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मंडी चुनाव में हार के डर से भाग रही है शिवराज सरकार

भोपाल 7 जुलाई 2018 । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि प्रदेश की शिवराज सरकार, मंडी समितियों का कार्यकाल दूसरी बार छह माह बढ़ाकर मंडी चुनाव से भाग रही है।
नाथ ने कहा कि शिवराज सरकार दावे करती है कि हमने बहुत सारी किसान हितैषी योजनाऐं चलायी हैं। हमारी सरकार में कृषि विकास दर सबसे ज़्यादा है। पांच कृषि कर्मण अवार्ड का प्रचार किया जाता है। शिवराजसिंह कहते हैं किसानों के लिए जितना काम हमने किया है, उतना किसी भी सरकार ने नहीं किया है। फिर क्या कारण है कि मंडी के चुनाव दूसरी बार छह महीने के लिए बढ़ाना पड़ रहे हैं?
कमलनाथ ने कहा कि अटेर ,चित्रकूट, मुंगावली और कोलारस उपचुनाव में करारी हार से भाजपा सरकार घबरा चुकी है और उसे आगामी विधानसभा चुनाव में भी अपनी हार स्पष्ट नजर आने लगी है। शिवराजसिंह अपने आप को किसान पुत्र कहते हैं, उन्हें तो मंडी चुनाव से भागने के बजाय उसका सामना करना चाहिए।
मंदसौर की पीपलियामंडी में किसान अपने हक़ को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, तो उनके सीने पर गोलियाँ दागी गयीं। दोषियों को सज़ा मिलने की बजाय,उन्हें क्लीनचिट दे दी गयी। दोषी अफसरो को तुरंत बहाल कर दिया गया। मंडी चुनाव होते तो किसान, सीने पर गोली का बदला वोट से लेते। इस बार भी अपने हक़ को लेकर आंदोलन कर रहे किसानो को जमकर डराया धमकाया गया। उन्हें आँसू गैस से लेकर डंडांे का डर दिखाया गया। उनसे शांति भंग के बांड भरवाए गये। किसान बेहद अक्रोशित, इन सब बातों से ही डरकर सरकार ने चुनाव टाल दिये।
नाथ ने कहा कि भावांतर योजना का वास्तविक लाभ किसानों को न होकर व्यापारियों को हुआ। यह योजना किसानो के लिये घाटे का सौदा साबित हुई। किसानों के नाम पर चल रही सारी योजनाओं में जमकर भ्रष्टाचार किया गया। प्रदेश भर की मंडियांे में फसल बेचने के लिए किसानों को जमकर परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई किसानो की फ़सल बेचने के इंतज़ार में मौत हो गयी। कर्ज से परेशान होकर प्रतिदिन किसान आत्महत्या कर रहे हैं और मुख्यमंत्री कहते हैं कि किसानों के लिए हमारी सरकार ने सबसे ज्यादा काम किया है। यदि ऐसा है तो उन्हें मंडी समितियों का कार्यकाल आगे बढ़ाने की बजाय, चुनाव कार्यक्रम घोषित करवाना था। जिससे उनको व उनकी सरकार को सारी वास्तविकता पता चल जाती। सरकार भले अभी मंडी चुनाव टाल दे, लेकिन किसानों के आक्रोश का सामना उसे आगामी विधानसभा चुनाव में जरूर करना पड़ेगा।
इंदौर में छेड़छाड़ से त्रस्त छात्रा की आत्महत्या ने शिवराज सरकार को दिखाया आइना – नरेन्द्र सलूजा
मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने मुख्यमंत्री के सपनों के शहर इंदौर में छेड़छाड़ से त्रस्त व थाने में तीन दिन तक सुनवाई नहीं होने पर मासूम छात्रा गायत्री जाट द्वारा दी गयी जान पर कहा कि इस घटना ने शिवराज सरकार को आइना दिखा दिया है कि अपराधियों के हौसले किस प्रकार से बुलंद है। बहन-बेटियों की किस प्रकार थानों में सुनवाई नहीं होती है। बेटियों के सम्मान की रक्षा व बेटियों के सम्मान के पाठ स्कूलों में पढ़ाये जाने की घोषणा एक दिन पूर्व ही इंदौर में बात करने वाले मुख्यमंत्री को इस घटना ने वास्तविकता से रूबरू करवा दिया है। आज ज़रूरत है शिवराज सरकार में बेटियों के सम्मान की रक्षा की। आज बहन-बेटियाँ सबसे ज़्यादा असुरक्षित है। सरकार सिर्फ़ भाषणबाज़ी व खोखले दावों में ही लगी हुईं है।
श्री सलूजा ने कहा कि यदि समय रहते बहन-बेटियों की सुनवाई हो जाये और उन्हें क़ानूनी मदद मिल जाये तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। एक तरफ़ शिवराज सरकार कहती है कि हमारी सरकार में सभी की रिपोर्ट दर्ज की जाती है, इसलिये अपराध के आँकड़े बढ़ते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि शिवराज सरकार में ही सबसे ज़्यादा बहन-बेटियों की थानों पर सुनवाई नहीं होती है। उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाती है। उनके झूठ की पोल इस घटना ने खोल दी है। यदि समय रहते बहन-बेटियों की सुनवाई हो, उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मिले, तो महिलाओं के प्रति अपराधों में कमी आ सकती है।

मंत्री, सांसदों को खदेड़ रही जनता

मध्यप्रदेश में मंत्री, सांसद, विधायक और बड़े-बड़े भाजपा नेताओं को इस समय जनता खदेड़ रही है। इससे लगता भाजपा के बुरे दिनों का आगाज हो चुका है। पिछले कुछ दिनों से मध्यप्रदेश में भाजपा के गृह नक्षत्र अच्छे नहीं चल रहे हैं, जहाँ एक तरफ भाजपा का गोपनीय सर्वे मध्यप्रदेश से भाजपा की विदाई का संकेत दे रहा है, वहीं आरएसएस के सर्वे ने तो शिवराज और भाजपा के पांव के नीचे से ज़मीन ही खींच ली है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा अब तक लगभग तीन गोपनीय और दो स्वतंत्र संस्थाओं से मध्यप्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों का सर्वे करा चुकी है पर किसी भी सर्वे ने भाजपा को राहत या दिलासा देने का काम नहीं किया है।अब तक हुए लगभग हर सर्वे में भाजपा 60-70 सीट से ऊपर जाती नहीं दिख रही है, वहीं एबीपी न्यूज़ के सर्वे ने तो बीजेपी को कांग्रेस से 13 फीसदी कम वोट मिलने की बात की है। अगर इन सभी सर्वे को नकार दें और ज़मीनी हक़ीकत देखें तो भाजपा के लिए हालात और भी ज्यादा ख़राब नज़र आ रहे हैं। पिछले दो माह में मध्यप्रदेश के कई बड़े मंत्री, भाजपा सांसद, भाजपा विधायक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जैसे बड़े कद के नेताओं को जनता ने खदेड़ कर अपना इरादा साफ़ कर दिया है। इन दिनों इंदौर, शहडोल, मंडला, खंडवा, नीमच, उज्जैन और बडवानी जैसी कई जगहों से भाजपा नेताओं को खदेड़ने के वीडियो जमकर वायरल हो रहे हैं। भाजपा इन घटनाओं से जहाँ सदमें में है, वहीं इन घटनाओं ने कांग्रेस की वापसी की संभावनाओं को कई गुना बढ़ा दिया है।

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