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लक्झरी रथ पर सवार होेंगे शिवराज सिंह

 उज्जैन 5 जुलाई 2018 । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विधानसभा चुनाव से पहले जनता का आशीर्वाद लेने निकल रहे हैं। यात्रा का नाम है ‘जन आशीर्वाद यात्रा’। 14 जुलाई को उज्जैन से इस यात्रा का शुभारंभ होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खुद शिवराज सिंह को यात्रा पर रवाना करने उज्जैन आ रहे हैं। बता दें कि जिस रथ पर सवार होकर शिवराज सिंह जनता का आशीर्वाद लेने निकलने वाले हैं वो अपने आप में किसी लक्झरी सुइट से कम नहीं है। 20 फीट ऊचें इस रथ में शिवराज सिंह के काम और आराम की सारी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। जनता के बीच आते ही वो लिफ्ट से ऊपर आएंगे और भाषण देकर वापस नीचे चले जाएंगे। इस दौरान वो आॅफिस का कामकाज भी कर सकेंगे और गोपनीय मीटिंग भी।

तीसरी बार फिर महाकाल
यह उनके साढ़े बारह साल के कार्यकाल में तीसरी ‘जन आशीर्वाद यात्रा‘ होगी। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2008 और वर्ष 2013 में भी विधानसभा चुनाव से पहले भगवान महाकालेश्वर की पूजा कर उज्जैन से ही अपनी जन आशीर्वाद यात्रा शुरू की थी और दोनों बार भाजपा को भारी बहुमत से विजय मिली थी। प्रदेश में भाजपा वर्ष 2003 से सत्ता में है। 14 जुलाई से शुरू होने वाली इस यात्रा का क्रम 25 सितंबर तक चलेगा।

भोपाल में कार्यकर्ता महाकुंभ से होगा समापन
25 सितंबर को भोपाल में होने वाले विशाल कार्यकर्ता महाकुंभ के साथ इस यात्रा का समापन होगा और उस दिन भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इसमें भागीदारी करेगा। वर्ष 2013 की जन आशीर्वाद यात्रा में चौहान प्रदेश के 206 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचे थे, लेकिन इस बार यात्रा के दौरान वह प्रदेश की सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचेंगे। जन आशीर्वाद यात्रा का प्रत्येक चरण दो दिन का होगा और इसके लिए प्रदेश को दो हिस्सों में बांटा गया है। एक हिस्से में विंध्य, बुंदेलखंड और महाकौशल को रखा गया है, जबकि दूसरे हिस्से में भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल और मालवा-निमाड़ के विधानसभा क्षेत्र होंगे। सिंह ने बताया कि चौहान सप्ताह में चार दिन जन आशीर्वाद यात्रा पर रहेंगे। दो दिन एक हिस्से में तो दो दिन प्रदेश के दूसरे हिस्से में यात्रा करेंगे। दोनों हिस्सों के लिए अलग-अलग रथ बनाये गये हैं।

मप्र में बढ़ी भाजपा हाईकमान की सक्रियता, सहस्रबुद्धे ने जाने मैदानी हाल

विधानसभा चुनाव की तैयारी में भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं का दखल प्रदेश में बढ़ता जा रहा है। पहले राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल आए तो उन्होंने हाईकमान की मंशा से कार्यकर्ताओं को अवगत कराया। अब प्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे आए तो उन्होंने पार्टी के जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारियों के साथ वन-टू-वन बातचीत कर मैदानी हकीकत का हाल जाना।

रामलाल भोपाल-होशंगाबाद के कार्यकर्ताओं की बैठक लेने के बाद अब बुंदेलखंड में सागर संभाग के कार्यकर्ताओं की बैठक ले रहे हैं। वहीं डॉ. सहस्त्रबुद्धे ने भोपाल-नर्मदापुरम् संभाग के जिलों में संगठन की स्थिति, नेताओं के बीच खींचतान, विधायक की लोकप्रियता, प्रशासनिक हालात से लेकर कार्यकर्ताओं के मनोबल तक के बारे में विस्तार से जानकारी ली।

भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में साढ़े छह घंटे चली बैठक में सहस्त्रबुद्धे के सामने कई जिलों के मतभेद की शिकायतें आईं तो कई जिलों के लचर संगठन का पता चला। भोपाल और सीहोर दो जिलों में तो अब तक कार्यकारिणी का ही गठन नहीं हो पाया है। इस बैठक में प्रदेश संगठन का कोई भी नेता शामिल नहीं था।

अमित शाह करेंगे संभाग का दौरा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहित बाकी राष्ट्रीय नेताओं के प्रदेश में दौरे लगातार बढ़ते जा रहे हैं। शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि यहां चुनाव संगठन लड़ेगा। इसी हिसाब से राष्ट्रीय नेता अपनी जमावट कर रहे हैं। कर्नाटक चुनाव के बीच शाह भोपाल आए और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। फिर जून में जबलपुर आए और प्रदेश के नेताओं के साथ बैठक की। अब वे संभाग के दौरे करेंगे। इससे पहले भी राष्ट्रीय महासचिव अनिल जैन, सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह भोपाल आकर फीडबैक लेकर जा चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी राजगढ़ और इंदौर दौरा इसी कड़ी से जुड़ा है।

