावों में भाग क्यों नहीं लेना चाहते हैं. इसी के चलते कांग्रेस के अंदर बेचैनी है क्योंकि पिछले दिनों से यह बात हवा में तैर रही है कि सिंधिया कुछ मामलों को लेकर पार्टी के नेताओं से खुश नहीं है. इतना ही नहीं उनकी भाजपा के कुछ नेताओं से नजदीकियां भी हैं.

सूत्रों के अनुसार, राज्य की रिक्त हुई तीन राज्यसभा की सीटों के लिए मार्च में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने वाली है. इनमें से दो सीटें कांग्रेस को मिलना लगभग तय माना जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खाते में एक सीट जाने वाली है. कांग्रेस से इन दो सीटों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को बड़ा दावेदार माना जा रहा है.

अन्य दावेदारों में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव, सुरेश पचौरी के अलावा कई और भी ऐसे लोग हैं, जो विधानसभा व लोकसभा का चुनाव हार चुके हैं. सूत्रों का कहना है कि पार्टी के अंदर इस बात को लेकर मंथन चल रहा है कि आखिर राज्य से किन दो नेताओं को राज्यसभा में भेजा जाए.

वर्तमान में राज्य की राजनीति के हालात पर गौर करें, तो पता चलता है कि पार्टी प्रदेशाध्यक्ष के नाम का फैसला होना है. मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद कमलनाथ अध्यक्ष पद से मुक्ति के लिए पार्टी आलाकमान से कई बार अनुरोध कर चुके हैं. वहीं, राज्य में निगम और मंडलों के अध्यक्षों के चुनाव होने वाले हैं.

राजनीति के जानकारों की माने तो सिंधिया को पार्टी में वह महत्व नहीं मिल पा रहा है, जिसकी वे और उनके समर्थक उम्मीद लगाए थे. कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव सिंधिया और कमलनाथ का चेहरा समाने रखकर लड़ा था. कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया जा चुका है. वहीं सिंधिया समर्थकों को यह लगता था कि प्रदेशाध्यक्ष की कमान उनके नेता (सिंधिया) को मिल सकती है, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया.

इसके चलते कार्यकर्ताओं में असंतोष है और सिंधिया पर उनका दबाव भी. सिंधिया के राज्यसभा में जाने में बेरुखी दिखाए जाने से कांग्रेस में बेचैनी होना लाजिमी है. इसे सिंधिया के असंतोष के तौर पर देखा जा रहा है, साथ ही इससे आशंकाओं को भी जन्म मिल रहा है.

एकजुटता को टटोलने के लिए संभागवार विधायकों को बुलाएगी भाजपा
विधानसभा के बजट सत्र से पहले भाजपा में विधायकों की एकजुटता को टटोलने के लिए सभी को संभागवार भोपाल बुलाने की तैयारी है। बैठक सोमवार और मंगलवार को होगी। इसमें प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के साथ प्रमुख नेता रहेंगे। भाजपा इस बात को लेकर पुख्ता होना चाहती है कि यदि कहीं फ्लोर टेस्ट की बात हो तो पिछली मर्तबा की तरह विधायक नारायण त्रिपाठी और शरद कौल जैसे नए नाम सामने न आ जाएं। कई विधायकों की ओर से पिछले दिनों संगठन के कामकाज पर भी सवाल उठाए गए थे।

बैठक में जौरा और आगर के उपचुनाव पर भी बात हुई। भाजपा के प्रदेश के नेताओं ने तय किया कि इन सीटों के कार्यक्रम भी समानांतर चलें। लिहाजा आगामी 4 मार्च को आगर-मालवा में कार्यकर्ता सम्मेलन रखा गया है। इसके बाद मुरैना के जौरा सीट का भी कार्यक्रम होगा। राज्यसभा सीटों के नामों को लेकर चर्चा कुछ दिन बाद शुरू होगी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मीडिया से कहा कि मुरैना एवं भिंड के 100 से अधिक गांवों में ओलावृष्टि के कारण फसलें बर्बाद हुई हैं। राज्य सरकार का एक भी मंत्री या जिम्मेदार व्यक्ति अभी तक किसानों के बीच नहीं पहुंचा है। हमारी मांग है कि प्रभावितों को 100 प्रतिशत मुआवजा दिया जाए। जौरा, कैलारस, सुमावली, दिमनी, मुरैना और भिंड के कई क्षेत्रों में 70 फीसदी तक फसलें नष्ट हो गई हैं। सरकार इसे छिपाने की कोशिश कर रही है।

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