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शिवराज की आखिरी कैबिनेट 1को संभव

भोपाल 29 सितम्बर 2018 । अक्टूबर महीने की पहली तारीख को होने वाली शिवराज सिंह चौहान कैबिनेट बैठक इस सरकार की आखिरी बैठक होगी। सरकार इस बैठक में कुछ बड़े फैसले ले सकती है। इसकी वजह है विधानसभा चुनाव। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मतदाताओं को लुभाने संबंधी योजनाओं की घोषणा कर सकते है। चूंकि आचार संहिता अगले महीने के प्रथम सप्ताह में लग जाएगी इसलिए पूरा फोकस पेंडिंग काम फटाफट निपटाने पर लगा हुआ है। सूत्रों के अनुसार शिवराज सिंह सरकार 29 सितंबर और 01 अक्टूबर को कैबिनेट बैठक की तैयारी कर रही है। लगातार 2 केबिनेट बैठकों से स्पष्ट संकेत सामने आ रहा है कि आचार संहिता अक्टूबर के पहले सप्ताह में कभी भी लग सकती है।

चूंकि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती है, इसलिए इसके बाद इसका लगना तय माना जा रहा है। सरकार और राजनीतिक दलों के अलावा आम जनता भी आचार संहिता लागू होने की तारीखों का अपने तरीके से अनुमान लगा रही हैं। चुनाव आयोग की तरफ से जो स्पष्ट संकेत आ रहे हैं उसके अनुसार सितंबर माह समाप्त होने के बाद कभी भी आचार संहिता लागू हो सकती है। यानि 2 अक्टूबर को भी हो सकती है या फिर 5 अक्टूबर।

सीएम के बेटे कार्तिकेय ने संभाली बुदनी विधानसभा
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जहां पूरे प्रदेश में जनआशिर्वाद यात्रा निकालकर चौथी बार सरकार बनाने के लिए जोर लगा रहे हैं। वहीं उनका बडा बेटा कार्तिकेय ने अपने पिता की विधानसभा सीट पर फोकस कर रहे हैं। कार्तिकेय ने इसकी शुरुआत जनवरी 2018 से युवाओं के खेल आयोजन से कर दी थी। दरअसल सीएम अपनी विधानसभा को समय नहीं दे पा रहे हैं, इसके चलते उन्होंने अपने बेटे को मैदान में उतारा है।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पिता की सुरक्षित सीट पर बेटा राजनीतिक दांव—पेंच तो सीखेगा ही साथ में क्षेत्र के लोगों से भावनात्मक लगाव भी बनेगा, इससे मुख्यमंत्री अपने प्रतिव्दंदी प्रत्याशी को पिछले बार से ज्यादा मतों से पराजित कर सकेंगे।

सीएम ने अपना पूरा फोकस 230 विधानसभा सीटों पर कर रखा है। हाल ही में भाजपा महाकुंभ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मेरा बूथ सबसे मजबूत का मंत्र दिया।

शाह ने अबकी बार 200 पार का भी नारा बूलंद किया है। इधर एट्रोसिटी एक्ट ने प्रदेश की राजनीति को ही बदल दिया है, इस बार के चुनाव में न तो लहर दिखाई दे रही है न ही कोई मुददा ऐसे में मुख्यमंत्री के लिए अबकी बार 200 पार की बात तो दूर अपनी पार्टी को जीत दिलाने के लिए संघर्ष करना पड रहा है।

अर्जुन राय ने बढाई चिंता
सीएम के क्षेत्र बुदनी में किसान आंदोलन के दौरान यहां के एक युवक अर्जुन राय ने जेल जाकर सरकार के लिए चिंता बढा दी है। अर्जुन राय दिल्ली विश्वविधालय से अपनी पढ़ाई पूरी कर बुधनी लौटे। आदिवासियों में उनकी काफी अच्छी छवि है और वह अब विधानसभा क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। वह किसानों और आम लोगों से मिलकर शिवराज के खिलाफ माहौल तैयार कर रहे हैं।

इस युवक की लोकप्रियता को कम करने के लिए ही सीएम ने अपने बेटे कार्तिकेय को क्षेत्र मे सक्रिय किया है। इधर कांग्रेस किरार समाज के नेता और पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल को बुदनी से टिकट दे सकती है। मुख्यमंत्री को उनके घर में ही घेरने की रणनीति बनाई गई है।ये सीएम की पारंपरिक सीट है। माहौल को देखते हुए सीएम ने अपने विश्वस्त और बालसखाओं रमाकांत भार्गव, गुरुप्रसाद शर्मा, राजेंद्र राजपूत और शिव चौबे को भी क्षेत्र के अलग—अलग हिस्सों की जिम्मेदारी सौंप रखी है।

मध्य प्रदेश में भाजपा को दूसरा सबसे बड़ा झटका, कांग्रेस में शमिल हुए दिग्गज नेता
बाजपा शासित राज्य मध्य प्रदेश में इसी साल के अंत तक विधानसभा चुनाव का आयोजन किया जाएगा। लिहाज राज्य में चुनावी चर्चा चरम पर है। सत्ताधारी भजापा और मुख्य विरोधी कांग्रेस पार्टी सभी चुनाव मे जीत दर्ज करने के लिहाज से आय दिन जनता के बीच चुनावी सभाएं कर रहे हैं।

वहीं इससे इतर नेताओं का ‘दल-बदल खेल’ भी जारी है। इस क्रम में सत्ताधारी पार्टी के बड़ा झटका देते हुए गिग्गज भाजापा नेता और रीवा के पूर्व विधायक पुष्पराज सिंह ने कमल छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। चुनावी मौसम में पुष्पराज सिंह का भाजपा से अलग होना जाहिर तौर पर पार्टी के बड़ा झटका साबित हो सकता है।

आपको बता दें कि पुष्पराज सिंह ने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गंधी की मौजूदगी में शुक्रवार को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है। बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों मध्य प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इस क्रम में शुक्रवार को यहां रीवा में ही पुष्पराज सिंह और राहुल गांधी की मुलाकात हुई और फिर ऐलान किया गया कि पुष्पराज सिंह अब कांग्रेस पार्टी में शामिल हो चुके हैं।

गौर हो कि पूर्व भाजपा विधायक पुष्पराज सिंह के बेटे दिव्यराज सिंह रीवा जिले की सिरमौर विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक हैं। बता दें कि पुष्पराज सिंह का पार्टी छोड़ना भाजपा के लिए दूसरा बड़ा झटका माना जा रहा है, इससे पहले सत्ताधारी दल को उस समय पहला बड़ा झटरा लगा था जब कटनी जिले की पद्मा शुक्ला ने बीजेपी से अलग हो कर कांग्रेस की सदस्यता ली थी।

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