रामलाल ने ली विधायक, सांसद और कार्यकर्ताओं की बैठक

राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने दमोह में बुंदेलखंड के सारे विधायक-सांसद और प्रमुख कार्यकर्ताओं की बैठक ली। इस बैठक में उन्होंने हाईकमान का संदेश नीचे तक के कार्यकर्ताओं को दिया। इसमें बूथ से लेकर टिकट वितरण और कार्यकर्ताओं को तवज्जो देने का मुद्दा शामिल है।

भोपाल-सीहोर में कार्यकारिणी नहीं बनी

डॉ. सहस्त्रबुद्धे की वन-टू-वन बैठक में सामने आया कि भोपाल और सीहोर जिले के अध्यक्ष अब तक अपनी टीम का गठन नहीं कर पाए हैं। इसके कारण बूथ कमेटी से लेकर कई तरह की चुनावी तैयारी प्रभावित हो रही है। उन्होंने जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारियों से हर जिले का फीडबैक भी लिया।

बैतूल में दो गुटों में बंटी पार्टी

बैतूल में भाजपा के जिलाध्यक्ष जितेंद्र कपूर और विधायक हेमंत खंडेलवाल के बीच चल रहे मतभेद भी खुलकर सामने आ गए हैं। बताया गया कि जिलाध्यक्ष के साथ में राजीव खंडेलवाल, राजा ठाकुर और मप्र रोजगार बोर्ड के अध्यक्ष हेमंत देशमुख हैं। आए दिन दोनों गुटों की लड़ाई सार्वजनिक हो जाती है।

कुछ दिन पहले पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह बैतूल पहुंचे तो जिलाध्यक्ष कपूर उनके साथ हेमंत खंडेलवाल के घर नहीं गए। इसके बाद देशमुख ने रोजगार मेला लगाया तो विधायक शामिल नहीं हुए। बैठक में खुलासा हुआ कि बैतूल के राजा ठाकुर काफी प्रभावशाली व्यक्ति हैं, जिनके प्रभाव से पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान के कार्यकाल में कपूर को जिलाध्यक्ष बनाया गया था, तबसे ही ये अदावत चली आ रही है।

शिव गीत गुनगुना साधना से बोले, तुमको चलना होगा

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीती रात गीत गाते हुये धर्मपत्नी साधना सिंह से साथ मांगा। उन्होंने मुख्यमंत्री निवास पर एक कार्यक्रम में गीत गुनगुनाये। इस दौरान मुख्यमंत्री के सुर में सुर उनकी धर्मपत्नी साधना सिंह ने भी मिलाये। वहीं बेटे कार्तिकेय ने भी दोनों का साथ दिया।
गाने के बोल थे –
ओहोहो…
ओ नदिया चले चले रे धारा ओहोहोह
ओ नदिया चले चले रे धारा चन्दा चले चले रे तारा
तुझको चलना होगा, तुझको चलना होगा
तुझको चलना होगा, तुझको चलना होगा
ओहोहो

प्रदेश में बच्चियां दरिंदगी का शिकार हो रहीं हैं और शिवराज गाने गाकर खुशी मना रहे: कमलनाथ

भोपाल। प्रदेश में बढ़ते महिला अपराधों को लेकर शिवराज सिंह चौहान इस वक्त विपक्ष के निशाने पर हैं। किरार समाज के सम्मान समारोह कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज के गाना गाने से अब बवाल मच गया है। राजनीतिक हमले होने शुरु हो गए है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने इसको लेकर शिवराज पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि मंदसौर और सतना में बच्चियों के साथ दुष्कर्म हो गया, दोनों बच्चियां जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं। लेकिन प्रदेश और भांजियों के मामा अपने निवास पर कार्यक्रम आयोजित कर उत्सव मना रहे हैं, गाना गा रहे हैं। कमलनाथ ने इसे बेहद ही शर्मनाक बताया है।

सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में अखिल भारतीय किरार, धाकड़, क्षत्रिय महासभा का सम्मान समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने लोगों की फरमाइश पर एक फिल्मी गाना गाया था। इसमें उनकी पत्नी साधना और उनके बेटे कार्तिकेय ने भी साथ दिया। इस बात को लेकर कमलनाथ ने शिवराज को आड़े हाथों लिया है और जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री सारे प्रदेश की कन्याओं से ‘मामा’ कहलाया जाना पसंद करते हैं। वही मामा अब अपने ही प्रदेश में अपनी भांजियों की अस्मत लूटे जाने पर कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहे हैं।

