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CM योगी आदित्यनाथ की राह चले शिवराज सिंह चौहान, 2023 के चुनाव से पहले छवि बदलने की कोशिश

नयी दिल्ली 01 अप्रैल 2022 । मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से करीब बीस महीने पहले ही सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चुनावी मोड में दिखने लगे हैं। एक वक्त पर शांत स्वभाव के लिए पहचान रखने वाले शिवराज अब ‘बुलडोजर मामा’ के रूप में आने की कोशिश में जुटे हैं। ‘बुलडोजर मामा’, जो गरीबों के प्रति उदार हैं और गलत अधिकारियों पर सख्त ऐक्शन को भी तैयार हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ की ऐतिहासिक जीत के बाद शिवराज ने खुद को पूरी तरह से नए तेवर और छवि के लिए तैयार कर लिया है। क्योंकि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए खुद को ‘बुलडोजर बाबा’ के रूप में एक ब्रैंड बनाया। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी ने यूपी में मुफ्त राशन और आवास योजना का जमकर फायदा उठाया था और इससे पार्टी को लाभार्थियों के बीच नया चुनावी क्षेत्र भी बना।

अफसरों को दी सख्त चेतावनी
एक ओर जहां कांग्रेस की प्रदेश यूनिट में अंतर्कलह मची हुई है, वहीं दूसरी ओर चौहान ने सरकारी योजनाओं को लेकर पिछले महीने 15 जनसभाओं को संबोधित किया और अधिकारियों के साथ 17 बैठकों की अध्यक्षता की। अधिकारियों ने इन बैठकों को लेकर बताया कि चौहान ने उन्हें साफ चेतावनी दी थी कि सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचने में अगर जरा सी भी लापरवाही हुई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि मार्च महीने में पंचमढ़ी में एक कैबिनेट बैठक में चौहान ने अगले 20 महीनों के लिए मंत्रियों के लिए लक्ष्य भी निर्धारित किया है। इन योजनाओं की फिर से की शुरुआत
10 मार्च को पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आने के बाद शिवराज ने तीर्थ दर्शन योजना, कन्या विवाह योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना जैसी योजनाओं को फिर से शुरू करने की घोषणा की थी। इनमें से तीर्थ दर्शन योजना की शुरुआत 2012 में हुई थी, जिसे 2018 में कांग्रेस सरकार ने बंद कर दिया था। वहीं कन्या विवाह योजना कोविड-19 की वजह से बंद कर दिया गया था। इस पूरे डिवेलपमेंट से परिचित एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि ये तीनों ही योजनाएं राज्य में सबसे लोकप्रिय थीं। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को ‘मामा’ के रूप में लोकप्रिय बनाने में इन योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका थी और यही कारण है कि मुख्यमंत्री इन योजनाओं पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

किसानों को साधने की कोशिश
इसके साथ ही शिवराज किसानों का विश्वास फिर से हासिल करने की कोशिश में भी जुटे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2018 में बड़ी संख्या में किसानों ने कांग्रेस को वोट दिया था। खासकर मालवा और निमाड़ जैसे क्षेत्र जो कभी भाजपा का गढ़ माने जाते थे। 2013 में बीजेपी ने यहां की 66 सीटों में से 56 सीटें जीतीं, लेकिन 2018 में बीजेपी के खाते में सिर्फ 28 सीटें आई थीं। किसानों की कर्ज माफी का वादा और 2018 में मंदसौर में हुई पुलिस फायरिंग में पांच किसानों की मौत के बाद भाजपा के प्रति किसानों का विश्वास काफी गिर गया था। चौहान ने अब एकबार फिर किसानों के कर्ज पर ब्याज माफ करने की घोषणा की है। हालांकि उन्होंने इसबात की शर्त रखी है कि किसान मूलधन का भुगतान करें। आदिवासियों को साधने की तैयारी
इसके साथ ही शिवराज ने आदिवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए एक नया आदिवासी विकास निगम स्थापित करने की भी घोषणा की है। सरकार ने बजट में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के कल्याण के लिए आवंटित किए गए बजट में भी बढ़ोतरी की है।

शिवराज ने बनाई ‘बुलडोजर मामा’ वाली छवि
कल्याणकारी योजनाओं के साथ शिवराज मतदाताओं को यह संदेश देने की भी कोशिश कर रहे हैं कि वह माफियाओं और अपराधियों के खिलाफ बेहद सख्त हैं। 20 मार्च को सीएम शिवराज ने एक जनसभा के दौरान कहा था कि ‘मामा का बुलडोजर चालू हो गया है, अब यह तब तक नहीं रुकेगा जब तक बदमाशों को दफ़नाया नहीं जाता। उनके घर उजाड़ दिए जाएंगे। मैंने राज्य से डकैतों को खत्म किया और अब मैं माफियाओं और अपराधियों को खत्म कर दूंगा।’ इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने पूरे राज्य में शिवराज को ‘बुलडोजर मामा’ के रूप में पेश करने वाले पोस्टर लगाए। इन पोस्टरों में दिखाया गया कि पिछले दो सालों में राज्य सरकार ने माफिया या अपराधियों के 127 भवनों को जमींदोज कर दिया है। अधिकारियों के सामने भी शिवराज ने बदली छवि
अधिकारियों के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों के सामने भी शिवराज ने काफी सख्त होते हुए अपनी छवि बदलने की कोशिश की। 19 मार्च को हुई बैठक में चौहान ने अधिकारियों से साफ कहा कि अगर वे ठीक तरह से जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं तो उनका तबादला कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा था, ‘मैं साफ कह रहा हूं कि अपराधियों के लिए किसी तरह की दया और भ्रष्टाचार नहीं देखना चाहता। अगर अधिकारियों को कोई समस्या है तो मैं उनका ट्रांसफर कर दूंगा लेकिन मैं मध्य प्रदेश से अपराधियों को बाहर निकालने और गरीबों की मदद करने के अभियान को नहीं रोकूंगा।’

कांग्रेस बोली- शिवराज ने खोया करिश्मा
शिवराज के राजनीतिक ट्रैक में बदलाव को लेकर भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जब इस तरह की अटकलें शुरू हुईं कि शिवराज को मध्य प्रदेश से हटा दिया जाएगा तब उन्होंने अपने ‘नरम’ और ‘सौम्य’ होने की अपनी छवि को बदलने की कोशिश शुरू कर दी। हालांकि, कांग्रेस का मानना है कि 2023 में शिवराज के इस छवि बदलाव का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी नरेंद्र सलूजा ने कहा कि शिवराज ने जनता को गुमराह करने के लिए एक हिल स्टेशन पर कैबिनेट बैठक आयोजित करने के लिए जनता का पैसा खर्च किया। कांग्रेस नेता बिना दिखावे के आयोजन के ठोस काम करने में भरोसा रखते हैं। उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री को समझना चाहिए कि उन्होंने अपना करिश्मा खो दिया है और उनकी छवि में बदलाव की कोशिश कोई असर नहीं डालेगी।’

भाजपा बोली- इसमें छवि बदलने जैसा कुछ नहीं
मध्य प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा, ‘इसमें छवि बनाने या बदलने जैसा कुछ नहीं है। कांग्रेस सरकार के 15 महीने के कुशासन के कारण भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार सत्ता में आई। भाजपा कभी भी चुनाव जीतने के लिए काम नहीं करती बल्कि हमेशा गरीबों की मदद करने और लोगों का दिल जीतने के लिए काम करती है।’

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