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अविश्वास प्रस्ताव पर बोलीं सोनिया गांधी- कौन कहता है हमारे पास नंबर नहीं…

नई दिल्ली 19 जुलाई 2018 । संसद के मॉनसून सत्र की हंगामेदार शुरुआत हुई. मॉनसूत्र सत्र 18 जुलाई से 10 अगस्त तक चलेगा. केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों का अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने मंजूर कर लिया है. अब सवाल यह है कि क्या ये प्रस्ताव लाने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष के पास पर्याप्त संख्याबल है? अविश्‍वास प्रस्‍ताव के समर्थन के सवाल पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने कहा, ‘किसने कहा, हमारे पास नंबर नहीं?’

बता दें कि तेलुगू देशम पार्टी (TDP) की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों का समर्थन हासिल है.

इससे पहले लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस मंजूर कर लिया. अविश्वास प्रस्ताव मंज़ूर होते ही सबकी नज़र उन पार्टियों पर है, जो एनडीए में होते हुए भी सरकार को ‘धोखा’ दे सकती है. 20 जुलाई यानी शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी.

दरअसल, संसद की कार्यवाही शुरू होते ही संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने लोकसभा अध्यक्ष को संबोधित करते हुए कहा, ‘कई विपक्षी पार्टियों ने अविश्वास प्रस्ताव मूव किया है. आप से अनुरोध है कि वह प्रस्ताव को स्वीकार कर लीजिए, आज दूध का दूध और पानी का पानी हो ही जाए.’ इस पर सुमित्रा महाजन ने कहा, ‘मैंने इसे स्वीकार कर लिया है, एक दो दिन में इस पर फैसला लिया जाएगा.’ बता दें कि संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 50 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है.

मोदी सरकार का यह पहला अविश्वास प्रस्ताव
केंद्र की मोदी सरकार का यह पहला अविश्वास प्रस्ताव है. वैसे अगर आंकड़ों की बात करें, तो विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव से एनडीए सरकार पर कोई संकट नहीं है. मौजूदा वक्त में नरेंद्र मोदी सरकार के पास एनडीए के सभी सहयोगी दलों को मिलाकर लोकसभा में 310 सांसद हैं. ऐसे में विपक्ष का अविश्वास प्रत्साव सिर्फ एक सांकेतिक विरोध के तौर पर ही माना जाएगा.

लोकसभा में सीटों की स्थिति
अभी लोकसभा में बीजेपी के बीजेपी के 273 सांसद हैं. कांग्रेस के 48, एआईएडीएमके के 37, तृणमूल कांग्रेस के 34, बीजेडी के 20, शिवसेना के 18, टीडीपी के 16, टीआरएस के 11, सीपीआई (एम) के 9, वाईएसआर कांग्रेस के 9, समाजवादी पार्टी के 7, इनके अलावा 26 अन्य पार्टियों के 58 सांसद है. पांच सीटें अभी भी खाली हैं.

किस तरह लाया जाता है अविश्वास प्रस्ताव?
जब किसी दल को लगता है कि सरकार सदन का विश्वास या बहुमत खो चुकी है. तब वो अविश्वास प्रस्ताव पेश कर सकती है. सबसे पहले विपक्षी दल को लोकसभा अध्यक्ष या स्पीकर को इसकी लिखित सूचना देनी होती है. इसके बाद स्पीकर उस दल के किसी सांसद से इसे पेश करने के लिए कहती हैं.
अविश्वास प्रस्ताव को तभी स्वीकार किया जा सकता है, जब सदन में उसे कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन हासिल हो.
अगर लोकसभा अध्यक्ष या स्पीकर अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी दे देते हैं, तो प्रस्ताव पेश करने के 10 दिनों के अदंर इस पर चर्चा जरूरी है. इसके बाद स्पीकर अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोटिंग करा सकता है या फिर कोई फैसला ले सकता है.
संसद में 26 से ज्यादा बार अविश्वास प्रस्ताव रखे जा चुके हैं. 1978 में ऐसे ही एक प्रस्ताव ने मोरारजी देसाई सरकार को गिरा दिया.