बता दें कि प्रदेश में महिलाओं से संबंधित अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक के बाद एक बलात्कार के मामलों ने प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। अपराधी मासूब बच्चियों तक को हवस का शिकार बनाने से नहीं चूक रहे हैं।

मेरा कार्यकाल बेहतर, मुख्यमंत्री मे साहस हो तो सार्वजनिक तौर पर डिबेट करे ; दिग्विजय
पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के राष्ट्ीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने प्रदेश में 14 सालो से कार्यरत भाजपा सरकार से अपने 10 वर्षो के मुख्यमंत्री के कार्यकाल को उत्कृष्ट बताते हुये मौजूदा सीएम शिवराजसिंह चैहान को चुनौती दी कि उनमे साहस हो तो सार्वजनिक तौर पर डिबेट करे।
उन्होने प्रधानमंत्री के इतिहास का ज्ञान पर भी सवाल खडे किये। उन्होने पुनः दोहराया कि कांग्रेस को चुनाव मे शिकस्त दे सके इतनी क्षमता भाजपा मे नहीं है। कांग्रेस पराजय में ं कांग्रेसजनों की ही भूमिका होती है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अगले विस चुनाव मे कांग्रेस की सत्ता में वापसी का उन्होने भरेासा जताया।
मीडिया से चर्चा में एक दिग्विजयसिंह ने ं कहा कि कहा कि भाजपा इस देश मे हिन्दू -मुस्लिम समुदाय को भड़काने का काम कर रही है। उन्होंने लवजेहाद के मुद्दे पर भाजपा नेता मुख्तार नकवी को सबसे बड़ा दोषी बताया। मंदसौर और कश्मीर में बलातकार की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा वालों को इसमें भी धर्म और जाति दिखती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पेट्रोल की कीमतें बढ़ाकर खूब मुनाफा कमाया और अनाज पर आयात ड्यूटी घटाकर किसान के बजाए व्यापारियों को फायदा पहुचाया।
श्री सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एमएसपी बढ़ाने की बात कर रही है जो सीधे किसानों को मूर्ख बनाने वाली बात है। उन्होंने भावन्तर योजना को किसानों को लूटने वाली योजना बताया। मुख्यमंत्री की 200 रु में बिजली देने वाली योजना को भी धोखा बताते हुए कहा कि पहले बिजली बिल नही भरने वाले लोगों को जेल भेज और अब 200 रु में बिजली देने की बात कर रहे है।
श्री सिंह ने कहा कि देश के अच्छे दिन नही आ रहे । हिटलर ने भी कहा था कि बेटर देन टूमारो लेकिन उसके भी अच्छे दिन कभी नही आए। दिग्गी ने दिल्ली सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने शिवराज सिंह को चुनोती दी कि मेरे 10 साल और भाजपा के 15 साल के कामों की तुलना के लिए एक मंच पर आमने सामने आ जाए सब साफ हो जाएगा।
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि भारतीय प्रशासनिक अधिकारी दीपाली रस्तोगी द्वारा सोशल मीडिया पर लिखे लेख के जबाब में कहा कि ये उनका निजी अनुभव हो सकता है। यहाँ वे जिले के सभी छोटे बड़े कांग्रेसी नेताओं, सामाजिक, धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से मिले। दिग्विजय सिंह ने जमीन पर बैठकर कार्यकर्ताओं के साथ खाना खाया और उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में पूरी एकता के साथ चुनाव में काम करने की शपथ दिलाई।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखे हमले किये। अलग अलग नेताओं के गुटों में बंटी म प्र कांग्रेस में समन्वय स्थापित करने के लिए एकता यात्रा पर निकले म प्र के पूर्व मुख़्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ वरिष्ठ नेता रामेश्वर निखरा, अरुण यादव और समन्वय समिति के अन्य सदस्य भी थे। दिग्विजय सिंह जिले की सभी विधानसभा के कांग्रेसी नेता, कार्यकर्ता और पदाधिकारियों से मिले और उनकी बात सुनी। वह धार्मिक और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों से भी मिले और उनकी भी बात सुनी। कार्यकर्ताओं के बीच उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के जन विरोधी कार्यों को गिनाते हुए शिवराज सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीको आड़े हाथों लिया।
मीडिया से मुलाकात में श्री दिग्विजय सिंह चुनाव प्रबंध समिति के एक दर्जन से अधिक सदस्यो के काफिले के साथ मंगलवार से निमाड के पूर्वी अंचल के दो दिवसीय दौरे पर खडवा बुरहानपुर पहुंचे है। उनके साथ कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरूण यादव भी है। बुधवार देर शाम यहां से वे खरगौन के लिये प्रस्थान कर गए । इसके पूर्व उन्होने स्थानीय अनाज मंडी प्रागंण में महती संख्या में उपस्थित काग्रेस के जिला स्तरीय सम्म्ेलन में भाग लिया और विभिन्न खेमों में बंटे कांग्रेसजनो से गुप्तगू की।
एकता समन्वय यात्रा पर निकले प्रदेश के कांग्रेस समन्वय प्रभारी दिग्विजयसिंह ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरूण यादव के प्रभाव के क्षेत्र में कांग्रेस संगठन की बदहाली और आका्रेशित नेताओ से चर्चा कर उनकी भावनाओ को जाना है। निमाड का पश्चिमी अंचल अरूण यादव का गृह जिला
