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शिवराज चौहान बोले- यह मत सोचिए कि मामा कमजोर हो गया

भोपाल 21 जनवरी 2019 । मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कहा कि यह ना सोचें कि ‘मामा’ कमजोर हो गया है. शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया कि 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा राज्य में 29 लोकसभा सीटों में से कम से कम 27 पर जीतेगी.

उन्होंने दिल्ली भाजपा युवा मोर्चा की ‘युवा विजय संकल्प महारैली’ में कहा कि कांग्रेस ने राज्य में बेशक सरकार बना ली हो लेकिन उनकी सरकार ‘‘किसी भी समय’’ गिर सकती है क्योंकि उनका पास बहुमत नहीं है.

वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, ‘‘यह मत सोचिए कि मामा कमजोर हो गया है. मैं वादा करता हूं कि हम आगामी चुनावों में 29 लोकसभा सीटों में से कम से कम 27 सीटें जीतेंगे जैसा कि हम 2014 में जीते थे.’’ मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए चौहान ने दावा किया कि भाजपा भी ‘‘पंगु’’ सरकार बना सकती थी लेकिन उसने फैसला किया कि वह भारी बहुमत के साथ सरकार बनाएगी.

चौहान ने कोलकाता में शनिवार को विपक्षी नेताओं की सभा का भी मजाक उड़ाया. उन्होंने इसे ‘‘भानुमति का कुनबा’’ बताते हुए कहा कि ‘महागठबंधन’ की योजना बना रही पार्टियों के बीच एक नेता को लेकर कोई सर्वसम्मति नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘यह बिना दूल्हे के शादी की तरह है. दूसरी तरफ हमारे पास रणभूमि में हमारा नेतृत्व करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में एक नेता है.’’

‘युवा विजय संकल्प महारैली’ दिल्ली भाजपा द्वारा लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पिछले दो महीने में आयोजित बड़ी रैलियों की श्रृंखला में पांचवीं रैली है. बहरहाल, कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद नहीं हुए. दिल्ली भाजपा प्रमुख मनोज तिवारी ने मंच से चेतावनी दी कि इस बात की जांच की जाएगी वे कौन लोग थे जो नेताओं के भाषणों के दौरान उठकर जा रहे थे.

इस बीच, दिल्ली भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष सुनील यादव ने दावा किया कि कार्यक्रम में 20,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए. उन्होंने कहा, ‘‘लोग आ रहे थे और जा रहे थे लेकिन कुर्सियां भरी हुई थीं.’’ यादव ने बताया कि युवा मोर्चा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल के 40 फुट लंबे पुतले जलाने की योजना बनाई थी. शहर में खराब वायु गुणवत्ता के कारण ऐसा नहीं किया गया.

रैली में केंद्रीय मंत्री विजय गोयल समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए.गोयल ने केजरीवाल पर हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली में उनकी सरकार ने शहर को ‘‘बर्बाद’’ कर दिया. दिल्ली भाजपा के लोकसभा चुनाव सह प्रभारी जयभान पवईया ने छात्रों से विपक्ष के ‘‘अच्छे दिन’’ के नारों की खिल्ली उड़ाने की चुनौती का सामना करने के लिए अपने तर्क मजबूत करने और मोदी सरकार की उपलब्धियों के साथ इसका जवाब देने के लिए कहा.

मामा को कमजोर मत समझना,MP से 27 सीट लेकर आएंगे

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का दावा है कि बीजेपी प्रदेश की 29 में से 27 सीटें जीतेगी. दिल्ली BJYM की युवा विजय संकल्प रैली को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि ‘यह मत समझना कि मामा कमजोर हो गया है. 2014 की तरह हम दोबारा मध्यप्रदेश की 29 सीटों में से 27 जीतेंगे.’

बता दें शिवराज सिंह को प्यार से लोग मामा कहते हैं. रैली में शिवराज ने आगे कहा कि कांग्रेस ने सरकार जरूर बना ली है, लेकिन वो किसी भी वक्त गिर सकती है. उनके पास बहुमत नहीं है.

