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कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद सोनिया और राहुल में ठनी

नई दिल्ली 19 अगस्त 2019 । कांग्रेस इस समय बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। एक तरफ भाजपा के लगातार देश में बढ़ते ग्राफ से कांग्रेस लगभग खात्मे की ओर बढ़ रही है तो वहीं कांग्रेस के भीतर अंदरूनी क्लेश भी अब गांधी परिवार के घर तक पहुंच गया है। नए समीकरण में सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस में मां व बेटे के बीच ठन गई है।

बताया जा रहा है कि सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने से राहुल गांधी बेहद खफा बताए जा रहे हैं और उन्होंने राजनीति तक छोड़ने की धमकी दे दी है। इसके पीछे कारण साफ है कि कांग्रेस के लगातार गिरते ग्राफ को देखते हुए राहुल गांधी चाहते थे कि गांधी परिवार का वर्चस्व पार्टी पर कुछ कम हो और पार्टी अध्यक्ष गांधी परिवार से बाहर किसी को बनाया जाए। दरअसल भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कांग्रेस पर लगातार परिवारवाद को लेकर किए जा रहे तीखे हमले के बाद राहुल गांधी ने यह फैसला लिया था। मगर राहुल गांधी के इस फैसले को सोनिया गांधी ने तार- तार कर रख दिया। यानि लाख कोशिशों के बाद भी कांग्रेस गांधी परिवार से बाहर नहीं निकल पाई। आईए इसके पीछे की पटकथा का कुछ खुलासा करते हैं। लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बड़ी हार के बाद राहुल गांधी ने अपने इस्तीफे की पेशकश की थी और यह भी सुझाव दिया था कि कांग्रेस को दोबारा मजबूत करने के लिए गांधी परिवार के बाहर से किसी को पार्टी अध्यक्ष बनाया जाए। मगर यह बात सोनिया गांधी को नगवार थी। सोनिया नहीं चाहती थीं कि गांधी परिवार से बाहर किसी के पास कमान जाए और गांधी परिवार का वजूद धीरे-धीरे पार्टी के भीतर से खत्म होता जाए। इसके लिए सोनिया गांधी ने राहुल गांधी के हठ को देखते ही अपने मोहरे बिछा दिए थे। दरअसल पार्टी के भीतर एक बड़ा कुनबा, जिसे सोनिया गांधी के करीब कहा जा रहा था वह राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद हशिए पर चला गया था।

पार्टी के किसी भी फैसले पर उनसे कुछ नहीं पूछा जाता था और उनका रोल पार्टी में बेहद सीमित हो गया था। राहुल गांधी के इस्तीफा देने के साथ ही यह ग्रुप एक्टिवेट हो गया था और लगातार सोनिया गांधी के संपर्क में था। सोनिया के साथ-साथ यह धड़ा भी चाहता था कि दोबारा कमान सोनिया के पास ही आ जाए। इसी तरह कांग्रेस के भविष्य की पूरी पटकथा लिखी गई। चाहे इस्तीफा राहुल गांधी का 75 दिन बाद स्वीकार किया गया, मगर सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष बनाने की पटकथा बहुत पहले ही लिख दी गई थी। मगर सोनिया गांधी की इस पटकथा से राहुल गांधी बेहद खफा बताए जा रहे हैं। वह नहीं चाहते थे कि गांधी परिवार से दोबारा अध्यक्ष बनाकर भाजपा को परिवारवाद पर और खेलने का मौका दिया जाए। मगर राहुल गांधी की एक न चली और सोनिया गांधी ने अपने हर मोहरे अपने तरीके से फिट कर दिए। राहुल गांधी को यह भी पता था कि परिवार के भीतर से ही किसी को अध्यक्ष बनाने से उन्हें दोबारा अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने में बेहद कठिन रास्ता तय करना पड़ सकता है। जबकि बाहरी किसी नेता को अध्यक्ष बनाए जाने से राहुल गांधी के लिए भी भविष्य में अध्यक्ष के रास्ते खुले रह सकते थे। अब सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद यह साफ हो गया है कि कमान गांधी परिवार से बाहर नहीं जाएगी और कुछ साल तक अंतरिम अध्यक्ष बने रहने के बाद सोनिया गांधी इस कमान को आगे प्रियंका गांधी को सौंपेगी।

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