है तो पूर्वी अंचल उनका निर्वाचन क्षेत्र है। विडम्बना है कि निमाड में अरूण यादव के प्रभाव के पांच जिलो में पिछले चुनाव मे कांग्रेस इक्का दुकका सीट ही जीत सकी। निमाड मालवा की 66 सीटो में कांग्रेस केवल चार सीटे जीीती। खडवा बुरहानुपर जिलो में कांग्रेस खता ही नहीं खोल पाई।
ाकंाग्रेस के गढ कहलाने वाले खंडवा मे ही काग्रेस के हालात से चिंतित होकर दिग्गी का यह दौरा विस चुनाव में टिकट वितरण को लेकर अहम मााना जा रहा है।
आज गुव्तगू में कांग्रेसजनो ने इसी बात को तरजीह दी कि गुटबाजी से हटकर उम्मीदवार का चयन किया जाये अन्यथा पिछले परिणाम ही सामने होगे। सभी कांग्रेसजनो ने एक होकर पूरी सक्रियता से चुनाव कार्य करने और उम्मीदवार को विजयी बनाने का भरोसा दिया। सभी ने कहा कि भाजपा का चाल चरित्र चेहरा सब कुछ धूमिल हो चुका है। विकास के नाम पर भाजपाईयों ने अपने घर भर रहेे है। सांसद का ग्राम ग्राम बहिष्कार हो रहा है। जनता त्राही त्राही कर रही है। जनआका्रेश उफान पर है तो प्रशासन भी जुुमलेबाजी में लगा हुआ है। किसान मजूदर आदिवासी हरिजन सभी वर्ग परेशान है। सत्ता विरोधी लहर यौवन पर है। भाजपा मे ही बगावत से सुर उभर रहे है। ऐसे में कांग्रेस योग्य व जन भावना कि अनुरूप प्रत्याशी का चयन करे तो जिले की चारो सीटों पर निश्चित कांग्रेस का कब्जा बहाल होगा।कई चेहरों ने अपने को उम्मीदवार के रूप में पेश किया।
समन्वय एकता यात्रा पर निकले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने कहा कि केन््रद की मोदी सरकार का अंहकार ओर दर कदम विफलताओ ने देश को कई साल पीछे धकेल दिया है। वे देश के अब तक के बडे नाकाम प्रधानमंत्री साबित हुए है ।ऐसे प्रधानमंत्री इतिहास का ज्ञान के बिना बडी बडी बाते कररते
है और उनके जुमलेा पर भी कांग्रेस के राष्ट्ीय महासचिव मे तंज कसा।
0पीएम का इतिहास ज्ञान
बुरहानपुर मे मीडिया से उन्होने कहा कि हाल ही में यूपी के मगहर में संत
कबीरके निर्वाण दिवस आयोजित काय्रक्रम में बोलते हयें पीएम नरेन्द्र
मोदी ने काहा कि कबीर, गुरु नानक और गोरखनाथ एक साथ बैठ कर चर्चा करते
थे।
बाबा गोरखनाथ का जन्म 11वीं शताब्दी में हुआ था जबकि कबीर दास का जन्म
14वीं शताब्दी के आखिर में1398-मे हुआ था जो कि 120 साल जीवित रहे थे।
वहीं गुरुनानक देवजी 16वीं शताब्दी में ।
दिग्गी ने कहा कि अब ये पता नहीं कि पीएम के दिमाग में कहा से आई कि
तालाब के किनारे बैठकर चर्चा करते थे। उन्होंने पूरा इतिहास ही बदल
दिया।
विदेश में बता रहे है कि भारत के छह सौ करोड़ मतदाता है जबकि जनसंख्या सवा
करोड़। ऐसे प्रधानमंत्री जिसे न तो इतिहास का और न ही भूगोल का ज्ञान
है,ं केवल भाषण देने के अलावा कुछ नहीं कर सकते है। सारा ध्यान बांटने
के लिए कभी योगा की बात करते है तो कभी फिटनेस चैलेंज की। पूरी तरह से
फलाप शो व असफल पीएम है। श्री दिग्गी आगे बोले कि नोटबंदी को लेकर मोदी
ने दावा किया था कि नकली करंसी कालाधन भ्रष्टाचार आतंकवाद सभी का अंत
होगा लेकिन स्थिति इसके प्रतिकूल खडी है। न कालाधान आया और न आतंकवाद
समाप्त हुआ। नकली नोट सब असली हो गए। जितनी करंसी 8 नवंबर 2016 को थी
उससे ज्यादा करंसी आज प्रचलन मे है जिसके आंकडे रिजर्व बैंक दर्शा नहीं
रहा है। नेपान, भूटान, बंग्लादेश से जो इंडियन करंसी प्रचलन में वह
वापस नहीं आई है। इसका फायदा बैंक के कर्मचारियों और अधिकारियों को हुआ
है।
अपने तंज में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह को चपेटते हुये पूर्व सीएम
दिग्विजयसिंह ने कहा शिवराजसिंह कहते है हमने नर्मदा किनारे सवा छह
करोड़ृ पौधे लगाए है। उन्होने कहा कि नर्मदा परिक्रमा की 1800 किमी की
पद यात्रा के दौरान उन्हें केवल ं तीन पौधे दिखाई दिए। हम जहां जाते थे
उसके आगे-आगे पौधे लगाने की प्रक्रिया शुरू होती रही। इसका वीडिया क्लिप
भी आ गया है।
0विशेष।
0यादव समाज द्वारा आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह
पूर्व सांसद अरुण यादव, रामेश्वर नीखरा सदाशिव यादव की माध्ेजूदगी मे
उपस्थित सजातीय बंधुओ ने कांग्रेस को विजय दिलाने का संकल्प लिया।
ततपश्चात किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्याम यादव आभार व्यक्त किया।
0 श्री सिंह ने जिले के पूर्व विधायक राजनारायणसिंह सहित कांग्रेस के
वरिष्ठ नेताओ व सहयोगी संगठनाों के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से बंद
कमरे में गुप्तगू कर रायशुमारी की।
पूर्व मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस समन्वय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय
सिंह कई कांग्रेस नेताओं के घर भी गये।
0 कांग्रेस अपने चुनावी घोषणा पत्र में मछुआ समुदाय के हितार्थ घोषणाऐं
शामील कर सरकार बनने पर उन्हे पूरा करने का वादा करती है तो निश्चित
रूप से मछुआ समुदाय का जनसर्मथन कांग्रेस पार्टी को मिलेगा और कांग्रेस
पार्टी सरकार बना पायेगी। यह जानकारी देते हुए नेफ के प्रदेश कार्यकारी
अध्यक्ष महेश बावनिया ने बताया कि मछुआ समुदाय की उचित मांगों को लेकर
एक पत्र नेशनल एसोसिएशन आफ फिशरमेन ने खंडवा दौरे पर पधारे पूर्व
मुख्यमंत्री श्री दिग्गविजयसिंह को सौंपा है।