पूर्व मुख्यमंत्री सिंह के मुताबिक मध्यप्रदेश में बीजेपी ‘कमजोर’ सरकार बना सकती थी. लेकिन पार्टी केवल बड़े बहुमत के साथ ही सरकार बनाएगी.
चौहान ने बंगाल में विपक्षी नेताओं के जमावड़े को भानुमति का कुनबा करार दिया. उन्होंने कहा कि विपक्षियों के पास किसी भी एक नेता के नाम पर सहमति नहीं है.

यह बिना दूल्हे की शादी है. महागठबंधन के पास एक नेता के नाम पर सहमति नहीं है. वहीं दूसरी ओर हमें नेतृत्व देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा मजबूत नेता है.
शिवराज सिंह चौहान

कार्यक्रम से जब कुछ बीजेपी कार्यकर्ता उठकर जाने लगे तो प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने उन्हें फटकार भी लगाई. तिवारी ने कहा कि इस बात की जांच की जाएगी कि कौन-कौन कार्यक्रम छोड़कर गया और उन पर कार्रवाई होगी.

‘युवा विजय संकल्प महारैली’ पिछले दो महीनों में दिल्ली बीजेपी का 5वां बड़ा कार्यक्रम है. पार्टी प्रदेश में लोकसभा चुनावों के लिए कमर कसती नजर आ रही है. इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के अलावा सीनियर लीडर विजय गोयल और दिल्ली बीजेपी प्रभारी जयभान सिंह पवैया भी कार्यक्रम में मौजूद रहे.

शिवराज काल के अधिकारियों से छेड़छाड़ क्यों नहीं कर रहे हैं कमलनाथ?

कमलनाथ को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बने हुए एक माह पूरा हो गया है. कमलनाथ ने पिछले एक माह में दर्जनों IAS, IPS अधिकारियों के तबादले किए हैं. इन तबादलों में अधिकांश वो लोग प्रभावित नहीं हुए है, जो शिवराज सिंह चौहान की सरकार में ताकतवर माने जाते थे. कमलनाथ ने मुख्यमंत्री सचिवालय में भी कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया है. पुलिस विभाग के मुखिया का चेहरा भी नहीं बदला है.

रिटायरमेंट कारण बदला मुख्य सचिव का चेहरा

कमलनाथ ने 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. कांग्रेस की पंद्रह साल बाद राज्य की सत्ता में वापसी हुई थी. लिहाजा यह अनुमान लगाया जा रहा था कि मुख्यमंत्री कमलनाथ, शिवराज सिंह चौहान के चहेते अफसरों को रातोरात बदल देंगे. लेकिन उम्मीद से उलट कमलनाथ ने प्रशासनिक फेरबदल में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई. मुख्य सचिव के पद पर बैठे 1984 बैच के IAS अफसर बसंत प्रताप सिंह को उनका कार्यकाल पूरा करने दिया. बसंत प्रताप सिंह को शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने छह का सेवा विस्तार दिया था.

इस विस्तार के साथ उनका रिटायरमेंट 31 दिसंबर 2018 को होना था. कमलनाथ ने 31 दिसंबर की रात को ही नए मुख्य सचिव के तौर पर सुधि रंजन मोहंती की नियुक्ति की. मोहंती, दिग्विजय सिंह के पसंदीदा अफसरों में माने जाते हैं. मोहंती को इसका नुकसान बीजेपी सरकार में हुआ. उनके खिलाफ आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो द्वारा जांच भी की गई थी.

इस जांच के चलते ही उन्हें प्रमुख सचिव के पद पर भी समय पर पदोन्नति नहीं मिल पाई थी. वरिष्ठता के बावजूद उन्हें मुख्य सचिव के शीर्ष पद पर भी बैठने का मौका नहीं दिया गया. शिवराज सिंह चौहान ने मोहंती से दो साल जूनियर बसंत प्रताप सिंह को मुख्य सचिव बनाया.

कांग्रेस की वापसी का फायदा?

