मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> हार का ठीकरा सिद्धू के सिर और चन्नी की फिर भी बल्ले-बल्ले? क्या है कांग्रेस की प्लानिंग

हार का ठीकरा सिद्धू के सिर और चन्नी की फिर भी बल्ले-बल्ले? क्या है कांग्रेस की प्लानिंग

नयी दिल्ली 08 मार्च 2022 ।  जाब विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आने वाले हैं, लेकिन कांग्रेस में परिणाम के बाद के हालातों पर अभी से मंथन होने लगा है। दरअसल ज्यादातर एग्जिट पोल में कांग्रेस के सत्ता से बाहर जाने और आप की सरकार बनने का अनुमान जाहिर किया गया है। इसके चलते कांग्रेस की टेंशन बढ़ी दिख रही है। सोमवार को एग्जिट पोल के दिन चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस कार्यालय पर सन्नाटा पसरा दिखा। यहां तक कि मनीष तिवारी जैसे नेता पहले ही नवजोत सिंह सिद्धू पर ठीकरा फोड़ने में जुटे हैं। भले ही केंद्रीय नेतृत्व ने रिजल्ट आने तक इंतजार की बात कही है, लेकिन स्टेट यूनिट पहले ही सिर फुटव्वल के मूड में है। एक तरफ सोमवार को एग्जिट पोल के बीच ही सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने होम मिनिस्टर अमित शाह से मुलाकात की तो वहीं सिद्धू प्रदेश कार्यालय में सदस्यता अभियान में व्यस्त थे। कहा जा रहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू खुद अपनी ही सीट पर फंसे दिख रहे हैं। इसके अलावा कई नेता उनकी कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं और उन्हें हार का जिम्मेदार बताया जा रहा है। साफ है कि हार का पूरा ठीकरा एक तरह से सिद्धू के ही सिर पर फोड़ने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों पंजाब को लेकर टॉप लीडरशिप की एक मीटिंग हुई थी। इसमें दो मुद्दों पर बात हुई थी कि यदि पंजाब में कांग्रेस हारती भी है तो चन्नी को प्रमुख चेहरे के तौर पर बनाए रखा जाएगा। इसकी वजह यह है कि दलित नेता होने के चलते पार्टी उनके जरिए यूपी, राजस्थान, बिहार, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश समेत तमाम राज्यों में लाभ लेना चाहती है। दरअसल भाजपा इन राज्यों में दलित वोट बैंक हासिल करने की कोशिश में है। साफ है कि इस रणनीति में चरणजीत सिंह चन्नी जगह बनाते दिखते हैं।

क्या हार के बाद सिद्धू को किनारे लगा देगी कांग्रेस

अब बात सिद्धू की करें तो पार्टी ने उन्हें आगे कर कैप्टन अमरिंदर सिंह को बेदखल कर दिया था। लेकिन उसके बाद जिस तरह से उनकी चन्नी के साथ रार बनी रही, उसने चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। ऐसे में पार्टी की ओर से उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी आगे मिल पाएगी, इस बात में संभव है। सिद्धू को लेकर कहा जाता है कि वह किसी भी खेमे के नहीं हैं और वह सबसे ही अलग हैं। ऐसे में चन्नी से लेकर मनीष तिवारी और रवनीत बिट्टू जैसे नेता भी उनके खिलाफ हैं। यही वजह है कि कांग्रेस की हार की स्थिति में नवजोत सिंह सिद्धू ठीकरा फोड़ने के लिए सबसे आसान शिकार हो सकते हैं।

 

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

‘राजपूत नहीं, गुर्जर शासक थे पृथ्वीराज चौहान’, गुर्जर महासभा की मांग- फिल्म में दिखाया जाए ‘सच’

नयी दिल्ली 21 मई 2022 । राजस्थान के एक गुर्जर संगठन ने दावा किया कि …