प्रदेश की वित्तीय स्थिति भयावह दौर में, शिवराज मौन तोड़ें- कमलनाथ

कमलनाथ ने कहा है कहा है कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति भयावह दौर से गुजर रही है। प्रदेश बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ऐसा ही चलता रहा तो ओवर ड्राफ्ट की स्थिति बन सकती है। अभी ओवर ड्राफ्ट के पहले की वेज एंड मीन्स की स्थिति बनने जा रही है।
कमलनाथ ने कहा है कि उन्होंने पूर्व में भी प्रदेश की आर्थिक स्थिति के संबंध में मुख्यमंत्री को श्वेत पत्र जारी करने की मांग को लेकर पत्र लिखा था, लेकिन उसका उन्होंने आज तक कोई जबाव नहीं दिया। आज प्रदेश का हर नागरिक वित्तीय स्थिति को लेकर भयभीत है। उनके द्वारा कई बार प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाने के बाद भी शिवराजसिंह ने अपना मौन नहीं तोड़ा।
कमलनाथ ने कहा है कि शिवराजसिंह चुनावी वर्ष में चुनाव जीतने के लिए नित नई घोषणाऐं कर रहे हैं व नित नई योजनाऐं ला रहे हैं। शिवराजसिंह की पुरानी हजारों घोषणाऐं आज तक पूरी होने के इंतजार में हैं, ऐसे में नई घोषणाऐं कैसे और कब पूरी होंगी? इसके लिए राशि कहां से आयेगी? ये सवाल प्रदेश के हर नागरिक के जेहन में है।
नाथ ने कहा कि प्रदेश का वित्त विभाग भी वित्तीय स्थिति को लेकर सरकार को निरंतर चेता रहा है। प्रदेश पर आज करीब पौने दो लाख करोड़ का कर्ज है। इस वित्तीय वर्ष में तीन बार सरकार बाजार से कर्ज ले चुकी है। सरकार हाल ही में ग्यारह हजार करोड़ का अनुपूरक बजट लेकर आई है। वित्तीय स्थिति के हाल यह हैं कि प्रदेश के सवा चार लाख कर्मचारियों में से अधिकांश के खाते में अब तक सातवें वेतनमान के ऐरियर्स की पहली किश्त अभी तक नहीं आई है। यह किश्त 31 मई तक आना थी।
कमलनाथ ने कहा है कि प्रदेश में बढ़ते कर्ज की स्थिति को देखते हुए सरकार को नये कर्ज लेने पर अविलंब रोक लगाना चाहिए। स्थिति दिन-प्रतिदिन भयावह होती जा रही है। 31 मार्च 2003 तक प्रदेश पर केवल 20 हजार 147 करोड़ 34 लाख का कर्ज था जो अब बढ़कर पौने दो लाख करोड़ के करीब हो गया है। सरकार को नई घोषणाऐं न कर पहले पुरानी घोषणाओं को पूरा करना चाहिए। लेकिन शिवराज सरकार चुनाव जीतने के लिए प्रतिदिन लोकलुभावन घोषणाऐं कर मतदाताओं को गुमराह व प्रभावित करने में लगी है। करोड़ों रूपये खुद की ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार पर खर्च किये जा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि प्रदेश पर आये इस वित्तीय संकट पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह स्थिति स्पष्ट करें व अपना मौन तोड़े?