पंद्रह साल बाद कांग्रेस की सत्ता वापसी के बाद ही मोहंती को मुख्य सचिव बनने का मौका मिला. कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाने वाले बसंत प्रताप सिंह को भी निराश नहीं किया. उन्हें रिटायरमेंट के बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त का पद अगले साढ़े पांच साल के लिए दे दिया गया. इस पद पर बैठे एक अन्य रिटायर्ड मुख्य सचिव आर.परशुराम को सुशासन स्कूल का महानिदेशक बनाकर खुश किया गया.

आर परशुराम सितंबर 2013 तक राज्य के मुख्य सचिव रहे हैं. उनके बाद आए एंटोनी डिसा तीन साल राज्य के मुख्य सचिव रहे. शिवराज सिंह चौहान ने रिटायरमेंट के बाद डिसा को रेरा का अध्यक्ष बना दिया. कमलनाथ सरकार में डिसा ताकतवर अफसर के तौर पर उभर कर सामने आए हैं. डिसा भारत सरकार में कमलनाथ के साथ काम कर चुके हैं.

बताया जाता है कि अधिकारियों के मामले में कमलनाथ डिसा से ही सलाह-मशविरा करते हैं. जिन अफसरों ने डिसा को मुख्य सचिव नियुक्त कराने में अहम भूमिका अदा की थी, उन अफसरों पर अब डिसा का वरद हस्त है. इस कड़ी में राज्य के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. सुलेमान लंबे समय से उद्योग विभाग में प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. उनके पास लोक निर्माण विभाग भी है.

आखिर क्यों हो रही है हैरानी?

राज्य में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद सुलेमान का प्रभार न बदलना लोगों को आश्चर्य में डाल रहा है. सुलेमान वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में हिस्सा लेने के लिए कमलनाथ के साथ दावोस गए हैं. कमलनाथ ने अब तक 35 जिलों के कलेक्टर ही बदले हैं. राज्य में कुल 52 जिले हैं. भोपाल,जबलपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों के कलेक्टरों को यथावत रखा है.

कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही महेश चंद्र चौधरी को रीवा कमिश्नर के पद से हटाया था. चौधरी वर्ष 2016 के लोकसभा चुनाव के वक्त छिंदवाड़ा में कलेक्टर थे. उस दौरान कमलनाथ से उनकी अनबन हो गई थी. चौधरी पिछले एक माह से अपनी पदस्थापना की प्रतीक्षा कर रहे हैं.

सचिवालय में अभी भी हैं शिवराज सिंह चौहान के पसंदीदा अफसर

कमलनाथ ने मुख्यमंत्री सचिवालय में भी व्यापक फेरबदल नहीं किया. शिवराज सिंह चौहान के प्रमुख सचिव रहे अशोक वर्णवाल को कमलनाथ ने अपने साथ ही रखा है. सचिवालय को भी हल्का-फुल्का बनाने की कोशिश कमलनाथ ने की है.

वर्णवाल भारत सरकार में कमलनाथ के प्राइवेट सेक्रेटरी के तौर पर काम कर चुके हैं. कमलनाथ ने अपने साथ काम कर चुके एक अन्य अधिकारी मनु श्रीवास्तव को वाणिज्यिक कर जैसे महत्वपूर्ण विभाग में पदस्थ कर दिया. मनु श्रीवास्तव की पत्नी IPS अधिकारी प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव को मुख्यमंत्री सचिवालय में OSD बनाया गया है.

शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्रिकाल में प्रमुख सचिव के वेतनमान वाले चार IAS अधिकारी सचिवालय में तैनात थे. इनमें से एक अधिकारी एसके मिश्रा को रिटायरमेंट के बाद भी संविदा नियुक्ति देकर सचिवालय में रखा गया था. सत्ता परिवर्तन के बाद मिश्रा की संविदा नियुक्ति खुद ही समाप्त हो गई.

