मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> जीत का श्रेय शिवराज को तो हार का दोष भी उन्हें

जीत का श्रेय शिवराज को तो हार का दोष भी उन्हें

मंदसौर 11 दिसंबर 2018 । तीखे और सपाट बयानों के लिए प्रसिद्ध भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्यसभा सदस्य रघुनंदन शर्मा फिर चर्चा में हैं। रविवार को मंदसौर मेें पारिवारिक कार्यक्रम में आए शर्मा ने कहा कि जब जीत का श्रेय मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को जाता है तो निश्चित ही हार का दोष भी उन्हें ही होगा।

उन्होंने स्वीकार भी किया कि मुख्यमंत्री के ‘माई का लाल वाले बयान से भाजपा को 10-15 सीटों का घाटा तो हुआ है। और 200 पार वाली बात तो दूर है, पिछली बार जितना बहुमत भी मिल जाए तो संतोष की बात होती। हालांकि उन्होंने भाजपा को बहुमत मिलने का दावा भी किया।

शर्मा ने मीडिया से कहा कि निश्चित रूप से हमसे त्रुटियां हुई होंगी, इसलिए अभी बताए जा रहे एग्जिट पोल भले ही परिणाम आने पर गलत सिद्ध हों पर ये आशा के अनुरूप भी नहीं हैं, फिर भी भाजपा बहुमत में आ ही जाएगी। सीएम के ‘माई का लाल वाले बयान के बाद कई लोगों से बातचीत हुई।

इनमें संतों, धर्माचार्यों व विद्वानों में आक्रोश था कि मुख्यमंत्री ने भावावेश में ही सही पर गलत बात बोल दी थी। ‘माई का लाल एक दंभयुक्त शब्द है। बड़े जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को इस प्रकार भावावेश में आकर दंभोक्ति वाले शब्दों को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। इससे हमारा कुछ नुकसान तो हुआ है और अगर इस प्रकार के शब्दों का उपयोग नहीं होता तो 10-15 सीटों की वृद्धि होती और आज जो भी अनिश्चितता की स्थिति बनी है वह होती ही नहीं।वे बोले – मुख्यमंत्री भावुक हैं और भावावेश में आकर कह गए पर उनका मंतव्य स्पष्ट था कि सभी समाज को साथ लेकर चलने की स्थिति में भावना में आ गए थे। लोगों ने उन्हें उस समय भी टोका था, इसीलिए में भी यही कहता हूं कि यदि जीत का श्रेय मुख्यमंत्री को जाता है क्योंकि उन्होंने बहुत परिश्रम किया है और उसकी दाद देते हैं और यदि हार जाते हैं तो दोष भी उनके खाते में ही जाएगा। सामूहिक नेतृत्व वाली बात रहती तो दोष सबका रहता। उल्लेखनीय है कि भोपाल में हुए अजाक्स के सम्मेलन में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा था कि प्रदेश में कोई माई का लाल आरक्षण को नहीं हटा सकता है, तभी से आरक्षण विरोधियों ने बवाल मचा रखा है।

बीजेपी ने NCP से छीना धुले नगर निगम, 50 सीटों पर हासिल की एकतरफा जीत

बीजेपी ने महाराष्ट्र के 74 सदस्यों वाले धुले नगर निगम चुनाव में सोमवार को आसान जीत हासिल की. वहीं अहमदनगर निगम में मतदाताओं ने खंडित जनादेश दिया. राज्य के दो नगर निगमों में रविवार को चुनाव आयोजित किया गया था. मतों की गिनती का कार्य सोमवार की शाम को पूरा हुआ जिसके बाद राज्य चुनाव आयोग ने परिणामों की घोषणा की.

बीजेपी के पक्ष में आए परिणामों ने सबको हैरान कर दिया है. 2013 के चुनाव में बीजेपी को धुल नगर पालिका में केवल 3 जबकि अहमदनगर में सिर्फ 9 सीटें मिली थीं. इस बार बाजी पूरी तरह से पलट गई. धुले नगर निगम में पहले एनसीपी का कब्जा था. भाजपा को 74 सीटों में से 50 सीटों पर जीत हासिल हुई है. वहीं कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन को 14 पर जीत मिली. शिवसेना, एआईएमआईएम, समाजवादी पार्टी और स्वतंत्र उम्मीदवारों ने दो-दो सीटें जीतीं जबकि एक पर बसपा ने कब्जा किया.

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने धुले नगर निगम में एंट्री ले ली है. पार्टी ने 11 उम्मीदवार धुले नगर पालिका के चुनाव में मैदान में उतारे थे जिसमें से 4 उम्मीदवारों की जीत मिली है. जीत से उत्साहित ओवैसी ने कहा, “मैंने एक भी रैली नहीं की फिर भी हमें जीत मिली. अब हम धुले विधानसभा सीट पर दावा ठोकेंगे.”
अहमदनगर में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन बहुमत से थोड़ा पीछे रह गया. अहमदनगर नगर निगम में शिवसेना को 68 सीटों में से 24 पर जीत हासिल हुई. एनसीपी को 18 और भाजपा को 14 सीटें मिली. यहां कांग्रेस को सिर्फ चार सीटों पर जीत हासिल हुई. अहमदनगर और धुले नगर पालिका में रविवार को क्रमश: 67% और 60% मतदान हुआ था. उत्तरी महाराष्ट्र के इन दोनों शहरों में तकरीबन आठ लाख आबादी है. धुले में 4.46 लाख मतदाता हैं जबकि अहमदनगर में 3.46 लाख मतदाता हैं.

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

अमित शाह के बयान पर नीतीश कुमार का तंज, बोले- इतिहास कोई कैसे बदल सकता है

नयी दिल्ली 14 जून 2022 । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी सहयोगी पार्टी बीजेपी …