यदि अब भी प्रदेश में 2 करोड़ मजदूर हैं, तो 15 साल से शिवराज सिंह क्या कर रहे थे: कमलनाथ

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने सीएम शिवराज सिंह सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने मध्यप्रदेश में असंगठित मजदूरों के पंजीयन को एक फर्जीवाड़ा करार देते हुए कहा है कि इस सरकार ने अब तक 1.82 करोड़ असंगठित गरीब मजदूरों का पंजीयन कर लिया है। मध्यप्रदेश में मतदाताओं की संख्या कुल 5 करोड़ है। सवाल यह है कि यदि 5 करोड़ मतदाताओं में से 1.82 करोड़ असंगठित गरीब मजदूर हैं तो कुल गरीबों की संख्या क्या होगी और यदि मप्र में इतनी ही गरीबी है तो पिछले 15 साल से कर क्या रही थी शिवराज सिंह सरकार।

एक अन्य बयान में कमलनाथ ने लिखा है कि: जिनके राज में पिछले 15 वर्ष में गरीबों पर बिजली चोरी के थोक में प्रकरण दर्ज हुए, वो ही आज चुनाव आते ही, उन्हें लुभाने के लिये कह रहे है गरीबों पर दर्ज बिजली चोरी के सारे प्रकरण वापस होंगे। गरीबों की इतनी चिंता पिछले 15 वर्षों में क्यों नहीं दिखायी ?

बता दें कि सीएम शिवराज सिंह चौहान ने असंगठित गरीब मजदूरों के लिए मुख्यमंत्री जन-कल्याण (संबल) योजना लागू की है। इसके तहत मजदूरों के बकाया बिजली बिल माफ किए जा रहे हैं और अब 200 रुपए प्रतिमाह पर अनलिमिटेड बिजली दी जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि मजदूर 200 रुपए में कूलर/पंखा, एलईडी टीवी सबकुछ चला सकते हैं। यदि ज्यादा बिजली खर्च हुई तो अतिरिक्त राशि का बिल सरकार भरेगी।

भाजपा में शिवराज सिंह और ब्राह्मणों के बीच तनाव

भारतीय जनता पार्टी में सीएम शिवराज सिंह और ब्राह्मण नेताओं के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। ब्राह्मण समाज को भाजपा को पक्का वोटबैंक माना जाता था परंतु इस बार यह जनाधार खिसकता नजर आ रहा है। कहा जा रहा है कि यह क्रिया की प्रतिक्रिया है। पिछले 14 सालों में सीएम शिवराज सिंह ने एक-एक करके सभी ब्राह्मण नेताओं को हाशिए पर ला दिया। इतना ही नहीं उन्होंने कुछ फैसले और बयान भी ऐसे दिए जो ब्राह्मण समाज को नाराज करने के लिए काफी थे। बीते रोज करियर काउंसलिंग के दौरान सीएम शिवराज सिंह ‘जातिवाद’ संबंधित सवाल पूछने वाला छात्र भी ब्राह्मण था। संगठन में इस बात को नोटिस किया गया है।

बीजेपी में बड़े ब्राह्मण नेताओं की उपेक्षा
दरअसल ब्राह्मणों को मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का समर्थक माना जाता रहा है। लेकिन प्रमोशन में आरक्षण मामले में हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए ‘माई का लाल’ बयान के बाद स्थितियां बदल गई। ब्राह्मण समाज मुखर होकर सामने आ गया है और वो शिवराज सिंह को कतई स्वीकारने को तैयार नहीं है। रही सही कसर पार्टी में प्रदेश में लंबे समय से ब्राह्मण समाज के नेताओं को लूप लाइन में डालने से हो गई। पार्टी के पास पहले पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी, पूर्व कैबिनेट मंत्री अनूप मिश्रा, लक्ष्मीकांत शर्मा और पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा जैसे इस वर्ग में पैठ रखने वाले नेता थे। कैलाश जोशी उम्र के चलते साइड लाइन कर दिए गए। बाकी को पार्टी ने हाशिए पर डाल दिया।