वहीं विवेक अग्रवाल और हरिरंजन राव को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री सचिवालय की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया. विवेक अग्रवाल को पीएचई विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है. हरिरंजन राव को तकनीकी शिक्षा एवं पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभाग में रखा गया है. शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्रित्व काल में इन अधिकारियों की ही तूती सरकार में बोलती थी.

शिवराज सिंह चौहान ने कई महत्वपूर्ण विभाग भी इन अधिकरियों के जिम्मे छोड़े थे. इन विभागों में मंत्रियों का कोई असर नहीं था. कमलनाथ ने सचिवालय में कभी शिवराज सिंह चौहान के उप सचिव रहे अशोक वर्मा को भी अपने सचिवालय में जगह दी है. सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आदेश एसएन रुपला का है.

विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने रूपला पर आरोप लगाया था कि वह रीवा संभाग के कलेक्टरों पर बीजेपी के पक्ष में काम करने के लिए दबाव बना रहे हैं. रूपला रीवा के कमिश्नर रहे थे. रिटायरमेंट के बाद शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें OSD के तौर पर अपने साथ रखा था.

कमलनाथ सरकार में उन्हें रेरा के अपीलीय प्राधिकरण में रजिस्ट्रार का काम मिल गया है. शिवराज सिंह चौहान की सरकार में बैतूल के कलेक्टर रहे शशांक मिश्रा को उज्जैन का कलेक्टर बनाकर कमलनाथ ने नौकरशाही के प्रति अपने नरम रवैये का संदेश दिया है.

अपर मुख्य सचिव स्तर पर एक मात्र अधिकारी मनोज श्रीवास्तव ऐसे हैं,जिन्हें कमलनाथ ने लूप लाइन में डाला है. कमलनाथ अफसरों के बारे में फैसला करने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की राय भी लेते हैं. कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के क्षेत्र में फेरबदल से पहले कमलनाथ ने उनकी राय भी ली. मैदानी अफसरों ट्रांसफर स्थानीय कांग्रेसी नेताओं के फीडबैक के आधार पर किए जा रहे हैं.

कमलनाथ ने पुलिस महानिदेशक को भी नहीं बदला

किसी भी राज्य में सत्ता परिवर्तन होने की स्थिति में पुलिस महानिदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति का हटना तय माना जाता है. लेकिन, कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान की सरकार के पुलिस महानिदेशक रहे ऋषि कुमार शुक्ला की सेवाएं जारी रखकर सभी को चौंका दिया. पुलिस विभाग में फेरबदल भी शुक्ला के प्रस्तावों के आधार पर किए गए.

कमलनाथ ने संजय राणा को इंटेलिजेंस और एस डब्ल्यू नकवी को प्रशासन की जिम्मेदारी सौंपी है. अनुराधा शंकर प्रशासन और राजीव टंडन इंटेलिजेंस में अपर पुलिस महानिदेशक थे. कमलनाथ ने आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो और लोकायुक्त जैसी भष्टाचार निरोधी संस्थाओं में नए अफसर भेजे हैं.

आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो में केएन तिवारी को महानिदेशक और मोहम्मद अफजल को अपर महानिदेशक नियुक्त किया है. बी मधु कुमार को लोकायुक्त में अपर महानिदेशक बनाया गया है.

मधु कुमार पर आरोप था कि उन्होंने आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो में महानिदेशक पद पर रहते हुए शिवराज सिंह चौहान की सरकार के कथित ई-टेंडरिंग घोटाले की एफआईआर दर्ज नहीं की थी. कमलनाथ ने लगभग 22 जिलों के एसपी ही बदले हैं. एक तरह से देखा जाए तो कमलनाथ अभी भी शिवराज सिंह चौहान की टीम के साथ ही फैसले ले रहे हैं.

