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शिवराज सरकार मुश्किल में, सामने आया सहकारिता बैंक में 180 करोड़ का घोटाला

भोपाल 13 अप्रैल 2019 । सीएम कमलनाथ के करीबियों पर आयकर के छापे और पूर्व सीएम शिवराज के करीबियों पर ई-टेंडरिंग घोटाले की कार्रवाइयों के बीच भोपाल को-ऑपरेटिव बैंक में भी 180 करोड़ रुपए का घोटाला पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि, यह घोटाला पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुआ।

खबर है कि, सहकारी बैंक में यह बड़ा घोटाला कमलनाथ सरकार के वरिष्ठ सदस्य सहकारिता मंत्री डॉ गोविंद सिंह ने स्वयं पकड़ा है। मालूम हो कि, सहकारी मामलों के विशेषज्ञ कहे जाने वाले डॉ सिंह भोपाल जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं।

जानकारी के मुताबिक डॉ सिंह ने इस मामले में मुख्य मंत्री कमलनाथ और प्रदेश के मुख्य सचिव एसआर मोहंती से सहकारिता के प्रमुख सचिव अजीत केसरी की शिकायत करते हुए, मामले में शीघ्र एफआईआर दर्ज कराए जाने की अनुशंसा की है। केसरी पर मामले में सहयोग न करने का आरोप है।

मालूम हो कि, शिवराज सिंह चौहान जब सूबे के मुखिया थे तब भी व्यापम, खनिज, डम्फर, नर्मदा घोटालों में उनका और उनके करीबियों का नाम आता रहा है। इनमें व्यापम सबसे बड़ा घोटाला माना जाता है, सौ से अधिक लोगों की मौतें इसी से जुड़ी समझी जाती हैं।

लेकिन विधान सभा चुनाव के कुछ पहले ही सामने आया 3000 करोड़ का ई-टेंडरिंग घोटाला व्यापम से भी बड़ा प्रतीत होता है। यह घोटाला मात्र तीन माह में कर लिया गया। सीएम कमलनाथ करीबियों पर की गई आयकर छापों की कार्रवाई के बाद बुधवार को इस मामले एफआईआर दर्ज कराई गई। सभी आरोपी शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के करीबी समझे जाते हैं। इसी क्रम में सहकारिता घोटाला सामने आने के बाद प्रतीत होता है कि आने वाले समय में अन्य विभागों के इसी तरह के मामले भी खुल सकते हैं।

मप्र में ई-टेंडर घोटाले में पूर्व मंत्री मेहदेले ने शिवराज के सर फोड़ा ठीकरा

ई-टेंडर घोटाले में प्रकरण दर्ज होते ही तत्कालीन पीएचई मंत्री कुसुम सिंह महदेले ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर ठीकरा फोड़ दिया है। उन्होंने कहा है कि घोटाले की फाइल को उन्होंने नहीं, बल्कि शिवराज ने ही मंजूरी दी थी। टेंडर पीएचई से नहीं, बल्कि जल निगम से जारी हुए थे, जिसके अध्यक्ष शिवराज ही थे। पीएचई और ग्रामीण विकास मंत्री और एक अन्य मंत्री को उपाध्यक्ष बनाया गया था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि निगम की किसी भी फाइल पर मेरे हस्ताक्षर नहीं है। इस मामले में ईओडब्ल्यू ने टेंडर लेने वाली दो कंपनियों ह्यूम पाइप लिमिटेड और जीएमसी लिमिटेड के मालिक व निदेशकों पर प्रकरण दर्ज कर लिया है।

घोटालों की छानबीन से भाजपा में हड़कंप: शोभा
प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने आरोप लगाया है कि भाजपा शासनकाल में ई-टेंडरिंग घोटाले की छानबीन शुरू होते ही पूरी भाजपा में हड़कंप मच गया। उन्होंने कहा कि जल निगम के तीन टेंडरों में छेड़छाड़ को लेकर एफआईआर की गई है।

इन टेंडरों की राशि करीब 1800 करोड़ रुपए है। ओझा ने कहा कि व्यापमं, डंपर, पोषण आहार, पौधरोपण, सिंहस्थ एवं अवैध उत्खनन घोटालों की जांच रिपोर्ट पेश होंगी तो कई नेताओं ने नाम भी सामने आएंगे। कांग्रेस सरकार हर घोटाले की जांच कराकर आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाएगी।

मध्यप्रदेश भाजपा दफ्तर में लगे ‘शिवराज सिंह मुर्दाबाद’ के नारे…

लोकसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश भाजपा मे टिकट बंटवारे के बाद सुलग रहे असंतोष की आग अब पार्टी के भोपाल स्थित प्रदेश मुख्यालय तक पहुंच गई है। गुरुवार को भाजपा दफ्तर में राजगढ़ से आए नाराज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उनके खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए।

राजगढ़ से वर्तमान सांसद रोडमल नागर को फिर से टिकट देने के विरोध में स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के समर्थन के कारण ही रोडमल नागर को फिर से टिकट मिला है। कार्यकर्ताओं का आरोप हैं कि सांसद रोडमल नागर के खिलाफ स्थानीय स्तर पर एंटी इंकमबेंसी है और पार्टी की सर्वे रिपोर्ट में उनकी रिपोर्ट निगेटिव थी लेकिन उसके बाद भी उनको टिकट दिया गया।

पार्टी दफ्तर पहुंचे कार्यकर्ता अपने हाथ में जो तख्तियां लिए थे, उसमें शिवराज सिंह चौहान के विरोध में और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में नारे लिखे हुए थे। कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर पार्टी रोडमल नागर का टिकट नहीं बदलती है तो वो पार्टी का विरोध करेंगे।

लोकसभा चुनाव के दौरान ये पहला मौका था जब प्रदेश में भाजपा के सबसे बड़े चेहरे शिवराज सिंह चौहान के विरोध में पार्टी दफ्तर में सार्वजनिक तौर पर नारेबाजी हुई, पार्टी दफ्तर में हुई इस नारेबाजी के बाद एक बार बीजेपी के अंदरखाने की सियासत गरमा गई है।

पार्टी पहले ही कई लोकसभा सीटों पर पार्टी उन मौजूदा सांसदों की बगावत से परेशान है, जिनका टिकट पार्टी ने काट दिया था वहीं राजगढ़, सीधी और टीकमगढ़ में सीटिंग सांसदों को दोबारा मौका देने से पार्टी में टिकट के दावेदार नेता पार्टी से नाराज है। सीधी में पूर्व सांसद गोविंद मिश्रा और टीकमगढ़ में पूर्व विधायक आरडी प्रजापति ने पार्टी को ही अलविदा बोल दिया।

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