नहीं है कोई बड़ा ब्राह्मण नेता
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की कैबिनेट में कई ब्राह्मण मंत्री भी हैं, लेकिन इनकी समाज के प्रति सक्रियता कभी भी नहीं रही। जो समाज में सक्रिय हैं वो मंत्री तो हैं परंतु शक्तिवहीन कर दिए गए हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो संगठन और सरकार में एक भी बड़ा ब्राह्मण नेता नहीं है। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ओबीसी वर्ग से आते हैं। क्षत्रिय वर्ग से प्रदेश में नरेंद्र सिंह तोमर, नंदकुमार सिंह चौहान और कप्तान सिंह, भूपेंद्र सिंह जैसे धाकड़ नाम शामिल हैं, लेकिन ब्राह्मण वर्ग में बड़े नेताओं का टोटा है।

कैलाश जोशी थे बड़े नेता
पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी प्रदेश में भाजपा के आधार स्तंभ माने जाते थे। 2014 तक वे भोपाल के सांसद रहे। 2003 में उनके प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए ही भाजपा सत्ता में आई थी पर अब वे सक्रिय नहीं हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे के निधन के बाद केंद्र में प्रदेश का ब्राह्मण प्रतिनिधित्व खत्म हो गया है।

अनूप मिश्रा को अपमानिता किया जा रहा है
2013 से पहले तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा भाजपा सरकार में ब्राह्मणों के दमदार नेता माने जाते थे। कुछ समय से अपनी ही पार्टी से नाराज चल रहे हैं। इसी हफ्ते उन्होंने मुख्यमंत्री को लगातार हो रही अनदेखी को लेकर पत्र लिखा है। अनूप सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि उनका पार्टी में अपमान हो रहा है। और ये अपनी पराकाष्ठा पार कर चुका है। हालत ये है कि मुरैना से सांसद अनूप की उनके संसदीय क्षेत्र में छोटे अधिकारी तक नहीं सुनते। जिला प्रशासन उनको स्थानीय कार्यक्रमों तक में नहीं बुलाता।

लक्ष्मीकांत शर्मा को खत्म कर दिया गया, रघुनंदन भी हाशिए पर
पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा प्रदेश सरकार में मंत्री होने के साथ ही ब्राह्मण वर्ग में खासी पैठ रखा करते थे। विधानसभा चुनाव में हार के बाद और व्यापमं मामले में जेल जाने के बाद राजनीति से दूर कर दिए गए। इसी तरह ब्राह्मण नेता रघुनंदन शर्मा से भी भाजपा संगठन ने दूरी बना रखी है। शर्मा अपनी अनदेखी से इस कदर नाराज है कि उन्हें जब भी मौका मिलता है अपनी ही पार्टी की सरकार को घेरने से नहीं चूकते।

MP : मंत्री बनने कई सांसद चाहते हैं विधानसभा का टिकट

भारतीय जनता पार्टी के कई सांसद इन दिनों प्रदेश सरकार में मंत्री बनने के लिए विधानसभा टिकट की दौड़ में लगे हैं। ऐसे सांसदों की दिलचस्पी लोकसभा में न होकर प्रदेश की राजनीति में लौटने की है। इसकी वजह ये है कि 2008 के विधानसभा चुनाव में जिन सांसदों ने विधानसभा चुनाव लड़ा था, उनमें से कुछ मंत्री बन गए थे। ऐसे नेताओं में सरताज सिंह, रामकृष्ण कुसमरिया, गौरीशंकर बिसेन, माया सिंह, यशोधरा राजे सिंधिया शामिल हैं। सिर्फ नीता पटेरिया को ही उन दिनों सांसद से विधायक बनने पर मंत्री पद नहीं मिला था। भूपेंद्र सिंह भी सांसद रहने के बाद प्रदेश लौटे और मंत्री बने। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी सांसद रहे हैं।

अनूप मिश्रा की रुचि प्रदेश की सियासत में

मुरैना सांसद अनूप मिश्रा भी ग्वालियर की किसी विधानसभा सीट से टिकट पाकर प्रदेश की राजनीति करना चाहते हैं। यहां से निर्वाचित विधायक माया सिंह की रुचि अगला चुनाव लड़ने में नहीं हैं। वे केंद्र की राजनीति करना चाहती हैं। ग्वालियर पूर्व में भाजपा नेता सतीश सिकरवार का प्रभाव है जो निर्विरोध पार्षद चुने गए थे। उनकी पत्नी भी पार्षद है। पिता गजराज सिंह सिकरवार सुमावली से एमएलए रहे हैं। सतीश यहां से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। माना जाता है कि यदि पार्टी ने यहां से अनूप मिश्रा को टिकट दिया तो ही सिकरवार चुनाव नहीं लड़ेंगे। मिश्रा उमाभारती से लेकर शिवराज सरकार में मंत्री रहे हैं।