मेरी तरह शिवराज सिंह भी इस चुनाव में अकेले पड़ गए थे : दिग्विजय सिंह

जिस समारोह में वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह हों वह राजनीति की चर्चा से कैसे अछूता रह सकता है। स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश ने कार्यक्रम तो रखा था पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से एक आत्मीय मुलाकात का। उद्देश्य यही था कि इंदौर के अखबार मालिक इस मौके पर प्रेस काम्प्लेक्स की जमीन संबंधी अपनी परेशानी बता सकें। दिग्विजय सिंह से अनुरोध किया कि कुछ बोलें तो उन्होंने कहा जैसे 2003 के चुनाव में मैं अकेला पड़ गया था वैसे ही इस बार के चुनाव में शिवराज सिंह चौहान अकेले पड़ गए।

जो लोग ये कह रहे हैं कि मप्र की ये सरकार अल्पमत की है, जब चाहूंगा तब गिरा दूंगा। कभी भी निपटा देंगे, सरकार ज्यादा दिन नहीं चलेगी, ऐसी बातें वही लोग कर रहे हैं जिनमें कूट कूट कर अहंकार भरा है। मैं दावे के साथ कह रहा हूं ये सरकार पूरे समय चलेगी, हमारे पास बिकाऊ नहीं टिकाऊ माल है। बेहतर होगा कि हमारी चिंता करने की बजाय वे लोग अपनी चिंता करें ।

प्रदेश में एक नया राजनीतिक माहौल बना है। मैं 2003 से तक के समय के बारे में चर्चा करना नहीं चाहता। 2018 से 23 के बारे में कह सकता हूँ कि हमारी सरकार चलेगी। कौन कितने पानी में है आप सब इस बात से परिचित हैं।कल तक जो कहते थे 2019 की नहीं 2024 की बात करो, उन्हीं लोगों को अब 2019 की चिंता सता रही है। 2003 से जो व्यवस्था रही उसमें मेरा राजनीतिक संपर्क नहीं रहा। इसके कई कारण थे लेकिन 2017 में जब मैं नर्मदा परिक्रमा पर निकला और लोगों से मिला, ये सारे वो लोग थे जिन्हें किसी तरह के राजनीतिक लाभ की अपेक्षा नहीं थी। इन लोगों से संपर्क में लग गया था कि लोग बदलाव के लिए बैचेन हैं।जैसे मैं 2003 में अकेला पड़ गया था वैसे ही इस चुनाव में शिवराज भी अकेले पड़ गए। बातों ही बातों में दिग्विजय सिंह ने यह भी कह डाला कि इंदौर में ये दो प्रेस क्लब वाली बात मुझे अच्छी नहीं लगती। लगता है मुझे यहां भी समन्वय करना पड़ेगा।
एक एक व्यक्ति से मिले
दिग्विजय सिंह बाद में समारोह में मौजूद एक-एक आगन्तुक अतिथियों से उसके पास जाकर भेंट की।खारीवाल ने अखबार मालिकों-संपादकों से मुलाकात कराई।इन लोगों ने प्रेस कांप्लेक्स की जमीन को लेकर आ रही परेशानी की विस्तार से जानकारी दी। पद्मश्री अभय छजलानी, सुरेंद्र संघवी, ओमी खंडेलवाल,जीवन साहू, सतीश जोशी, सुभाष जैन, विवेक सेठ,क्रांति चतुर्वेदी, किशोर वाधवानी, नितेश वाधवानी, मनोज सिंह राजपूत, संदीप मेहता, हेमंत शर्मा, मोहित बिंदल, राजेश जैन, नवनीत शुक्ला, प्रवीण नागर, बलराम अवस्थी, डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव, मनोहर लिंबोदिया, एमएस खिंची, भरत सक्सेना, राजेश ज्वेल, जितेंद्र जाखेटिया, राकेश द्विवेदी, आदि मौजूद थे। प्रारंभ में खारीवाल, नवनीत शुक्ला, कमल कस्तूरी, रवि जे चावला, कीर्ति राणा, कल्पना श्रीवास्तव, आकाश चौकसे, विजय अडीचवाल, अजय भट्ट,विजय शर्मा, नईम कुरैशी, राजेश मूणत, छोटू शास्त्री, ओमी खंडेलवाल, नवीन जैन, चन्द्रशेखर रायकवार, आकाश चौकसे, विजय गुंजाल, आदि ने स्वागत किया।

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