चंदन मित्रा ने भाजपा से इस्तीफा दिया

राज्य सभा के दो बार सदस्य रह चुके वरिष्ठ पत्रकार चंदन मित्रा ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है।

उनके तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

राज्य सभा के पूर्व सदस्य मित्रा ने बताया , ‘‘ मैंने अपना इस्तीफा पत्र (भाजपा को) भेज दिया है।

हालांकि , उन्होंने अपने अगले कदम के बारे में कुछ नहीं बताया। लेकिन सूत्रों के मुताबिक वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। इस क्षेत्रीय दल के एक नेता ने कहा है कि 21 जुलाई को कोलकाता में पार्टी की शहीदी दिवस रैली में मित्रा के उपस्थित रहने की संभावना है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के करीबी माने जाने वाले मित्रा को 2003 में उच्च सदन में मनोनीत किया गया था। उस वक्त भाजपा नीत राजग की सरकार थी। वहीं , दूसरी बार वह पार्टी के टिकट पर 2010 में मध्य प्रदेश से राज्य सभा के लिए चुने गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के तहत पार्टी में उनके पास मामूली संगठनात्मक जिम्मेदारी ही बची रह गई थी।

उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव पश्चिम बंगाल में हुगली से लड़ा था। लेकिन वह तीसरे स्थान पर रहे थे।

दिग्गी के किले में सेंध लगाना शिवराज के लिये बडी चुनौती

दिग्गी राजा के राधोगढ किले में सेंध लगाना शिवराज सिंह के लिये बडी चुनौती है, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी दिग्गी के किले को ढहाने का प्रयास कर चुके है, लेकिन ढहाने की बात तो दूर की रही वह उसे हिला भी न सके । पिछले विधान सभा चुनाव में कांग्रेस के जयवर्धन सिंह ने भाजपा के राधेश्याम धाकड़ को भारी मतों के अंतर से हराकर रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इस बार राघौगढ़ में दिग्गी के किले में सेंध लगाने भाजपा को एक बार फिर किसी जमीन से जुड़े नेता की तलाश है। इस क्षेत्र के मतदाताओं को राजा साहब और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति अथाह प्रेम है और लोग उनका बहुत आदर करते है। इसी का नतीजा है कि यह सीट अभी तक कांग्रेस के कब्जे से बाहर नहीं जा सकी है। इस बार भी इस  सीट को हथियाने के लिए भाजपा की कोशिशें  लगातार जारी हैं।

सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में 20 जुलाई को होगी चर्चा

लोकसभा में विपक्ष की ओर से नरेंद्र मोदी नीत राजग सरकार के खिलाफ पेश किये गये अविश्वास प्रस्ताव पर 20 जुलाई को चर्चा और मत विभाजन होगा।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा, ‘‘अविश्वास प्रस्ताव पर 20 जुलाई (शुक्रवार) को चर्चा और मत विभाजन होगा । इस पर पूरे दिन चर्चा होगी और उसी दिन वोटिंग होगी।’’ सदस्यों की ओर से चर्चा के लिए कुछ और समय बढ़ाने की मांग पर स्पीकर ने कहा कि सात घंटे का समय चर्चा के लिये रखा गया है। इस दिन प्रश्नकाल नहीं चलेगा और गैर-सरकारी कामकाज नहीं होगा। सिर्फ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

इससे पहले लोकसभा में आज मोदी सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस स्वीकार हो गया ।

हालांकि सदन में तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हम 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाते हैं और उसके आयोजन की वजह से 20 जुलाई को तृणमूल का एक भी सांसद सदन में नहीं रहेगा। इसलिए शुक्रवार की जगह चर्चा सोमवार को कराई जाए।

संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के बाद किसी भी क्षण चर्चा के लिए तैयार रहना चाहिए। अविश्वास प्रस्ताव महत्वपूर्ण है और सदस्यों को अन्य कोई भी कार्यक्रम छोड़कर उसमें भाग लेना चाहिए।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदस्य शुक्रवार को चर्चा में भाग लेकर भी लौट सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर अभी चर्चा नहीं हो सकती। वह व्यवस्था दे चुकी हैं।

मांग नहीं माने जाने पर तृणमूल के त्रिवेदी और सौगत राय ने सदन से वाकआउट किया।

सदन में प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने वाले सभी सदस्यों का उल्लेख किया और तेदेपा के एस केसीनेनी को अविश्वास प्रस्ताव पेश करने को कहा ।

उल्लेखनीय है कि तेदेपा आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के प्रावधानों को पूर्ण रूप से लागू करने और आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने की मांग को लेकर राजग गठबंधन से अलग हो गई थी।

अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने एस केसीनेनी, तारिक अनवर, मल्लिकार्जुन खडगे समेत कुछ अन्य सदस्यों के अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को स्वीकार किया है और अब वह इस नोटिस को सदन के समक्ष रख रही हैं।

अध्यक्ष ने उन सदस्यों से खड़े होने का आग्रह किया जो अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस के पक्ष में हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे सदस्यों की संख्या 50 से अधिक है, इसलिये यह प्रस्ताव सदन में स्वीकार होता है।

इससे पहले स्पीकर ने शून्यकाल में कहा था वह चर्चा के लिए तिथि और समय की जानकारी 2..3 दिनों में देंगी।

संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने को तैयार है और दूध का दूध-पानी का पानी हो जायेगा । हम निश्चत तौर पर विजयी होंगे ।

तेदेपा सदस्यों ने बजट सत्र के दौरान भी अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था लेकिन अध्यक्ष ने सदन में व्यवस्था नहीं होने का हवाला देते हुए उसे अस्वीकार कर दिया था।

उधर कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा कि हमने पहले अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था और हम बड़ी पार्टी थे, इसलिये इसे रखने का मौका हमें दिया जाना चाहिए था।

इस पर स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि हमने नियमों के तहत काम किया है। जिन जिन सदस्यों ने नोटिस दिया था, उन सभी का उल्लेख किया और जिसने सबसे पहले रखा था, उन्हें प्रस्ताव रखने का मौका दिया ।

कमलनाथ की टीम का विस्तार जल्द

मप्र कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी का 18 जुलाई के बाद और विस्तार किया जाएगा। दस दिन पहले बनी कार्यकारिणी में सिंधी, कायस्थ और वाल्मिकी समाज के साथ ही अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया और सुरेश पचौरी जैसे वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों को भी शामिल किए जाने की तैयारी है। सूची में कुछ नाम चौंकाने वाले हो सकते हैं, जिन्हें पार्टी रणनीति के तहत कार्यकारिणी में ले रही है। पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ ने कार्यभार लेने के करीब दो महीने बाद सात जुलाई को 85 सदस्यों की कार्यकारिणी घोषित की थी।

इसमें वरिष्ठ नेताओं के कई समर्थकों के साथ ही कुछ समाजों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला। भोपाल प्रवास के दौरान जब नाथ ने समाजों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की तो उन्होंने कार्यकारिणी में अपने लोगों के नहीं होने की बात रखी। कुछ नेताओं के समर्थकों ने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से बात पहुंचाई थी।

नेताओं के समर्थक भी आएंगे : सूत्र बताते हैं कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों के नाम भी विस्तार में आएंगे। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के दो ही समर्थक कार्यकारिणी में लिए गए हैं तो पचौरी-भूरिया के भी तीन-तीन समर्थकों को स्थान मिला है। यादव की कार्यकारिणी में महत्वपूर्ण भूमिका में रहे चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी व केके मिश्रा को कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है। इसी तरह पचौरी-भूरिया के कुछ विश्वस्त समर्थकों आरिफ मसूद, अतुल शर्मा, छोटाबाबू राय, डॉ. विक्रांत भूरिया, विकल्प डेरिया आदि को जगह नहीं मिली है।

सिंधी समाज का चौंकाने वाला नाम आएगा

सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ की कार्यकारिणी के विस्तार में अब सिंधी, कायस्थ, वाल्मिकी और कुछ अन्य समाजों के प्रतिनिधियों को लेने की तैयारी है। सिंधी समाज ने कमलनाथ का सम्मान भी किया था, लेकिन उसके प्रतिनिधि के रूप में अभी किसी को नहीं लिया गया है। विस्तार में संसदीय कार्यक्षेत्र से जुड़े व्यक्ति को शामिल किए जाने की संभावना है।

अखिलेश 20 जुलाई को आएंगे भोपाल, अरुण यादव से मुलाकात पर सभी की नजर

विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर भोपाल आ रहे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव यहां मप्र कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव से भी मिलेंगे। अरुण यादव के बंगले पर औपचारिक बैठक होगी। अखिलेश यहीं भोजन भी करेंगे। चुनावी बेला में इस मुलाकात को सियासी नजर से देखा जा रहा है। सपा का दावा है कि दोनों नेताओं के बीच यह महज शिष्टाचार भेंट है। सपा प्रमुख अखिलेश 19 जुलाई को भोपाल आएंगे। वे दो दिन राजधानी में रहेंगे।

अखिलेश यादव यहां पहले पत्रकारवार्ता करेंगे और फिर पार्टी के प्रदेश कार्यालय पहुंचकर कार्यकर्ताओं से चर्चा करेंगे। वे नवंबर में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी के नेताओं से चर्चा करेंगे। साथ ही दूसरे राजनीतिक दलों के कुछ नेताओं के पार्टी में शामिल होने की संभावना है।

पार्टी फिलहाल इन नेताओं के नामों का खुलासा नहीं कर रही है। पार्टी के प्रवक्ता यश यादव ने बताया कि 20 जुलाई को यादव प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव से उनके घर पर मुलाकात करेंगे। अरुण यादव ने उन्हें भोजन पर आमंत्रित किया है। वहीं वे उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी से मिलने उनके घर भी जाएंगे।

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