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कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के बाद अब शशि थरूर

नई दिल्ली 22 अगस्त 2019 । कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. वहीं दूसरी तरफ सुनंदा पुष्कर मौत मामले में मुख्य आरोपी कांग्रेस सांसद शशि थरूर की मुश्किलें भी बढ़ रहीं हैं. दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट को बताया है कि कथित रूप से आत्महत्या करने वाली सुनंदा पुष्कर अपने पति और कांग्रेस नेता शशि थरूर के साथ तनावपूर्ण संबंधों के चलते मानसिक पीड़ा से गुजर रही थीं. पुलिस ने थरूर पर सुनंदा को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया, जिसने उन्हें आत्महत्या को मजबूर किया.

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को विशेष जज अजय कुमार कुहार से कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक सुनंदा पुष्कर की मौत जहर से हुई. उनके शव पर चोट के 15 निशान थे. विशेष वकील अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि वे अवसाद, मानसिक तनाव में थीं. इसलिए उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया. वकील ने कोर्ट से कहा कि सुनंदा, थरूर और पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार के कथित रिश्ते को लेकर भी परेशान थीं. वकील ने पुष्कर की मित्र और पत्रकार नलिनी सिंह के बयान को भी रखा. सिंह के मुताबिक थरूर और सुनंदा के बीच तनाव था. दोनों का रिश्ता बहुत बुरे दौर में था. सिंह ने कहा, जब मुझे सुनंदा का फोन आया तब वह रो रही थी. वह थरूर और मेहर से बदला लेना चाहती थी. उसे दोनों के कुछ मैसेज मिले थे. इसके बाद से वह परेशान थी. इसलिए वह घर जाने के बजाए होटल लीला में रूकी थी. इस मामले को लेकर मीडिया में गलत पब्लिसिटी भी हुई थी.

वकील अतुल श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि एक ईमेल मिला है, जो थरूर ने लिखा है. इसमें उन्होंने मेहर को मेरी प्यारी लिखकर संबोधित किया है. इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया था. कई पत्र भी मिले जो यह बताते हैं कि थरूर और मेहर का रिश्ता करीब का था. थरूर की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील विकास पाहवा ने इन तमाम आरोपों का खंडन किया. उन्होंने कोर्ट से कहा कि मुझे इन ईमेल्स के बारे में कोई जानकारी नहीं है. इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी.

कलेक्टरों से खफा मुख्यमंत्री कमलनाथ
मध्य प्रदेश में प्रशासनिक कार्यों में हो रही देरी और अनियमितता को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ कलेक्टरोंं से खफा हैं। प्रदेश में लगातार सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन उनका समय पर निकारण नहीं हो रहा है। समस्याओं के निपटारे में हो रही लापरवाही को देखते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय ने प्रदेश भर के कलेक्टरों को पत्र लिख कर अगस्त में ही काम निपटाने के लिए निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में जन अधिकार कार्यक्रम की शुरुआत की है। जिसमें वह जनता से सीधे संवाद करते हैं। बताया जा रहा है अगस्त तक सभी मामले निपटाने के लिए कलेक्टरोंं को कहा है जिसका रिपोर्ट वह खुद जन अधिकार कार्यक्रम में लेंगे। सीएम आफिस से कलेक्टरोंं को सख्ती से चेतावनी दी गई है कि वह अगले महीने पूरी तैयार से रहें। सभी मामलों की रिपोर्ट सीएम सीधे तौर पर कलेक्टरों से लेंगे।
प्रदेश में लगातार बढ़ रही शिकायतों से सरकार विपक्ष के निशाने पर है। लचर गवर्नेंस को लेकर अब मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कलेक्टरों को साफ संकेत दिए हैं कि जिन जिलों में ज्यादा शिकायतें लंबित हैं इसका मतलब है वहां शासन में सुधार की अधिक जरूरत है। सूत्रों के मुताबिक सीएम हेल्पलाइन में भी लंबित समस्याओं के लिए अब सीधे कलेक्टर को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा। सीएम के पीएस ने लिखा पत्र -सीएम सचिवालय के प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल ने सभी कलेक्टरों को पत्र भेजकर लंबित शिकायतों के त्वरित निपटारे का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि इन शिकायतों की समीक्षा मुख्यमंत्री कमलनाथ अगले महीने करेंगे, इसलिए बेहतर है कि जिन विभागों की शिकायतें हैं, उनसे निराकरण करवाएं।

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