दो पूर्व प्रदेशाध्यक्ष भी टिकट दौड़ में

भाजपा के दो पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा और नंदकुमार सिंह चौहान भी विधानसभा चुनाव की टिकट की कतार में हैं। झा कांगेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं। वहीं चौहान की इच्छा भी अब प्रदेश की सियासत में हैं। पहले भी वे विधायक रह चुके हैं इसलिए उन्होंने भी विधानसभा टिकट में रुचि दिखाई है।

ऊंटवाल की नजर आगर पर

अजा के लिए आरक्षित देवास सीट से निर्वाचित सांसद मनोहर ऊंटवाल की दिलचस्पी भी राष्ट्रीय राजनीति में नहीं है। दोबारा विधायक बनकरवे प्रदेश में मंत्री बनना चाहते हैं। उनकी नजर आगर सीट पर है जहां से गोपाल परमार विधायक हैं। परमार कह चुके हैं कि ऊंटवाल उनका टिकट कटवाकर विस का टिकट चाहते हैं।

कुलस्ते लखनादौन के इच्छुक

सिवनी मंडला लोस क्षेत्र से भाजपा सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते प्रदेश के कद्दावर आदिवासी नेता हैं। अब केंद्र की राजनीति में रुचि नहीं रही। वे लखनादौन से विस का टिकट चाहते हैं। इस सीट पर अभी कांग्रेस का कब्जा है। पूर्व राज्यपाल स्व. उर्मिला सिंह के बेटे योगेंद्र सिंह ‘बाबा” लखनादौन से विधायक हैं।

गोहद सीट पर प्रसाद की रुचि

भिंड सांसद डॉ. भागीरथ प्रसाद की नजर गोहद विधानसभा क्षेत्र पर है। इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व फिलहाल सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री लालसिंह आर्य कर रहे हैं। पार्टी नेताओं की मानें तो आर्य खुद लोकसभा में जाना चाहते हैं, इसलिए दोनों नेता आपसी सामन्जस्य से सीटों की अदलाबदली करना चाहते हैं।

बोधसिंह चाहते हैं वापसी

बालाघाट के सांसद बोधसिंह भगत फिर विधानसभा लौटना चाहते हैं। 2003 में भगत खैरलांजी विस क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं। पार्टी ने 2014 में भगत को लोस का टिकट देकर सांसद बना दिया पर वे चाहते हैं कि कटंगी सीट से उन्हें विस का टिकट दिया जाए। कटंगी से फिलहाल वयोवृद्ध नेता केडी देशमुख विधायक है।

उदयप्रताप की दावेदारी सिवनी मालवा या होशंगाबाद से
कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने वाले उदय प्रताप सिंह भी अब विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। उदय प्रताप सिंह वर्ष 2014 के पहले भाजपा में शामिल हुए थे। अब उनकी रुचि सिवनी मालवा या होशंगाबाद सीट पर है। सिवनी मालवा से फिलहाल सरताज सिंह विधायक हैं। पार्टी उनका टिकट काटती है तो सरताज सिंह इस प्रयास में हैं कि टिकट उन्हें मिल जाए। यदि पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा को सिवनी मालवा भेजा तो उदय प्रताप सिंह होशंगाबाद सीट से विधानसभा चुनाव 2018 दावेदारी कर सकते हैं।

ज्ञानसिंह को दिल्ली नहीं भाई

शहडोल सांसद ज्ञानसिंह एक बार फिर प्रदेश की सियासत में लौटना चाहते हैं। वे शिवराज कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं। सांसद बनने के बाद भी मंत्रीपद नहीं छोड़ना चाहते थे। बांधवगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा ने उनके बेटे शिवनारायण सिंह टिकट देकर विधायक बनवा दिया।

पूर्व सांसद जटिया व मोघे भी कतार में

पूर्व सांसद सत्यनारायण जटिया और कृष्णमुरारी मोघे भी चाहते हैं कि पार्टी उन्हें 2018 के चुनाव में विधानसभा का टिकट दे। मोघे एक बार खरगोन लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री रहे हैं। जटिया भी उज्जैन लोकसभा से कई बार सांसद रहे हैं। केंद्र में मंत्री भी रहे।

मप्र में लोकसभा में

कुल सीट – 29

सामान्य – 19

अजा – 04

अजजा – 06

मप्र में विधानसभा की सीटें – 230

भाजपा – 165

कांग्रेस – 57

बसपा – 04

अन्य – 03

राज्यसभा सांसद – 11

टिकट का निर्धारण करना समिति का अधिकार

टिकट की दावेदारी करना भाजपा में प्रत्येक कार्यकर्ता का अधिकार है परन्तु 230 टिकट का निर्धारण करना भाजपा की चुनाव अभियान समिति का अधिकार क्षेत्र है। पार्टी में यह कार्य मर्यादित और अनुशासित तरीके से होता आया है और आगे भी होगा

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