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देखते ही देखते राहुल गांधी ने बदल दी पूरी कांग्रेस

नई दिल्ली 27 अगस्त 2018 । कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की नई टीम बनकर तैयार हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने इसे तैयार करने में करीब आठ महीने ले लिया। वह एक-एक करके युवा चेहरे आखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुख्य प्लेटफार्म पर प्रवेश कराते रहे। अब पार्टी के प्रशासनिक कामकाज को देखने वाले मोती लाल बोरा से उम्रदराज कांग्रेस जैसे संगठन में कोई नहीं है। इतना ही नहीं 2019 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव के लिए भी कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी सेना तैयार कर ली है।
कोर ग्रुप कमेटी में सबसे कम उम्र के रणदीप सुरजेवाला
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तेज तर्रार प्रवक्ता और पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला को काफी बड़ा ईनाम दे दिया है। सुरजेवाला उनकी नाक के बाल बनते जा रहे हैं। सुरजेवाला मोदी सरकार पर लगातार धारदार हमला बोल रहे हैं। उन्हें यह कोर ग्रुप कमेटी का सदस्य बनाया जाना काफी अहम माना जा रहा है। सुरजेवाला के साथ इसमें वरिष्ठ नेता एके एंटनी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद, लोकसभा में पार्टी के सदन के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े, कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत, पी चिदंबरम, पार्टी के नये कोषाध्यक्ष अहमद पटेल, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल को जगह दी है।
घोषणा पत्र समिति ललितेश त्रिपाठी
उत्तर प्रदेश के ललितेश पति त्रिपाठी कांग्रेस के अपने जमाने में दिग्गज नेता कमलापति त्रिपाठी के परिवार से हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की टीम में ललितेश तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। ललितेश को घोषणा पत्र समिति में जगह मिली है। यह एक और चौंकाने वाला नाम है। ललितेश के अलावा इस टीम में मनप्रीत बादल, पी चिदंबरम, सुष्मिता देव, प्रो. राजीव गौड़ा, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जयराम रमेश, सलमान खुर्शीद, बिंदु कृष्णन, कु. शैलजा, रघुवीर मीणा, भालचंद्र मुगेकर, मीनाक्षी नटराजन, रजनी पाटील, सैम पित्रोदा, सचिन राव, तमरध्वज साहू, मुकुल संगमा, शशि थरूर को जगह मिली है। 19 सदस्यों वाली घोषणा पत्र समिति में राहुल गांधी ने चार महिलाओं को जगह दी है। यह समिति 2019 में प्रस्तावित आम चुनाव के लिए घोषणा पत्र तैयार करने का काम करेगी। कांग्रेस पार्टी का मानना है कि यह घोषणा पत्र नहीं दस्तावेज है। पार्टी का आईना है। कांग्रेस जो वादा देश की जनता से करती है, उसे पूरा करती है। इसलिए इस टीम के गठन को काफी अहम माना जा रहा है।

सोनिया के सिर्फ ये साथी टीम में

राहुल गांधी की टीम में टीम सोनिया के कुछ ही साथी हैं। मोती लाल बोरा की अहमियत बनी है, वहीं अहमद पटेल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष हैं। एके एंटनी और पी चिदंबरम अपनी अहमियत पहले की तरह बनाए हुए हैं। जयराम रमेश काफी समय से टीम राहुल के सदस्य माने जाते हैं। कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खडग़े क्रमश: राज्यसभा और लोकसभा में पार्टी के नेता है। दोनों का कद बना हुआ है।
लेकिन कांग्रेस की नई टीम में वरिष्ठ और युवा नेताओं के तालमेल के लिहाज से पार्टी अधिक युवा हो गई है। राहुल गांधी ने कई वरिष्ठ नेताओं को संगठन की मुख्य जिम्मेदारी में अभी शामिल नहीं किया है। जैसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, जनार्दन द्विवेदी, मोहन प्रकाश, बीके हरि प्रसाद को सांगठनिक कामकाज से अलग रखा है। ओमान चांडी, दीपक बावरिया, हरीश रावत, केसी वेणुगोपाल, लुइजिन्हो फ्लेरियो, अविनाश पांडे और अशोक गहलोत को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया है।
विभागों के प्रभारी के रूप में भी राहुल गांधी ने युवा चेहरों को जमकर जगह दी है। शक्ति सिंह गोहिल, आरपीएन सिंह, राजीव सातव, राम चंद्र खुंटिया, भंवर जितेंद्र सिंह, रजनी पाटील, पीएल पूनिया, पीसी चाको, आशा कुमारी, गोरव गगोई, ए चेला कुमार, रणदीप सुरजेवाला और इलाहाबाद के अनुग्रह नारायण सिंह पर कांग्रेस अध्यक्ष ने नई जिम्मेदारी डाल दी है।
सचिवों की सूची में भी तमाम नये चेहरे हैं। अल्पेश ठाकुर, अमित देशमुख, अनिल चौधरी, अरुण ओरॉन, आशीष दुआ, अश्विनी सेखरी, विनीत पुनिया, भूपेन कुमार बोराह, बीपी सिंह, विश्वरंजन मोहंती, बीएम संदीप, डा. चंदन यादव, चेल्ला वासमी चंद रेड्डी, किसटोफर तिलक, सीडी मयप्पन, देवेंदर यादव, जी. चिन्ना रेड्डी, राजेश लिलोठिया समेत अन्य युवा चेहरों को जगह दी है।

राहुल ने मंच खाली कर दिया था
मंच खाली कर दिया
दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुए महाधिवेशन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंच पर अकेले थे। मंच पर अकेले राहुल ने माइक हाथ में लेकर संदेश दे दिया था। राहुल ने कहा कि उन्होंने मंच को खाली कर दिया है। यह मंच कांग्रेस पार्टी के युवा नेताओं के लिए खाली हुई है। धीरे-धीरे कांग्रेस अध्यक्ष ने यही कर दिखाया। नदीम जावेद जैसे युवा चेहरे और पूर्व विधायक को पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग की जिम्मेदारी सौंप दी। कांग्रेस मुख्यालय में दशकों से जमे तमाम नेताओं को एक बार जमीन पर जाकर पार्टी के योगदान देने का संदेश दे दिया।
सोनिया कर लेती हैं किनारा
सोनिया गांधी ने किनारा कर लिया है। वह पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष हैं और अब सबसे कहती हैं कि पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी उनके भी बॉस है। यहां तक कि सोनिया गांधी सांगठनिक मामलों, राजनीतिक गतिविधियों, नेताओं से भेंट मुलाकात तथा पार्टी के आंतरिक मामलों में भी नेताओं से न के बराबर मिलती हैं। वह इस विषय में बात करने से भी कतराती हैं और साफ कहती हैं कि राहुल गांधी से नेता संपर्क करें। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पास यूपीए चेयरपर्सन की जिम्मेदारी रखी है। वह राजनीतिक दलों के साथ कांग्रेस से जुड़ाव के एजेंडे पर ही केंद्रित होकर अपना काम रही हैं।

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